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सड़क का मलबा हटाकर भूमि खाली करने के आदेश
Updated Thu, 08 Feb 2018 10:52 PM IST
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कोटद्वार। निजी प्रापर्टी में सार्वजनिक सड़क निर्माण के मामले में सिविल जज कनिष्ठ खंड सिमरनजीत कौर की अदालत ने सड़क तोड़कर उसका मलबा हटाकर तीस दिन के भीतर प्रापर्टी मालिक को भूमि पर कब्जा सौंपने के आदेश दिए हैं।
अधिवक्ता अरुण कुमार भट्ट के मुताबिक मवाकोट गांव में जून 2011 में ग्राम प्रधान ने कुछ लोगों के साथ मिलकर विकास खंड दुगड्डा के अधिकारियों की मदद से खतौनी खसरा संख्या 170 के बीच 70 फीट लंबी और 10 फीट चौड़ी सड़क का निर्माण करवा दिया। जिस भूमि पर सड़क बनाई गई, वह पुष्पा देवी, हरेंद्र सिंह, पुष्कर सिंह और अनिल सिंह की थी। ग्राम प्रधान से सड़क बनाने के लिए ग्रामीणों से सहमति नहीं ली। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो अधिकारियों ने गलती स्वीकार की। विकास खंड अधिकारियों ने माना कि राजस्व रिकार्ड नहीं देखने के कारण गलती से निजी प्रापर्टी पर सड़क का निर्माण किया गया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि सड़क के लिए दूसरा विकल्प तलाशने के साथ उक्त सड़क को तोड़ दिया जाएगा।
अधिवक्ता अरुण कुमार के मुताबिक बाद में विकास खंड अधिकारी अपने आश्वासन से मुकर गए। ग्रामीणों ने इस मामले में सिविल जज कनिष्ठ खंड सिमरनजीत कौर में जिलाधिकारी पौड़ी, खंड विकास अधिकारी दुगड्डा और ग्राम प्रधान को पार्टी बनाते हुए वाद दायर किया। अधिवक्ता अरुण कुमार के मुताबिक सिविल जज सिमरनजीत कौर की अदालत ने वादिगणों की भूमि में बनाई गई सड़क तोड़कर मलबा हटाने के साथ तीस दिन के भीतर भूमि खाली करने के आदेश दिए हैं।
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अधिवक्ता अरुण कुमार भट्ट के मुताबिक मवाकोट गांव में जून 2011 में ग्राम प्रधान ने कुछ लोगों के साथ मिलकर विकास खंड दुगड्डा के अधिकारियों की मदद से खतौनी खसरा संख्या 170 के बीच 70 फीट लंबी और 10 फीट चौड़ी सड़क का निर्माण करवा दिया। जिस भूमि पर सड़क बनाई गई, वह पुष्पा देवी, हरेंद्र सिंह, पुष्कर सिंह और अनिल सिंह की थी। ग्राम प्रधान से सड़क बनाने के लिए ग्रामीणों से सहमति नहीं ली। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो अधिकारियों ने गलती स्वीकार की। विकास खंड अधिकारियों ने माना कि राजस्व रिकार्ड नहीं देखने के कारण गलती से निजी प्रापर्टी पर सड़क का निर्माण किया गया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि सड़क के लिए दूसरा विकल्प तलाशने के साथ उक्त सड़क को तोड़ दिया जाएगा।
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अधिवक्ता अरुण कुमार के मुताबिक बाद में विकास खंड अधिकारी अपने आश्वासन से मुकर गए। ग्रामीणों ने इस मामले में सिविल जज कनिष्ठ खंड सिमरनजीत कौर में जिलाधिकारी पौड़ी, खंड विकास अधिकारी दुगड्डा और ग्राम प्रधान को पार्टी बनाते हुए वाद दायर किया। अधिवक्ता अरुण कुमार के मुताबिक सिविल जज सिमरनजीत कौर की अदालत ने वादिगणों की भूमि में बनाई गई सड़क तोड़कर मलबा हटाने के साथ तीस दिन के भीतर भूमि खाली करने के आदेश दिए हैं।
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