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झूठा मुकदमा दर्ज करने और सही तरीके विवेचना न करने वाले एसआई पर कार्रवाई के निर्देश
Updated Thu, 05 Jul 2018 10:44 PM IST
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कोटद्वार। राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण उत्तराखंड ने एसएसपी पौड़ी को कोटद्वार की बाजार चौकी में तैनात रहे उपनिरीक्षक अमित कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण ने यह आदेश अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोटद्वार की अदालत के 11 अप्रैल, 2017 के फैसले पर संज्ञान लेते हुए दिए हैं। इसमें उपनिरीक्षक की ओर से एक फर्जी मुकदमा दर्ज करने और उसकी सही तरीके से विवेचना न करने की बात सामने आई है।
लकड़ी पड़ाव निवासी मजहर अहमद ने गत वर्ष 29 अगस्त को राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण में एसआई अमित कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि आमपड़ाव निवासी उनके रिश्तेदार शमशाद ने उसके और शैखुल इस्लाम के खिलाफ 13 सितंबर, 2012 को कोटद्वार थाने में एक तहरीर दी, जिसमें आईपीसी की धारा 170 और 420 में उसके खिलाफ एक झूठा मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप था कि प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के अगले दिन ही एसआई ने उसे पकड़कर हिरासत में रखा और अगले दिन गिरफ्तारी दिखाकर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे जिला कारागार पौड़ी भेज दिया, जिसमें उसे 11 दिन जेल में रहना पड़ा।
यह मामला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोटद्वार के न्यायालय में चला। 11 अप्रैल, 2017 को अदालत ने उसे दोषमुक्त करार दिया। शिकायत में कहा गया कि एसआई ने उसके रिश्तेदार के साथ हमसाज होकर बिना सही, तथ्यपूरक और सारगर्भित विवेचना किए अजहर अहमद को फंसाने की नियत से झूठा मुकदमा तैयार किया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि एसआई ने इस मुकदमे में अपराध करने की भौतिक साक्ष्य की बरामदगी होनी दिखाई और इसके बाद भी विवेचक बने रहे, जबकि आपराधिक मामलों की विवेचना में बरामदगी करने वाला अधिकारी विवेचक नहीं रह सकता।
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प्राधिकरण के अध्यक्ष अजय सिंह नबियाल, सदस्य जीएन गोस्वामी और अशोक सिंह नेगी ने शिकायतकर्ता और प्रतिवादी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजी साक्ष्य, कोर्ट के फैसले और दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपनिरीक्षक अमित कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने और कृत कार्रवाई की सूचना उत्तराखंड शासन और प्राधिकरण को उपलब्ध कराने के आदेश एसएसपी पौड़ी को दिए हैं।
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लकड़ी पड़ाव निवासी मजहर अहमद ने गत वर्ष 29 अगस्त को राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण में एसआई अमित कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि आमपड़ाव निवासी उनके रिश्तेदार शमशाद ने उसके और शैखुल इस्लाम के खिलाफ 13 सितंबर, 2012 को कोटद्वार थाने में एक तहरीर दी, जिसमें आईपीसी की धारा 170 और 420 में उसके खिलाफ एक झूठा मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप था कि प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के अगले दिन ही एसआई ने उसे पकड़कर हिरासत में रखा और अगले दिन गिरफ्तारी दिखाकर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे जिला कारागार पौड़ी भेज दिया, जिसमें उसे 11 दिन जेल में रहना पड़ा।
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यह मामला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोटद्वार के न्यायालय में चला। 11 अप्रैल, 2017 को अदालत ने उसे दोषमुक्त करार दिया। शिकायत में कहा गया कि एसआई ने उसके रिश्तेदार के साथ हमसाज होकर बिना सही, तथ्यपूरक और सारगर्भित विवेचना किए अजहर अहमद को फंसाने की नियत से झूठा मुकदमा तैयार किया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि एसआई ने इस मुकदमे में अपराध करने की भौतिक साक्ष्य की बरामदगी होनी दिखाई और इसके बाद भी विवेचक बने रहे, जबकि आपराधिक मामलों की विवेचना में बरामदगी करने वाला अधिकारी विवेचक नहीं रह सकता।
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प्राधिकरण के अध्यक्ष अजय सिंह नबियाल, सदस्य जीएन गोस्वामी और अशोक सिंह नेगी ने शिकायतकर्ता और प्रतिवादी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजी साक्ष्य, कोर्ट के फैसले और दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपनिरीक्षक अमित कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने और कृत कार्रवाई की सूचना उत्तराखंड शासन और प्राधिकरण को उपलब्ध कराने के आदेश एसएसपी पौड़ी को दिए हैं।