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आपदा में पुनर्निर्माण के लिए नहीं मिला धेला, उधार में चल रहा काम
Updated Mon, 21 Aug 2017 10:40 PM IST
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कोटद्वार। आपदा को बीते करीब 20 दिन हो चुके हैं, लेकिन आपदा से हुए नुकसान में परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण के लिए विभागों को सरकार से एक धेला तक नहीं मिला है। मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, सत्तारूढ़ दल से जुड़े जनप्रतिनिधि, कमिश्नर से लेकर डीएम तक नेता और अधिकारी आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर अपने हिसाब से विभागीय अधिकारियों को ताबड़तोड़ आदेश देकर बाढ़ प्रभावितों की समस्याओं के निस्तारण का आदेश दे चुके हैं। संबंधित विभाग नेताओं और अधिकारियों के दबाव में युद्धस्तर पर काम तो करवा रहे हैं, लेकिन करोड़ों रुपये के ये काम बिना पैसे के कैसे होंगे, इनका भुगतान कहां से होगा, कार्यदायी एजेंसियों को यह चिंता सताए जा रही हैं। एक ओर ठेकेदार भुगतान के लिए दबाव बनाने लगे हैं, वहीं जनसुविधाएं बहाल होने में देरी से जनता भी बिगड़ने लगी है। यह हाल इन दिनों आपदा प्रभावित क्षेत्र कोटद्वार और समीपवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों का बना है।
गत 3/4 अगस्त की रात कोटद्वार क्षेत्र में आई आपमदा शहर से लेकर गांवों तक गहरे जख्म दे गई है। बादल फटने से आई बाढ़ से जहां पूरे इलाके की सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त हो गई है, वहीं बरसात में फिर से बाढ़ की आशंका के चलते फौरी इंतजाम के लिए विभागीय अधिकारी युद्ध स्तर पर बाढ़ सुरक्षा और मलबे से पटी सिंचाई नहरों की सफाई में लगी है। सनेह से लेकर सिगड्डी तक सिंचाई विभाग की करीब 65 किमी सिंचाई नहरों को खोलनये में विभाग ने रपूरी ताकत झोंक दी हैं। करीब चार करोड़ रुपये का कार्य उधार में करवा दिया गया है, अब विभाग को श्रमिकों से लेकर ठेकेदारों का भुगतान करना मुश्किल हो गया है। करीब 43 गांवों को सिंचाई सुविधा प्रदान करने वाली मालन मेन फीडर, दाई मालन, बाईं मालन नहरें मलबे से पटी हैं। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सीपी भट्ट का कहना है कि फिलहाल फौरी इंतजाम पर फोकस किया जा रहा है। किसानों की परेशानी को देखते हुए नहरों को खोलने का काम चल रहा है, दो दिन के भीतर नहरों में पानी चलाने का प्रयास किया जा रहा है।
कमोवेश यही हालत लोनिवि, जल संस्थान, नलकूप और नगर पालिका की भी है। इन विभागों के पास जहां सड़क, आबादी क्षेत्र से मलबा हटाकर वहां पेयजल और सफाई व्यवस्था का जिम्मा है, वहीं सार्वजनिक परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण की भी जिम्मेदारी है। सिंचाई विभाग को इस आपदा ने जहां करीब 14 करोड़ का नुकसान हुआ है, वहीं लोनिवि को करीब 2.5 करोड़, जल संस्थान को 3.86 करोड़ और नगर पालिका को करीब दो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। नागरिक व्यवस्थाएं बहाल करने में खर्च हुआ पैसा भी नहीं मिल सका है। करोड़ों के काम उधार में चल रहे हैं। एसडीएम राकेश तिवारी का कहना है कि विभागों को अब तक कराए गए कार्य के आगणन तैयार कर जिला प्रशासन को भेजने को कहा गया है। बजट उपलब्ध होते ही विभागों को आवंटित कर दिया जाएगा।
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गत 3/4 अगस्त की रात कोटद्वार क्षेत्र में आई आपमदा शहर से लेकर गांवों तक गहरे जख्म दे गई है। बादल फटने से आई बाढ़ से जहां पूरे इलाके की सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त हो गई है, वहीं बरसात में फिर से बाढ़ की आशंका के चलते फौरी इंतजाम के लिए विभागीय अधिकारी युद्ध स्तर पर बाढ़ सुरक्षा और मलबे से पटी सिंचाई नहरों की सफाई में लगी है। सनेह से लेकर सिगड्डी तक सिंचाई विभाग की करीब 65 किमी सिंचाई नहरों को खोलनये में विभाग ने रपूरी ताकत झोंक दी हैं। करीब चार करोड़ रुपये का कार्य उधार में करवा दिया गया है, अब विभाग को श्रमिकों से लेकर ठेकेदारों का भुगतान करना मुश्किल हो गया है। करीब 43 गांवों को सिंचाई सुविधा प्रदान करने वाली मालन मेन फीडर, दाई मालन, बाईं मालन नहरें मलबे से पटी हैं। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सीपी भट्ट का कहना है कि फिलहाल फौरी इंतजाम पर फोकस किया जा रहा है। किसानों की परेशानी को देखते हुए नहरों को खोलने का काम चल रहा है, दो दिन के भीतर नहरों में पानी चलाने का प्रयास किया जा रहा है।
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कमोवेश यही हालत लोनिवि, जल संस्थान, नलकूप और नगर पालिका की भी है। इन विभागों के पास जहां सड़क, आबादी क्षेत्र से मलबा हटाकर वहां पेयजल और सफाई व्यवस्था का जिम्मा है, वहीं सार्वजनिक परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण की भी जिम्मेदारी है। सिंचाई विभाग को इस आपदा ने जहां करीब 14 करोड़ का नुकसान हुआ है, वहीं लोनिवि को करीब 2.5 करोड़, जल संस्थान को 3.86 करोड़ और नगर पालिका को करीब दो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। नागरिक व्यवस्थाएं बहाल करने में खर्च हुआ पैसा भी नहीं मिल सका है। करोड़ों के काम उधार में चल रहे हैं। एसडीएम राकेश तिवारी का कहना है कि विभागों को अब तक कराए गए कार्य के आगणन तैयार कर जिला प्रशासन को भेजने को कहा गया है। बजट उपलब्ध होते ही विभागों को आवंटित कर दिया जाएगा।
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