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अब कुणजा घास बिखेरेगा ग्रामीणों के जीवन में खुशबू

Wed, 29 Nov 2017 10:38 PM IST
Updated Wed, 29 Nov 2017 10:38 PM IST
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अब कुणजा घास बिखेरेगा ग्रामीणों के जीवन में खुशबू
कोटद्वार। पहाड़ी खेतों और जंगलों में उगने वाला और पूजा में इस्तेमाल सुगंधित कुणजा घास से अब ग्रामीणों के जीवन में खुशबू बिखरेगी। भारत सरकार के अर्थ एवं संख्या विभाग ने पहली बार कुणजा घास को लेकर योजना बनाई है। ग्रामीण अपने बंजर पड़े खेतों में कुणजा की खेती कर इसे अपनी आर्थिकी का जरिया बना सकेंगे। इससे पहाड़ों से हो रहे पलायन पर भी अंकुश लग सकेगा।
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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार के भूगोल विभाग में कार्यरत डा. जेएस नेगी ने कुणजा घास पर दो वर्ष तक शोध करने के बाद इसको अनेक प्रकार से उपयोगी बनाया है। उन्होंने घाड़ कुटीर ग्रामोद्योग समिति के माध्यम से इस पर कार्य भी शुरू कर दिया है। इसके लिए दुगड्डा ब्लाक के कैलाखर गांव में कुणजा से तेल निकालने का संयंत्र लगाया गया है। सर्वप्रथम इससे फ्लोर क्लीनर बनाया गया है, जिसके बेहतर परिणाम आ रहे हैं। कुणजा की खेती के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया जा रहा है। इसके बाद गांव से कुणजा को एकत्र कर संयंत्र तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
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पलायन को रोकने में हो सकता है सहायक
पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों के कारण खेती चौपट हो रही है। लोगों ने खेती करना छोड़ दिया है। इसके कारण उनके खेत बंजर हैं और वे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। कुणजा घास पर सुगंध होने के कारण जंगली और पालतू जानवर इसे नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। यह बंजर खेतों में भी आसानी से उगने वाली घास है, जिसे अपने खेतों में बोकर ग्रामीण मुनाफा कमा सकते हैं।
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क्या है इसका उपयोग
शुरुआत में कुणजा से हर्बल फ्लोर कीटनाशक बनाया जा रहा है, जिसका सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। इसके बाद इससे हर्बल कीटनाशक, हर्बल रूम फ्रेशनर और सेंट भी बनाया जा सकता है। इसकी मार्केट में अधिक डिमांड होने के कारण ग्रामीणों को अच्छा मुनाफा हो सकता है।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ
कुणजा घास पर दो वर्ष तक शोध करने के बाद भारत सरकार की मदद से पहली पर इसका उपयोग किया जा रहा है। प्रथम चरण में योजना को कामयाबी मिली है। इसके बाद इसका विस्तार पूरे प्रदेश में किया जाएगा।
-डा. जेएस नेगी, कुणजा पर शोधकर्ता
-फोटो
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