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लैंगिक समानता के लिए सोच में बदलाव जरूरी

Tue, 31 Aug 2021 09:32 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 31 Aug 2021 09:32 PM IST
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Change in thinking is necessary for gender equality
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार के लीगल सेल और आईक्यूएसी की ओर से ‘लैंगिक समानता एवं महिला सशक्तीकरण : संवैधानिक प्राविधान’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस मौके पर लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण के लिए सामाजिक दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव की जरूरत बताई गई।
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वेबिनार में मुख्य वक्ता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संदीप तिवारी ने कहा कि भारत में पूर्ण लैंगिक समानता की राह कठिन है, लेकिन असंभव नहीं है। भारत में पूर्ण लैंगिक समानता के लिए पुरुषों और महिलाओं को एक साथ काम करना होगा और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना होगा। हमें यह कार्य अपने घर से शुरू करना चाहिए। उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिवक्ता अनंत अग्रवाल ने भारतीय संविधान में महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के बारे में बताया। वेबिनार की संयोजिका डॉ. स्वाति नेगी ने कहा कि लैंगिक समानता का उद्देश्य पुरुषों और महिलाओं के बीच सभी भेदभाव को दूर करना है। वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. जानकी पंवार ने कहा कि लैंगिक समानता वर्तमान में हमारे समाज के गंभीर मुद्दों में से एक है।
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