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19 साल में नहीं बन सका तीन किमी मस्टखाल-उतिंडा मार्ग
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कोटद्वार। राज्य निर्माण के 19 वर्ष बाद भी मस्टखाल-उतिंडा मिलान मोटर मार्ग का निर्माण नहीं हो पाया है। ऐसे में द्वारीखाल ब्लॉक के सात गांवों के ग्रामीण तीन किमी पैदल दूरी तय कर मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं।
वर्ष 1980 में द्वारीखाल ब्लॉक के पुल्यांसू, बरगड्डी, उतिंडा, भैंसडाखागल, छिमारधार, कफोलगांव व मेवाड़ को जोड़ने के लिए मस्टखाल से उतिंडा मिलान मोटर मार्ग का निर्माण किया गया था, लेकिन इसके बाद शासन ने इस मार्ग के निर्माण की जहमत नहीं उठाई। इससे सड़क खस्ताहाल स्थिति में पहुंच गई। वर्तमान में स्थिति यह है कि बलूनी गांव से पुल्यांसू तक तीन किमी मार्ग अवरुद्ध है। प्रधान पुल्यांसू विमला देवी, सोहन सिंह, सते सिंह, वचन सिंह, वीरेंद्र सिंह, चंद्रमोहन सिंह, अनूप सिंह, जीत सिंह, धनवीर सिंह व यशवंत सिंह ने बताया कि मस्टखाल से बलूनी गांव तक सड़क चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है। इसके अलावा सतपुली से उतिंडा बागौं तक मार्ग पर भी यातायात का संचालन हो रहा है, लेकिन बीच के अवशेष तीन किमी हिस्से का निर्माण अभी तक नहीं किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि फरवरी 2013 में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार ने अधिरोपित शर्तों के अधीन मार्ग निर्माण की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की थी। जुलाई 2017 में पीएमजीएसवाई ने मार्ग का सर्वे भी किया था। ग्रामीणों ने कहा कि हर बार चुनाव के दौरान नेता मार्ग का शीघ्र निर्माण कराने का आश्वासन दे जाते हैं, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं होती। जेई विपिन कोमला ने बताया कि मस्टखाल उतिंडा मिलान मार्ग में चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है। पुल्यांसू बरगड़ी के बीच करीब तीन किमी हिस्सा वन क्षेत्र में है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया के लिए पत्राचार चल रहा है। स्वीकृति मिलने के बाद मार्ग का निर्माण कराया जाएगा।
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वर्ष 1980 में द्वारीखाल ब्लॉक के पुल्यांसू, बरगड्डी, उतिंडा, भैंसडाखागल, छिमारधार, कफोलगांव व मेवाड़ को जोड़ने के लिए मस्टखाल से उतिंडा मिलान मोटर मार्ग का निर्माण किया गया था, लेकिन इसके बाद शासन ने इस मार्ग के निर्माण की जहमत नहीं उठाई। इससे सड़क खस्ताहाल स्थिति में पहुंच गई। वर्तमान में स्थिति यह है कि बलूनी गांव से पुल्यांसू तक तीन किमी मार्ग अवरुद्ध है। प्रधान पुल्यांसू विमला देवी, सोहन सिंह, सते सिंह, वचन सिंह, वीरेंद्र सिंह, चंद्रमोहन सिंह, अनूप सिंह, जीत सिंह, धनवीर सिंह व यशवंत सिंह ने बताया कि मस्टखाल से बलूनी गांव तक सड़क चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है। इसके अलावा सतपुली से उतिंडा बागौं तक मार्ग पर भी यातायात का संचालन हो रहा है, लेकिन बीच के अवशेष तीन किमी हिस्से का निर्माण अभी तक नहीं किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि फरवरी 2013 में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार ने अधिरोपित शर्तों के अधीन मार्ग निर्माण की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की थी। जुलाई 2017 में पीएमजीएसवाई ने मार्ग का सर्वे भी किया था। ग्रामीणों ने कहा कि हर बार चुनाव के दौरान नेता मार्ग का शीघ्र निर्माण कराने का आश्वासन दे जाते हैं, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं होती। जेई विपिन कोमला ने बताया कि मस्टखाल उतिंडा मिलान मार्ग में चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है। पुल्यांसू बरगड़ी के बीच करीब तीन किमी हिस्सा वन क्षेत्र में है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया के लिए पत्राचार चल रहा है। स्वीकृति मिलने के बाद मार्ग का निर्माण कराया जाएगा।
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