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कृषि प्रधान देश में किसानों की आत्महत्या दुर्भाग्यपूर्ण
ब्यूरो/ अमर उजाला कोटद्वार
Updated Fri, 05 Feb 2016 09:49 PM IST
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के समाजशास्त्र एवं समाजकार्य विभाग, पर्वतीय विकास शोध केंद्र तथा शाश्वतधाम लक्ष्मोली की ओर से स्व. गौरादेवी स्मृति व्याख्यानमाला व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि कृषि प्रधान देश होने के बावजूद यहां कृषकों का आत्महत्या करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस अवसर पर भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिक डा. प्रणव पाल को शाश्वत रत्न से सम्मानित किया गया।
शुक्रवार को आयोजित व्याख्यानमाला में मुख्य अतिथि केंद्र सरकार के पूर्व गृहसचिव डा. कमल टावरी ने कहा कि कृषि से आर्थिक लाभ के लिए वृहद मार्केटिंग जरूरी है। उन्होंने कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि कृषि प्रधान देश में सैकड़ों किसान खेती से लाभ नहीं मिलने पर आत्महत्या कर रहे हैं। समाज शास्त्र व समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जेपी पचौरी ने कहा कि समाज में अच्छे कार्य कर उदाहरण पेश करने वालों को सम्मानित करने से अन्य लोगों को प्रेरणा मिलती है। सरकार के वन अधिनियम व जल, जमीन, जंगल की नीतियां हिमालय वासियों के लिए अनुपयोगी सिद्ध हुई हैं। उन्होंने कहा कि समस्या इतनी विकट है कि हिमालय वासियों की ओर से संरक्षित प्राकृतिक संसाधन उनके नियंत्रण से बाहर हैं। कार्यक्रम भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिक डा. प्रणव पाल को शाश्वत रत्न से सम्मानित किया गया। उन्हें स्मृति चिह्न, शॉल व पांच हजार का नगद पुरस्कार दिया गया। इस दौरान शाश्वत धाम के संस्थापक स्वामी अद्वेतानंद महाराज, गंगा आरती समिति के अध्यक्ष प्रेमबल्लभ नैथानी, डा. अरविंद दरमोड़ा, डा. किरण डंगवाल, डा. जेपी भट्ट आदि मौजूद थे।
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शुक्रवार को आयोजित व्याख्यानमाला में मुख्य अतिथि केंद्र सरकार के पूर्व गृहसचिव डा. कमल टावरी ने कहा कि कृषि से आर्थिक लाभ के लिए वृहद मार्केटिंग जरूरी है। उन्होंने कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि कृषि प्रधान देश में सैकड़ों किसान खेती से लाभ नहीं मिलने पर आत्महत्या कर रहे हैं। समाज शास्त्र व समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जेपी पचौरी ने कहा कि समाज में अच्छे कार्य कर उदाहरण पेश करने वालों को सम्मानित करने से अन्य लोगों को प्रेरणा मिलती है। सरकार के वन अधिनियम व जल, जमीन, जंगल की नीतियां हिमालय वासियों के लिए अनुपयोगी सिद्ध हुई हैं। उन्होंने कहा कि समस्या इतनी विकट है कि हिमालय वासियों की ओर से संरक्षित प्राकृतिक संसाधन उनके नियंत्रण से बाहर हैं। कार्यक्रम भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिक डा. प्रणव पाल को शाश्वत रत्न से सम्मानित किया गया। उन्हें स्मृति चिह्न, शॉल व पांच हजार का नगद पुरस्कार दिया गया। इस दौरान शाश्वत धाम के संस्थापक स्वामी अद्वेतानंद महाराज, गंगा आरती समिति के अध्यक्ष प्रेमबल्लभ नैथानी, डा. अरविंद दरमोड़ा, डा. किरण डंगवाल, डा. जेपी भट्ट आदि मौजूद थे।
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