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Kotdwar News: सहकारिता सामाजिक एकता और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की जीवंत मिसाल
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श्रीनगर। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के उपलक्ष्य में श्रीनगर के आवास विकास मैदान में जनपद स्तरीय सहकारिता मेले के दूसरे दिन बुधवार को युवा सहकार परिचय कार्यक्रम, सहकारिता गोष्ठी एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि उत्तराखंड गो सेवा आयोग के अध्यक्ष जितेन्द्र अंथवाल ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की जीवंत मिसाल है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाकर गांव-गांव में रोजगार और उत्पादन की नई संभावनाएं विकसित कर रही है। उन्होंने महिला समूहों और युवाओं से आह्वान किया कि वे सहकारिता आंदोलन से जुड़कर अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाएं। विशिष्ट अतिथि प्रादेशिक को-ऑपरेटिव यूनियन उत्तराखंड के उपाध्यक्ष शैलेंद्र बिष्ट ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सहकारिता ही वह माध्यम है जो बिखरी हुई संसाधन शक्ति को संगठित कर आर्थिक मजबूती में बदल सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के स्थानीय उत्पाद जैसे ऑर्गेनिक घी, शहद, हर्बल टी, चांगोर के लड्डू और पारंपरिक अचार अब सहकारिता मेलों के माध्यम से देशभर में पहचान बना रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान पौड़ी और कल्जीखाल विकासखंड के 124 कृषकों को एक करोड़ 54 लाख का 0% पर ऋण वितरित किया गया। मौके पर महिला मंगल दल कोट, भीताई और बगवाड़ी की महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत और लोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। साथ ही, स्थानीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की ओर से प्रस्तुत नृत्य और गीतों की भी धूम रही। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक मातवर सिंह रावत, सम्पत सिंह रावत, महावीर कुकरेती, मनोज पटवाल, जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक संजय रावत, विभागीय आदि मौजूद रहे।
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महिला समूहों के उत्पादों को मिला बाजार
मेले में पहुंची महिला सहायता समूहों, मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटियों और कृषक उत्पादक संगठनों ने अपने-अपने स्टॉल लगाए। जिससे उन्हें बाजार मिल रहा है। स्टॉलों पर ऑर्गेनिक घी, शहद और हर्बल टी को लोगों द्वारा खूब सराहा जा रहा है। संस्थान के प्रतिनिधि तरुण जोशी ने बताया कि उत्तराखंड के इन उत्पादों की देश के विभिन्न राज्यों में भारी मांग है। कोटद्वार कृषक उत्पादक संगठन की नीतू डंगवाल ने बताया कि उनके समूह द्वारा बनाए गए चांगोर के लड्डू, बर्फी और मल्टीग्रेन बिस्किट को विशेष सराहना मिली है। उनके समूह में 250 से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं, जो स्थानीय अनाजों से पूरी तरह ऑर्गेनिक उत्पाद तैयार करती हैं। श्रीनगर की अंजना घिल्डियाल द्वारा बनाए गए अचार, आंवला एवं अदरक की कैंडी, नमक की भी डिमांड बढ़ रही है। खिर्सू महिला सहायता समूह मोल्यार की बीना देवी ने बताया कि समूह को सहकारिता विभाग से शून्य प्रतिशत ब्याज पर 10 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ है। इससे उन्हें भारी मदद मिली है।
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बारिश ने बिगाड़ी सहकारिता मेले की रंगत, व्यवस्थाएं जुटाने में बहाना पड़ रहा पसीना
फोटोे-
श्रीनगर। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीनगर के आवास विकास मैदान में जनपद स्तरीय नौ दिवसीय मेले की रंगत बारिश ने बिगाड़ दी। इस कारण यहां व्यवस्थाएं जुटाने में आयोजकों को पसीना बहाना पड़ रहा है। दूसरे दिन बारिश के कारण मेले में लोगों की चहल-पहल भी कम दिखी। अधिकांश विभागीय स्टॉल जहां खाली दिखाई दिए। वहीं मेला स्थल पर बारिश का पानी एवं कीचड़ जमा होनेेे से लोगों एवं मेले में आए व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मैदान से गंदे पानी की निकासी की ठोस व्यवस्था न होने से पानी अस्थायी रूप से बनाई गई नाली में जमा हो जा रहा है, जिससे डेंगू के मच्छरों के पनपने का खतरा भी पैदा हो रहा है। बारिश के कारण सात अक्तूबर से शुरू हुए मेले में अभी झूला चर्खियां भी नहीं लग पाई हैं, जबकि दुकानें लगाने आए व्यापारियों को अपना सामान लगाने में भी दिक्कतें हो रही हैं। वहीं मेले में लगे स्वयं सहायता समूह के स्टॉलों का संचालन करने वालों ने कहा कि उन्हें भोजन के टोकन भी आसानी से प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं।
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महिला समूहों के उत्पादों को मिला बाजार
मेले में पहुंची महिला सहायता समूहों, मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटियों और कृषक उत्पादक संगठनों ने अपने-अपने स्टॉल लगाए। जिससे उन्हें बाजार मिल रहा है। स्टॉलों पर ऑर्गेनिक घी, शहद और हर्बल टी को लोगों द्वारा खूब सराहा जा रहा है। संस्थान के प्रतिनिधि तरुण जोशी ने बताया कि उत्तराखंड के इन उत्पादों की देश के विभिन्न राज्यों में भारी मांग है। कोटद्वार कृषक उत्पादक संगठन की नीतू डंगवाल ने बताया कि उनके समूह द्वारा बनाए गए चांगोर के लड्डू, बर्फी और मल्टीग्रेन बिस्किट को विशेष सराहना मिली है। उनके समूह में 250 से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं, जो स्थानीय अनाजों से पूरी तरह ऑर्गेनिक उत्पाद तैयार करती हैं। श्रीनगर की अंजना घिल्डियाल द्वारा बनाए गए अचार, आंवला एवं अदरक की कैंडी, नमक की भी डिमांड बढ़ रही है। खिर्सू महिला सहायता समूह मोल्यार की बीना देवी ने बताया कि समूह को सहकारिता विभाग से शून्य प्रतिशत ब्याज पर 10 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ है। इससे उन्हें भारी मदद मिली है।
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बारिश ने बिगाड़ी सहकारिता मेले की रंगत, व्यवस्थाएं जुटाने में बहाना पड़ रहा पसीना
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श्रीनगर। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीनगर के आवास विकास मैदान में जनपद स्तरीय नौ दिवसीय मेले की रंगत बारिश ने बिगाड़ दी। इस कारण यहां व्यवस्थाएं जुटाने में आयोजकों को पसीना बहाना पड़ रहा है। दूसरे दिन बारिश के कारण मेले में लोगों की चहल-पहल भी कम दिखी। अधिकांश विभागीय स्टॉल जहां खाली दिखाई दिए। वहीं मेला स्थल पर बारिश का पानी एवं कीचड़ जमा होनेेे से लोगों एवं मेले में आए व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मैदान से गंदे पानी की निकासी की ठोस व्यवस्था न होने से पानी अस्थायी रूप से बनाई गई नाली में जमा हो जा रहा है, जिससे डेंगू के मच्छरों के पनपने का खतरा भी पैदा हो रहा है। बारिश के कारण सात अक्तूबर से शुरू हुए मेले में अभी झूला चर्खियां भी नहीं लग पाई हैं, जबकि दुकानें लगाने आए व्यापारियों को अपना सामान लगाने में भी दिक्कतें हो रही हैं। वहीं मेले में लगे स्वयं सहायता समूह के स्टॉलों का संचालन करने वालों ने कहा कि उन्हें भोजन के टोकन भी आसानी से प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं।
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