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लंबित मांगों के निराकरण को मास्टर ट्रेनरों ने किया कार्य बहिष्कार
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बीरोंखाल ब्लॉक के सभी जैविक मास्टर ट्रेनरों ने वेतन बढ़ाने और समय पर देने की मांग को लेकर जैविक कार्यों का बहिष्कार किया। जैविक मास्टर ट्रेनरों ने अपनी मांगों को लेकर जिला कृषि अधिकारी पौड़ी को ज्ञापन भी सौंपा।
मास्टर ट्रेनरों ने कहा कि वह 18 सालों से कृषि विभाग में कार्यरत हैं। सरकार की ओर से उन्हें नियुक्ति की तिथि से लेकर आज तक मात्र 7000 रुपए वेतन दिया जाता है वो भी साल में एकमुश्त दिया जा रहा है। जैविक मास्टर ट्रेनर संघ पौड़ी के अध्यक्ष पुष्कर सिंह का कहना है कि उनके कार्यों के कारण ही इस साल उत्तराखंड को जैविक उत्पादन में पूरे भारत वर्ष में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
उन्होंने प्रदेश सरकार पर उनकी उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जैविक मास्टर ट्रेनरों की हालत बंधुआ मजदूर जैसी है। उन्हें मनरेगा के मजदूरों से भी कम वेतन मिल रहा है। बीरोंखाल के जैविक मास्टर ट्रेनर विनोद नेगी ने बताया कि उनके पास 98 ग्राम पंचायत व 238 गांव हैं। उन्हें जो वेतनमान मिलता है वह आने-जाने में ही खर्च हो जाता है।
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ज्ञापन सौंपने वालों में मास्टर ट्रेनर बलबीर सिंह, गजपाल सिंह, संजय रावत, सुनील कांत, प्रमोद नेगी, सतेंद्र सिंह, मुकेश घिल्डियाल, प्रियंका राणा, प्रदीप बिजल्वाण, शारदा शामिल रहे।
जैविक ट्रेनरों के कृषि कार्यों के बहिष्कार की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। मास्टर ट्रेनरों के मानदेय का भुगतान केंद्र सरकार करती है। इससे भुगतान में विलंब हो जाता है। शीघ्र ही उनकी समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। - अमरेंद्र चौधरी, जिला कृषि अधिकारी।
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मास्टर ट्रेनरों ने कहा कि वह 18 सालों से कृषि विभाग में कार्यरत हैं। सरकार की ओर से उन्हें नियुक्ति की तिथि से लेकर आज तक मात्र 7000 रुपए वेतन दिया जाता है वो भी साल में एकमुश्त दिया जा रहा है। जैविक मास्टर ट्रेनर संघ पौड़ी के अध्यक्ष पुष्कर सिंह का कहना है कि उनके कार्यों के कारण ही इस साल उत्तराखंड को जैविक उत्पादन में पूरे भारत वर्ष में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
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उन्होंने प्रदेश सरकार पर उनकी उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जैविक मास्टर ट्रेनरों की हालत बंधुआ मजदूर जैसी है। उन्हें मनरेगा के मजदूरों से भी कम वेतन मिल रहा है। बीरोंखाल के जैविक मास्टर ट्रेनर विनोद नेगी ने बताया कि उनके पास 98 ग्राम पंचायत व 238 गांव हैं। उन्हें जो वेतनमान मिलता है वह आने-जाने में ही खर्च हो जाता है।
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ज्ञापन सौंपने वालों में मास्टर ट्रेनर बलबीर सिंह, गजपाल सिंह, संजय रावत, सुनील कांत, प्रमोद नेगी, सतेंद्र सिंह, मुकेश घिल्डियाल, प्रियंका राणा, प्रदीप बिजल्वाण, शारदा शामिल रहे।
जैविक ट्रेनरों के कृषि कार्यों के बहिष्कार की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। मास्टर ट्रेनरों के मानदेय का भुगतान केंद्र सरकार करती है। इससे भुगतान में विलंब हो जाता है। शीघ्र ही उनकी समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। - अमरेंद्र चौधरी, जिला कृषि अधिकारी।