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पहले मलबे की सफाई, तब शुरू हुई पढ़ाई
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटद्वार।
Updated Mon, 25 Jul 2016 10:03 PM IST
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रविवार रात से सोमवार सुबह तक हुई भारी बारिश से जलभराव ने जूनियर हाईस्कूल पदमपुर में न केवल फर्नीचर खराब कर दिया, बल्कि स्टेशनरी से लेकर कई सामान बर्बाद हो गया। बच्चों ने स्कूल आते ही पहले हाथों में बाल्टी, जग और झाडू से कमरों से पानी और मलबा साफ किया, इसके बाद ही थोड़ी बहुत पढ़ाई हो सकी।
शहर से सटे पदमपुर सुखरौ गांव के जूनियर हाईस्कूल के लिए बरसात किसी मुसीबत से कम नहीं है। सोमवार को ऐसा ही नजारा स्कूल में देखने को मिला। स्कूल में कक्षा छह लेकर आठ तक की तीन कक्षाओं में कुल 46 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन यहां इन्हें पढ़ाने के लिए पांच शिक्षक तैनात हैं। जब बच्चे स्कूल की सफाई कर रहे थे तो विद्यालय में तैनात पांच में से तीन शिक्षक अवकाश पर थे। प्रभारी प्रधानाध्यापक शशिप्रभा काला और मो. रफीक ने पानी भरने से बर्बाद हुए सामान को बच्चों की सहायता व्यवस्थित किया।
7 बजे का स्कूल, 10.30 बजे तक निकाला पानी
जलभराव की समस्या की सूचना मिलते ही ग्राम प्रधान चंद्रप्रकाश नैथानी भी स्कूल में पहुंच गए थे। सुबह साढ़े सात बजे स्कूल खुल गया था, लेकिन साढ़े दस बजे तक बमुश्किल कमरों का पानी बाहर निकाला जा सका था। पानी में डूबे हुए तीन कक्षा कक्षों में पढ़ाई होनी मुश्किल थी, इसलिए तीनों कक्षाओं को एक साथ ऊपर की मंजिल पर बने एक हाल में चटाई पर बैठाकर पढ़ाई शुरू कराने का प्रयास किया गया।
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जलभराव को देखते हुए कई सुझाव दिए गए थे, उन्हें नहीं माना गया। सड़क और नहर के पानी को स्कूल में घुसने से रोकने के लिए कार्ययोजना बनाने की जरूरत है। स्कूल प्रबंधन समिति की बैठक में इस बार प्रस्ताव लाया जाएगा।
- चंद्रप्रकाश नैथानी, प्रधान पदमपुर सुखरौ।
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शहर से सटे पदमपुर सुखरौ गांव के जूनियर हाईस्कूल के लिए बरसात किसी मुसीबत से कम नहीं है। सोमवार को ऐसा ही नजारा स्कूल में देखने को मिला। स्कूल में कक्षा छह लेकर आठ तक की तीन कक्षाओं में कुल 46 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन यहां इन्हें पढ़ाने के लिए पांच शिक्षक तैनात हैं। जब बच्चे स्कूल की सफाई कर रहे थे तो विद्यालय में तैनात पांच में से तीन शिक्षक अवकाश पर थे। प्रभारी प्रधानाध्यापक शशिप्रभा काला और मो. रफीक ने पानी भरने से बर्बाद हुए सामान को बच्चों की सहायता व्यवस्थित किया।
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7 बजे का स्कूल, 10.30 बजे तक निकाला पानी
जलभराव की समस्या की सूचना मिलते ही ग्राम प्रधान चंद्रप्रकाश नैथानी भी स्कूल में पहुंच गए थे। सुबह साढ़े सात बजे स्कूल खुल गया था, लेकिन साढ़े दस बजे तक बमुश्किल कमरों का पानी बाहर निकाला जा सका था। पानी में डूबे हुए तीन कक्षा कक्षों में पढ़ाई होनी मुश्किल थी, इसलिए तीनों कक्षाओं को एक साथ ऊपर की मंजिल पर बने एक हाल में चटाई पर बैठाकर पढ़ाई शुरू कराने का प्रयास किया गया।
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जलभराव को देखते हुए कई सुझाव दिए गए थे, उन्हें नहीं माना गया। सड़क और नहर के पानी को स्कूल में घुसने से रोकने के लिए कार्ययोजना बनाने की जरूरत है। स्कूल प्रबंधन समिति की बैठक में इस बार प्रस्ताव लाया जाएगा।
- चंद्रप्रकाश नैथानी, प्रधान पदमपुर सुखरौ।