ट्रेड यूनियनों के भारत बंद का गढ़वाल के प्रवेश द्वार और प्रमुख व्यावसायिक केंद्र कोटद्वार में आंशिक असर रहा। मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में जहां यातायात सामान्य दिनों की तरह चला, वहीं बाजार भी खुले रहे। एसबीआई, बैंक और इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा को छोड़कर अन्य बैंकों में हड़ताल रही। जिससे यहां के ग्राहकों को बैरंग लौटना पड़ा। ट्रेड यूनियन से जुड़ी यूनियनों और संगठनों ने एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर केंद्र की नीतियों की खिलाफत की। आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर कोटद्वार के बदरीनाथ मार्ग स्थित पंजाब नेशनल बैंक के सामने कई बैंकों के कर्मियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए ट्रेड यूनियन समन्वय समिति के अध्यक्ष जेपी बहुखंडी ने कहा कि मौजूदा समय में बैंकों का एनपीए काफी बढ़ गया है। एनपीए देश के बड़े औद्योगिक घरानों का सबसे अधिक है। यूनियन लंबे समय से इसके लिए ठोस कानून बनाने की मांग कर रही है, जिससे वसूली में आसानी हो सके। बैंकों में स्टाफ की कमी से आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कहा देश में आर्थिक मंदी के दौर में सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण किया जा रहा है, जो भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। कोटद्वार में उत्तरांचल बैंक इंप्लाइज यूनियन के जिला सचिव बीरेंद्र सिंह रावत, यूएफबीयू के नगर संयोजक डीपीएस बिष्ट, ट्रेड यूनियन समन्वय समिति के अध्यक्ष जेपी बहुखंडी, आशा यूनियन की अध्यक्ष प्रभा चौधरी समेत कई लोगों की अगुवाई में बैंक कर्मियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों को गरीब, मजदूर, किसान, कर्मचारी विरोधी बताया। प्रदर्शन में रमेश नेगी, रचित रावत, करेश कुमार, दिगपाल, रमन नेगी, सिद्धार्थ, कुलदीप गुसाईं, डीएस असवाल, विक्रम सिंह, मीरा नेगी, रंजना कोटनाला, दीप प्रकाश भट्ट, पदमा असवाल, मंजू नेगी, विमला जोशी, ज्योति रावत आदि मौजूद रहे। जिला सचिव बीरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि ट्रेड यूनियन की हड़ताल में पंजाब नेशनल बैंक, ओबीसी, नैनीताल बैंक, कैनरा बैंक, सेंट्रल बैंक, इलाहाबाद बैंक, सिंडीकेट बैंक, यूको बैंक और आंध्रा बैंक के कर्मचारी शामिल रहे।