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खंडहर में तब्दील हुआ लैंसडौन का कुली शेड
Updated Sat, 20 Jan 2018 10:40 PM IST
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लैंसडौन। ब्रिटिश शासनकाल में मेहनत मजदूरी करके पेट पालने वाले मजदूरों के लिए बनाया गया कुली शेड पूरी तरह खंडहर हो गया है। कैंट प्रशासन की उदासीनता के चलते कड़ाके की ठंड में मजदूरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही कैंट को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
कैंट प्रशासन ने वर्ष 1975 में तत्कालीन बोर्ड सदस्य वरियाम सिंह के प्रयासों से 50-75 मजदूरों के रहने के लिए लैंसडौन के कुली मोहल्ले में पांच से छह कमरों का कुली शेड का निर्माण कराया था। कैंट के नियमोें के तहत मजदूरों को प्रति माह किराए पर कमरों का आवंटन किया जाता था। इस व्यवस्था से मजदूरों को सिर ढकने के लिए छत और कैंट को आय मिलती थी। कैंट की देखरेख के अभाव में मजदूर शेड पूरी तरह से जीर्णशीर्ण हालात में पहुंचने के कारण यहां से मजदूरों को खाली कारा दिया गया था। वर्तमान में नेपाली मजदूर कड़ाके की ठंड में सर छुपाने के लिए भटकने को मजबूर हैं। कैंट के प्रशासनिक अधिकारी अनिल बौंठियाल ने बताया कि बोर्ड द्वारा प्रस्ताव पारित होने पर कुली शेड का पुनर्निर्माण हो सकेगा। बोर्ड ने अभी कोई प्रस्ताव पारित नहीें किया है।
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कैंट प्रशासन ने वर्ष 1975 में तत्कालीन बोर्ड सदस्य वरियाम सिंह के प्रयासों से 50-75 मजदूरों के रहने के लिए लैंसडौन के कुली मोहल्ले में पांच से छह कमरों का कुली शेड का निर्माण कराया था। कैंट के नियमोें के तहत मजदूरों को प्रति माह किराए पर कमरों का आवंटन किया जाता था। इस व्यवस्था से मजदूरों को सिर ढकने के लिए छत और कैंट को आय मिलती थी। कैंट की देखरेख के अभाव में मजदूर शेड पूरी तरह से जीर्णशीर्ण हालात में पहुंचने के कारण यहां से मजदूरों को खाली कारा दिया गया था। वर्तमान में नेपाली मजदूर कड़ाके की ठंड में सर छुपाने के लिए भटकने को मजबूर हैं। कैंट के प्रशासनिक अधिकारी अनिल बौंठियाल ने बताया कि बोर्ड द्वारा प्रस्ताव पारित होने पर कुली शेड का पुनर्निर्माण हो सकेगा। बोर्ड ने अभी कोई प्रस्ताव पारित नहीें किया है।
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