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उतराखंड की बिजली से रोशन हुआ यूपी का चतुरुवाला गांव
Updated Mon, 23 Oct 2017 10:50 PM IST
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कोटद्वार। उत्तराखंड से सटे यूपी की मोटाढांक ग्राम पंचायत के चतरूवाला गांव में आजादी के 70 साल बाद बिजली पहुंच गई है। सोमवार को गांव में बिजली पहुंचते ही ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पृथक उत्तराखंड राज्य बनने के बाद उत्तराखंड ऊर्जा निगम ने इन गांवों को सीधे बिजली की आपूर्ति करने से हाथ खड़े कर दिए थे। अब बिजली तो उत्तराखंड से ही मिलेगी, लेकिन कनेक्शन यूपी ऊर्जा निगम ही देगा।
अविभाजित यूपी से कटकर उत्तराखंड राज्य बनने से कोटद्वार से सटे यूपी के देवेंद्र नगर कौड़िया, चतरुवाला और मोटाढांक समेत कई गांव विकास की दृष्टि से अलग-थलग पड़ गए। इन गांवों को उत्तराखंड बनने के बाद कोटद्वार से मिल रही कई सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है, जबकि क्षेत्र की सभी सुविधाएं और सरोकार उत्तराखंड से ही जुड़े हैं। राज्य अलग होने के बाद जहां उत्तराखंड ऊर्जा निगम ने यहां बिजली के कनेक्शन देने से हाथ खड़े कर दिए थे, वहीं नजीबाबाद-नगीना क्षेत्र से कोटद्वार के बीच करीब 28 किमी का सघन वन क्षेत्र होने के कारण यूपी ने इन गांवों के लिए बिजली आपूर्ति के लिए नई लाइन बिछाने से इनकार कर दिया।
यूपी के गांवों में बिजली आपूर्ति के लिए उत्तराखंड और यूपी ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने नया रास्ता निकाला है। दोनों राज्यों के अधिकारियों की हाल में हुई बैठक में तय हुआ कि जब तक यूपी पावर कारपोरेशन इन गांवों की विद्युत व्यवस्था अपने नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था करता है, तब तक इन गांवों में उत्तराखंड के नेटवर्क से ही विद्युत व्यवस्था जारी रखी जाएगी, लेकिन मीटर लगाने की व्यवस्था पृथक कर ली जाएगी। उत्तराखंड ऊर्जा निगम ने यूपी बॉर्डर पर इन गांवों को अपने नेटवर्क से बिजली देने के लिए मीटर लगाने व्यवस्था शुरू कर दी है। कोटद्वार से बिजली मिलने के बाद ऊर्जा निगम नजीबाबाद ने सोमवार को मोटाढांक के चतरूवाला गांव में बिजली के कनेक्शन दे दिए हैं। इससे ग्रामीणों में खुशी की लहर छा गई है।
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मोटाढांक (बिजनौर) की प्रधान अनीता दुतपुड़ी ने बताया कि आजादी के पूरे 70 साल बाद गांव वालों में बिजली का मुंह देखा है। उन्होंने इसके लिए उत्तराखंड और यूपी के ऊर्जा निगम के अधिकारियों का आभार जताया है।
अविभाजित यूपी से कटकर उत्तराखंड राज्य बनने से कोटद्वार से सटे यूपी के देवेंद्र नगर कौड़िया, चतरुवाला और मोटाढांक समेत कई गांव विकास की दृष्टि से अलग-थलग पड़ गए। इन गांवों को उत्तराखंड बनने के बाद कोटद्वार से मिल रही कई सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है, जबकि क्षेत्र की सभी सुविधाएं और सरोकार उत्तराखंड से ही जुड़े हैं। राज्य अलग होने के बाद जहां उत्तराखंड ऊर्जा निगम ने यहां बिजली के कनेक्शन देने से हाथ खड़े कर दिए थे, वहीं नजीबाबाद-नगीना क्षेत्र से कोटद्वार के बीच करीब 28 किमी का सघन वन क्षेत्र होने के कारण यूपी ने इन गांवों के लिए बिजली आपूर्ति के लिए नई लाइन बिछाने से इनकार कर दिया।
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यूपी के गांवों में बिजली आपूर्ति के लिए उत्तराखंड और यूपी ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने नया रास्ता निकाला है। दोनों राज्यों के अधिकारियों की हाल में हुई बैठक में तय हुआ कि जब तक यूपी पावर कारपोरेशन इन गांवों की विद्युत व्यवस्था अपने नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था करता है, तब तक इन गांवों में उत्तराखंड के नेटवर्क से ही विद्युत व्यवस्था जारी रखी जाएगी, लेकिन मीटर लगाने की व्यवस्था पृथक कर ली जाएगी। उत्तराखंड ऊर्जा निगम ने यूपी बॉर्डर पर इन गांवों को अपने नेटवर्क से बिजली देने के लिए मीटर लगाने व्यवस्था शुरू कर दी है। कोटद्वार से बिजली मिलने के बाद ऊर्जा निगम नजीबाबाद ने सोमवार को मोटाढांक के चतरूवाला गांव में बिजली के कनेक्शन दे दिए हैं। इससे ग्रामीणों में खुशी की लहर छा गई है।
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मोटाढांक (बिजनौर) की प्रधान अनीता दुतपुड़ी ने बताया कि आजादी के पूरे 70 साल बाद गांव वालों में बिजली का मुंह देखा है। उन्होंने इसके लिए उत्तराखंड और यूपी के ऊर्जा निगम के अधिकारियों का आभार जताया है।