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एथलीट अंकिता ध्यानी का देश के लिए हांगकांग में खेलने का सपना टूटा-compat
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sports
- फोटो : amarujala
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कोटद्वार। गांव की सड़क पर दौड़ का अभ्यास कर राष्ट्रीय फलक पर पहुंचने वाली पौड़ी के रिखणीखाल ब्लाक के मेरूड़ा गांव की बेटी अंकिता ध्यानी का हांगकांग में देश के लिए खेेलने का सपना टूट गया है। भारतीय खेल प्राधिकरण की 20 फरवरी को जारी सूची में नाम शामिल होने के बाद अंकिता ने बड़े प्रयासों के बाद पासपोर्ट भी बनवा लिया था, लेकिन उत्तराखंड एथलेटिक्स एसोसिएशन की सूची से उसका नाम आश्चर्यजनक तरीके से गायब हो गया। परिजनों और खेल प्रेमियों ने इस मामले की शिकायत केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन राठौर से की है।
पहाड़ की विषम परिस्थितियों के बीच मेरूड़ा निवासी महिमानंद ध्यानी व लक्ष्मी देवी की पुत्री अंकिता ने कड़ी मेहनत के दम पर मात्र 16 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। वर्तमान में रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि स्थित बालिका छात्रावास में 12वीं कक्षा में अध्ययनरत अंकिता अपनी कोच महेशी आर्य के दिशा-निर्देशन में लंबी दौड़ का अभ्यास कर देश-विदेश में प्रदेश का नाम रोशन करने की तैयारियों में जुटी हुई है। अंकिता के रिश्ते के मामा चंद्रमोहन जदली ने बताया कि इसी वर्ष जनवरी में पुणे में आयोजित खेलो इंडिया प्रतियोगिता में 1500 मीटर और 3000 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में दो गोल्ड मेडल जीतने वाली अंकिता ध्यानी को स्वयं देश के खेल मंत्री राज्यवर्धन राठौर ने सम्मानित किया था। हांगकांग में 15 से 17 मार्च तक आयोजित होने वाली तीसरी एशियन यूथ एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने वाली टीम में भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा 20 फरवरी को जारी की गई सूची में अंकिता ध्यानी का नाम शामिल था। इसके लिए अंकिता ने नैनीताल और देहरादून की दौड़ लगाकर पासपोर्ट भी हासिल कर लिया, लेकिन 23 फरवरी को जारी उत्तराखंड एथलेटिक्स एसोसिएशन की सूची में नाम नहीं होने से वह इस प्रतियोगिता से वंचित हो गई। उन्होंने पूरे प्रकरण की शिकायत केंद्रीय खेल मंत्री से करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। हिल्स डेवलपमेंट मिशन के चेयरमैन रघुबीर बिष्ट ने अंकिता ध्यानी का नाम कटने पर गहरा रोष प्रकट करते हुए इस मामले को खिलाड़ियों की भावनाओं को ठेस पहुुंचाने वाला बताया।
कोट--------------------------------
अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों का भारतीय खेल प्राधिकरण और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के निर्धारित मानकों के आधार पर चयन किया जाता है। अंकिता का नाम सूची से कटने से राज्य एसोसिएशन का कोई लेना देना नहीं है।
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-केजेएस कलसी, सेक्रेट्री उत्तराखंड एथलेटिक्स एसोसिएशन।
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पहाड़ की विषम परिस्थितियों के बीच मेरूड़ा निवासी महिमानंद ध्यानी व लक्ष्मी देवी की पुत्री अंकिता ने कड़ी मेहनत के दम पर मात्र 16 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। वर्तमान में रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि स्थित बालिका छात्रावास में 12वीं कक्षा में अध्ययनरत अंकिता अपनी कोच महेशी आर्य के दिशा-निर्देशन में लंबी दौड़ का अभ्यास कर देश-विदेश में प्रदेश का नाम रोशन करने की तैयारियों में जुटी हुई है। अंकिता के रिश्ते के मामा चंद्रमोहन जदली ने बताया कि इसी वर्ष जनवरी में पुणे में आयोजित खेलो इंडिया प्रतियोगिता में 1500 मीटर और 3000 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में दो गोल्ड मेडल जीतने वाली अंकिता ध्यानी को स्वयं देश के खेल मंत्री राज्यवर्धन राठौर ने सम्मानित किया था। हांगकांग में 15 से 17 मार्च तक आयोजित होने वाली तीसरी एशियन यूथ एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने वाली टीम में भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा 20 फरवरी को जारी की गई सूची में अंकिता ध्यानी का नाम शामिल था। इसके लिए अंकिता ने नैनीताल और देहरादून की दौड़ लगाकर पासपोर्ट भी हासिल कर लिया, लेकिन 23 फरवरी को जारी उत्तराखंड एथलेटिक्स एसोसिएशन की सूची में नाम नहीं होने से वह इस प्रतियोगिता से वंचित हो गई। उन्होंने पूरे प्रकरण की शिकायत केंद्रीय खेल मंत्री से करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। हिल्स डेवलपमेंट मिशन के चेयरमैन रघुबीर बिष्ट ने अंकिता ध्यानी का नाम कटने पर गहरा रोष प्रकट करते हुए इस मामले को खिलाड़ियों की भावनाओं को ठेस पहुुंचाने वाला बताया।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों का भारतीय खेल प्राधिकरण और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के निर्धारित मानकों के आधार पर चयन किया जाता है। अंकिता का नाम सूची से कटने से राज्य एसोसिएशन का कोई लेना देना नहीं है।
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-केजेएस कलसी, सेक्रेट्री उत्तराखंड एथलेटिक्स एसोसिएशन।