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साल की पहली बारिश से कड़ाके की सर्दी, जनजीवन अस्तव्यस्त
Updated Tue, 23 Jan 2018 10:28 PM IST
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गढ़वाल। साल की पहली बारिश जंगलों के लिए वरदान साबित हुई है। मंगलवार को हुई बारिश कई दिनों से सुलग रहे जंगलों की आग बुझा दी है। इससे वन विभाग और पहाड़वासियों ने बड़ी राहत महसूस की है। चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जिलों में पखवाड़े भर के अंदर भारी वन संपदा आग की भेंट चढ़ चुकी है। जंगलों की आग के चलते यहां जबरदस्त धुंध छाई हुई थी।
चमोली जिले में नंदा देवी पार्क के जंगल कई दिनों से सुलग रहे थे। भंग्यूल, बड़ागांव, उर्गम घाटी के बाद जंगलों की आग अब थैंग और चांई गांव के जंगलों में पहुंच चुकी थी। उत्तरकाशी जिले में धौंतरी, मुखेम, धरासू और डुंडा रेंज के जंगल वनाग्नि की चपेट में थे। इसी प्रकार रुद्रप्रयाग जिले में फाटा सहित त्रियुगीनारायण, कालीमठ घाटी, मद्महेश्वर घाटी के अधिकांश गांवों के जंगलों में लगी आग भी लगातार भड़क रही थी। वनाग्नि के प्रकोप से पूरे क्षेत्र में धुएं का गुबार फैला हुआ था।
मंगलवार को हुई बारिश जंगलों के लिए वरदान साबित हुई है। पूरे पहाड़ में दोपहर बाद से शुरू हुई बारिश से जहां जंगलों की आग बुझ गई वहीं प्रभावित इलाकों में छाई धुंध भी पूरी तरह छंट गई। वन विभाग को बड़ी राहत मिली है। तमाम कोशिशों के बावजूद विभाग आग पर काबू नहीं पा सका था। खासकर चट्टानी क्षेत्रों की आग पर काबू पाना विभाग के लिए मुश्किल हो गया था।
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किसानों के खिले चेहरे
उत्तरकाशी/बड़कोट। जनपद में लंबे समय से चल रहे सूखे के बाद हुई बारिश ने किसानों के चेहरे खिला दिए हैं। मंगलवार दोपहर से छाए बादलों के बाद जिला मुख्यालय सहित बड़कोट आदि क्षेत्र में देर शाम से ही बारिश शुरू हो गई। लंबे सूखे के बाद हुई बारिश से सेब आदि फसलों को लाभ हुआ है।
स्थानीय काश्तकार संजय पंवार, मोहन सिंह राणा आदि ने बताया कि बारिश न होने से सेब, आडू, पुलम सहित गेहूं, मटर आदि फसलों को भी काफी नुकसान हो रहा था। हालांकि, देर से ही सही लेकिन बारिश आ जाने से अब अच्छी फसल की उम्मीद जग गई है।
नई टिहरी/चंबा/नैनबाग। इस साल की पहली रिमझिम बारिश की फुहारों से किसानों के चेहरे खिल गए। टिहरी जिले के चंबा-मसूरी फलपट्टी, नागणी, धनोल्टी, नैनबाग क्षेत्र में बड़ी मात्रा में गेहूं, आलू और सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। बारिश नहीं होने से फसलों की ग्रोथ थम गई थी, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई थी। मंगलवार शाम को हुई बारिश ने किसानों को राहत दी है।
विशेषज्ञ इस बारिश को फसलों और फलदार पौधों के लिए संजीवनी मान रहे हैं। रानीचौरी परिसर मौसम विभाग के अधिकारी प्रकाश नेगी का कहना है कि यह बारिश सभी फसलों के लिए लाभदायक है। बारिश के साथ ओला पड़ने की संभावना को देखते हुए किसानों को फसलों को बचाना चाहिए।
कोटद्वार में जनजीवन अस्तव्यस्त
कोटद्वार। यहां मंगलवार अपराह्न तीन बजे से शुरू हुई झमाझम बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त रहा। लोगों को छाता लेकर बारिश से बचना पड़ा। बस अड्डों, रेलवे स्टेशन और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। धुमाकोट में शाम से क्षेत्र में बारिश शुरू हो गई। ठंडी हवाओं के कारण तापमान में भारी गिरावट आई। बारिश एवं ठंड के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। दीबागढ़ी और गुजडूगढ़ी की चोटियों में बर्फ बारी के आसार बन गए हैं। लैंसडौन में मौसम के बदले मिजाज के कारण ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। शाम चार बजे से हो रही बारिश के कारण पारा गिरकर तीन और चार डिग्री दर्ज किया गया। सतपुली, बैजरो, दुगड्डा, यमकेश्वर और जयहरीखाल में बाशि के चलते कड़ाके की सर्दी पड़ी।
शीतलहर के चलते घरों में दुबके लोग
जोशीमठ। चमोली जिले में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के बाद समूचा जिला शीतलहर की चपेट में आ गया है। जोशीमठ क्षेत्र में दोपहर बाद बर्फीली हवाएं चलने से लोग घरों में दुबके रहे।
रुद्रप्रयाग। यहां रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ, गुप्तकाशी, मयाली, जखोली में मंगलवार देर शाम से शुरू हुआ हल्की बारिश का सिलसिला रात तक जारी रहा। मौसम बदलने से ठंड बढ़ गई है। केदारनाथ धाम में दोपहर बाद से घने बादल छाए रहने के बाद देर शाम से बर्फबारी शुरू हो गई।
नई टिहरी। बारिश के बाद शीत लहर बढ़ गई है। तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। रानीचौरी मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को अधिकतम तापमान 14.9 और न्यूनतम 3.4 डिग्री था। मंगलवार को अधिकतम तापमान 12.9 और न्यूनतम 1.8 डिग्री दर्ज किया गया है।
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चमोली जिले में नंदा देवी पार्क के जंगल कई दिनों से सुलग रहे थे। भंग्यूल, बड़ागांव, उर्गम घाटी के बाद जंगलों की आग अब थैंग और चांई गांव के जंगलों में पहुंच चुकी थी। उत्तरकाशी जिले में धौंतरी, मुखेम, धरासू और डुंडा रेंज के जंगल वनाग्नि की चपेट में थे। इसी प्रकार रुद्रप्रयाग जिले में फाटा सहित त्रियुगीनारायण, कालीमठ घाटी, मद्महेश्वर घाटी के अधिकांश गांवों के जंगलों में लगी आग भी लगातार भड़क रही थी। वनाग्नि के प्रकोप से पूरे क्षेत्र में धुएं का गुबार फैला हुआ था।
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मंगलवार को हुई बारिश जंगलों के लिए वरदान साबित हुई है। पूरे पहाड़ में दोपहर बाद से शुरू हुई बारिश से जहां जंगलों की आग बुझ गई वहीं प्रभावित इलाकों में छाई धुंध भी पूरी तरह छंट गई। वन विभाग को बड़ी राहत मिली है। तमाम कोशिशों के बावजूद विभाग आग पर काबू नहीं पा सका था। खासकर चट्टानी क्षेत्रों की आग पर काबू पाना विभाग के लिए मुश्किल हो गया था।
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किसानों के खिले चेहरे
उत्तरकाशी/बड़कोट। जनपद में लंबे समय से चल रहे सूखे के बाद हुई बारिश ने किसानों के चेहरे खिला दिए हैं। मंगलवार दोपहर से छाए बादलों के बाद जिला मुख्यालय सहित बड़कोट आदि क्षेत्र में देर शाम से ही बारिश शुरू हो गई। लंबे सूखे के बाद हुई बारिश से सेब आदि फसलों को लाभ हुआ है।
स्थानीय काश्तकार संजय पंवार, मोहन सिंह राणा आदि ने बताया कि बारिश न होने से सेब, आडू, पुलम सहित गेहूं, मटर आदि फसलों को भी काफी नुकसान हो रहा था। हालांकि, देर से ही सही लेकिन बारिश आ जाने से अब अच्छी फसल की उम्मीद जग गई है।
नई टिहरी/चंबा/नैनबाग। इस साल की पहली रिमझिम बारिश की फुहारों से किसानों के चेहरे खिल गए। टिहरी जिले के चंबा-मसूरी फलपट्टी, नागणी, धनोल्टी, नैनबाग क्षेत्र में बड़ी मात्रा में गेहूं, आलू और सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। बारिश नहीं होने से फसलों की ग्रोथ थम गई थी, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई थी। मंगलवार शाम को हुई बारिश ने किसानों को राहत दी है।
विशेषज्ञ इस बारिश को फसलों और फलदार पौधों के लिए संजीवनी मान रहे हैं। रानीचौरी परिसर मौसम विभाग के अधिकारी प्रकाश नेगी का कहना है कि यह बारिश सभी फसलों के लिए लाभदायक है। बारिश के साथ ओला पड़ने की संभावना को देखते हुए किसानों को फसलों को बचाना चाहिए।
कोटद्वार में जनजीवन अस्तव्यस्त
कोटद्वार। यहां मंगलवार अपराह्न तीन बजे से शुरू हुई झमाझम बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त रहा। लोगों को छाता लेकर बारिश से बचना पड़ा। बस अड्डों, रेलवे स्टेशन और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। धुमाकोट में शाम से क्षेत्र में बारिश शुरू हो गई। ठंडी हवाओं के कारण तापमान में भारी गिरावट आई। बारिश एवं ठंड के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। दीबागढ़ी और गुजडूगढ़ी की चोटियों में बर्फ बारी के आसार बन गए हैं। लैंसडौन में मौसम के बदले मिजाज के कारण ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। शाम चार बजे से हो रही बारिश के कारण पारा गिरकर तीन और चार डिग्री दर्ज किया गया। सतपुली, बैजरो, दुगड्डा, यमकेश्वर और जयहरीखाल में बाशि के चलते कड़ाके की सर्दी पड़ी।
शीतलहर के चलते घरों में दुबके लोग
जोशीमठ। चमोली जिले में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के बाद समूचा जिला शीतलहर की चपेट में आ गया है। जोशीमठ क्षेत्र में दोपहर बाद बर्फीली हवाएं चलने से लोग घरों में दुबके रहे।
रुद्रप्रयाग। यहां रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ, गुप्तकाशी, मयाली, जखोली में मंगलवार देर शाम से शुरू हुआ हल्की बारिश का सिलसिला रात तक जारी रहा। मौसम बदलने से ठंड बढ़ गई है। केदारनाथ धाम में दोपहर बाद से घने बादल छाए रहने के बाद देर शाम से बर्फबारी शुरू हो गई।
नई टिहरी। बारिश के बाद शीत लहर बढ़ गई है। तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। रानीचौरी मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को अधिकतम तापमान 14.9 और न्यूनतम 3.4 डिग्री था। मंगलवार को अधिकतम तापमान 12.9 और न्यूनतम 1.8 डिग्री दर्ज किया गया है।