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इंदिरा अम्मा भोजनालय बंद होने की कगार पर
Updated Sun, 04 Feb 2018 10:28 PM IST
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कोटद्वार। लोगों को सस्ता और अच्छा भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खोली गई इंदिरा अम्मा भोजनालय सरकार की बेरुखी के चलते बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। भोजनालय का संचालन कर रहे स्वयं सहायक समूह को पिछले एक साल से सरकार से सब्सिडी नहीं मिली है। इसके चलते भोजनालय बंद होने की स्थिति में आ गया है। 27 नवंबर 2015 को कांग्रेस सरकार ने कोटद्वार तहसील में इंदिरा अम्मा भोजनालय खोला था। इसका मकसद यही था कि तहसील पहुंचने वाले दूर-दराज के लोगों को सस्ता और अच्छा भोजन उपलब्ध कराया जा सके। तब सरकार ने कैंटीन संचालित करने वाले स्वयं समूहों को प्रति थाली 10 रुपये सब्सिडी देने की व्यवस्था की थी। इसकी वजह से मात्र 25 रुपये में गरीबों को भरपेट और सस्ता खाना उपलब्ध हो रहा था। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद अभी तक कैंटीन को सब्सिडी नहीं मिली है। कैंटीन में कार्यरत प्रसन्ना देवी, शिखा देवी, पुष्पा देवी, सरोज बहुखंडी, नीलम देवी, राजकुमारी, करूणा, सुनीता और राजेश्वरी ने प्रदेश सरकार पर भोजनालय की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। कहा कि पिछले एक साल से सब्सिडी का कोई पैसा नहीं मिला है। इससे कैंटीन में कार्यरत स्वयं समूहों को पूरा मानदेय नहीं मिल पा रहा है। साथ ही स्वयं समूहों को अपने घर से पैसा लगाकर इंदिरा भोजनालय संचालित करना पड़ रहा है। उन्होेंने कहा कि प्रतिदिन 100 लोग यहां भोजन करते हैं। इससे एकत्रित पैसों से ही स्वयं समूहों का वेतन और भोजनालय का खर्च नहीं निकल पा रहा है। यही हाल रहा तो उन्हें भोजनालय को बंद करना पड़ेगा।
कोट
इंदिरा अम्मा भोजनालय को मिलने वाली सब्सिडी के संबंध में कई बार पत्राचार किया जा चुका है। सब्सिडी दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- राकेश तिवारी, उपजिलाधिकारी कोटद्वार
-फोटो समाचार
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इंदिरा अम्मा भोजनालय को मिलने वाली सब्सिडी के संबंध में कई बार पत्राचार किया जा चुका है। सब्सिडी दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- राकेश तिवारी, उपजिलाधिकारी कोटद्वार
-फोटो समाचार