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पौने दो साल में ही एसडीएम के तबादले पर भड़के संगठन
Updated Thu, 07 Jun 2018 10:48 PM IST
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कोटद्वार। बिना नायब तहसीलदार और तहसीलदार के चल रही कोटद्वार तहसील से एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी का पौने दो साल में ही तबादला करने पर कई संगठनों ने सरकार के प्रति नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब तक एक अधिकारी पूरे क्षेत्र को अच्छी तरह समझकर कार्य करना शुरू करता है, तब तक उसका तबादला कर दिया जाता है।
अखिल भारतीय नशाबंदी परिषद के संयोजक एडवोकेट जगमोहन भारद्वाज ने कोटद्वार तहसील में तहसीलदार और नायब तहसीलदार के दोनों पदों पर स्थायी नियुक्ति तक एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी का तबादला रोकने की मांग की है। कहा कि तिवारी जनता की समस्याओं को अच्छी तरह से समझकर सुलझा रहे थे। उधर, एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी के पौने दो साल में ही तबादले को सत्तारूढ़ दल की आपसी खींचतान का परिणाम माना जा रहा है। कोटद्वार की नदियों खोह और सुखरौ में रिवर चैनलाइजेशन के नाम पर दिए गए जारी खनन के पट्टे और अवैध खनन को लेकर भी सत्तारूढ़ दल में सत्ता के कई केंद्र बने हुए हैं। एक गुट जहां सीधे राजधानी में संगठन और सरकार के कुछ लोगों से जुड़ा है, तो दूसरा गुट कोटद्वार विधानसभा की मौजूदा राजनीति से जुड़ा है।
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अखिल भारतीय नशाबंदी परिषद के संयोजक एडवोकेट जगमोहन भारद्वाज ने कोटद्वार तहसील में तहसीलदार और नायब तहसीलदार के दोनों पदों पर स्थायी नियुक्ति तक एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी का तबादला रोकने की मांग की है। कहा कि तिवारी जनता की समस्याओं को अच्छी तरह से समझकर सुलझा रहे थे। उधर, एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी के पौने दो साल में ही तबादले को सत्तारूढ़ दल की आपसी खींचतान का परिणाम माना जा रहा है। कोटद्वार की नदियों खोह और सुखरौ में रिवर चैनलाइजेशन के नाम पर दिए गए जारी खनन के पट्टे और अवैध खनन को लेकर भी सत्तारूढ़ दल में सत्ता के कई केंद्र बने हुए हैं। एक गुट जहां सीधे राजधानी में संगठन और सरकार के कुछ लोगों से जुड़ा है, तो दूसरा गुट कोटद्वार विधानसभा की मौजूदा राजनीति से जुड़ा है।
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