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सरकारी बैंकों के विलय पर भड़के बैंककर्मी, केंद्र सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन
Updated Tue, 09 Oct 2018 10:52 PM IST
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कोटद्वार। कोटद्वार में स्थित विभिन्न बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बैंकों के विलय और बैंक कर्मियों के वेतन समझौते में जान-बूझकर विलंब करने के विरोध में मंगलवार शाम को पंजाब नेशनल बैंक के सामने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। बैंक कर्मियों ने केंद्र सरकार से सरकारी बैंकों के विलयीकरण के प्रस्ताव को निरस्त करने के साथ ही बैंक कर्मियों का सम्मानजनक वेतन समझौता शीघ्र करने की मांग की है।
मंगलवार शाम को कोटद्वार में स्थित विभिन्न बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी बद्रीनाथ मार्ग स्थित पंजाब नेशनल बैंक के सामने एकत्र हुए। यहां उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर जहां केंद्र सरकार सरकारी बैंकों का विलय कर बैंकों की संख्या कम करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर कॉपोरेट घरानों को निजी बैंक खोलने का लाइसेंस दे रही है। सरकार की मंशा सरकारी बैंकों को समाप्त कर निजी हाथों में सौंपना है। कहा कि इसका खामियाजा देश और जनता को भुगतना पड़ेगा। कुछ वर्ष पहले अमेरिका व इंग्लैंड सहित कई अन्य देशों में इसका उदाहरण देखने को मिल चुका है। वहां के निजी बैंक फेल हो गए और सभी देशों को आर्थिक मंदी का सामना भी करना पड़ा। कहा कि बैंक कर्मियों का वेतन समझौता एक नवंबर 2017 से लागू होना था, लेकिन केंद्र सरकार इसे जान-बूझकर लटकाए हुए है। केंद्र सरकार अब मात्र छह फीसदी की वृद्धि की बात कर रही है। प्रदर्शनकारियों में यूबीईयू के जिला महामंत्री बीरेंद्र सिंह रावत, जिला संयोजक डीपीएस बिष्ट, जिलाध्यक्ष वीपीएस बिष्ट, सह मंत्री गजपाल सिंह नेगी, रमेश नेगी, हरजीत सिंह, तपस्या धस्माना, शालिनी खर्कवाल, अर्जुन सिंह, मुकेश, शिवानी पांडे व सरस्वती देवी आदि शामिल रहे।
-फोटो
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मंगलवार शाम को कोटद्वार में स्थित विभिन्न बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी बद्रीनाथ मार्ग स्थित पंजाब नेशनल बैंक के सामने एकत्र हुए। यहां उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर जहां केंद्र सरकार सरकारी बैंकों का विलय कर बैंकों की संख्या कम करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर कॉपोरेट घरानों को निजी बैंक खोलने का लाइसेंस दे रही है। सरकार की मंशा सरकारी बैंकों को समाप्त कर निजी हाथों में सौंपना है। कहा कि इसका खामियाजा देश और जनता को भुगतना पड़ेगा। कुछ वर्ष पहले अमेरिका व इंग्लैंड सहित कई अन्य देशों में इसका उदाहरण देखने को मिल चुका है। वहां के निजी बैंक फेल हो गए और सभी देशों को आर्थिक मंदी का सामना भी करना पड़ा। कहा कि बैंक कर्मियों का वेतन समझौता एक नवंबर 2017 से लागू होना था, लेकिन केंद्र सरकार इसे जान-बूझकर लटकाए हुए है। केंद्र सरकार अब मात्र छह फीसदी की वृद्धि की बात कर रही है। प्रदर्शनकारियों में यूबीईयू के जिला महामंत्री बीरेंद्र सिंह रावत, जिला संयोजक डीपीएस बिष्ट, जिलाध्यक्ष वीपीएस बिष्ट, सह मंत्री गजपाल सिंह नेगी, रमेश नेगी, हरजीत सिंह, तपस्या धस्माना, शालिनी खर्कवाल, अर्जुन सिंह, मुकेश, शिवानी पांडे व सरस्वती देवी आदि शामिल रहे।
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