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कण्वाश्रम को राष्ट्रीय धरोहर बनाने के लिए हों संयुक्त प्रयास: डा. अनिल जोशी
Updated Sat, 20 Jan 2018 10:33 PM IST
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कोटद्वार। वसंत पंचमी मेला समिति की ओर से कण्वाश्रम के विकास को लेकर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कण्वाश्रम को भारत का एतिहासिक व सांस्कृतिक दृष्टि से राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित किए जाने पर जोर दिया।
शनिवार को कण्वाश्रम में आयोजित गोष्ठी का पद्मश्री डा. अनिल जोशी ने शुभारंभ किया। उन्होंने कण्वाश्रम को राष्ट्रीय धरोहर बनाने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाने पर जोर दिया। डा. पदमेश बुडाकोटी ने कहा कि कण्वाश्रम की ऐतिहासिक प्रमाणित हो चुकी है। यहां पूर्व वैदिक कालीन सत्यता का एक महत्वपूूर्ण केंद्र है। डा. नंदकिशोर ढौडियाल ने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण और कालिदास कृत अभिज्ञान शाकुंतलम में इस स्थल की महत्ता का उल्लेख किया गया है। डा. मंजू कपरवाण ने कहा कि कण्वाश्रम हस्तिनापुर का मार्ग दर्शन करने वाले ऋषि मुनियों की तपस्थली था। डा. गणेशमणी त्रिपाठी ने यहां रोजगार और साहसिक पर्यटन के विकास पर जोर दिया। पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती ने कहा कि कण्वाश्रम में पवित्र मालिनी नदी पर घाटों को निर्माण कर संध्याकालीन आरती शुरू किए जाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर डा. दिवाकर बेवनी, चक्रधर शर्मा कमलेश, आभा डबराल, ऋषि कंडवाल, विमल प्रसाद शुक्ला, जमुना बहुगुणा, गोकुल सिंह नेगी, वीरेंद्र भारद्वाज, चंद्रमोहन बिंजोला, उषा सजवाण, जिवानंद शर्मा, वीरेंद्र सिंह रावत, जेपी धस्माना आदि मौजूद थे।
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शनिवार को कण्वाश्रम में आयोजित गोष्ठी का पद्मश्री डा. अनिल जोशी ने शुभारंभ किया। उन्होंने कण्वाश्रम को राष्ट्रीय धरोहर बनाने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाने पर जोर दिया। डा. पदमेश बुडाकोटी ने कहा कि कण्वाश्रम की ऐतिहासिक प्रमाणित हो चुकी है। यहां पूर्व वैदिक कालीन सत्यता का एक महत्वपूूर्ण केंद्र है। डा. नंदकिशोर ढौडियाल ने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण और कालिदास कृत अभिज्ञान शाकुंतलम में इस स्थल की महत्ता का उल्लेख किया गया है। डा. मंजू कपरवाण ने कहा कि कण्वाश्रम हस्तिनापुर का मार्ग दर्शन करने वाले ऋषि मुनियों की तपस्थली था। डा. गणेशमणी त्रिपाठी ने यहां रोजगार और साहसिक पर्यटन के विकास पर जोर दिया। पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती ने कहा कि कण्वाश्रम में पवित्र मालिनी नदी पर घाटों को निर्माण कर संध्याकालीन आरती शुरू किए जाने पर जोर दिया।
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इस अवसर पर डा. दिवाकर बेवनी, चक्रधर शर्मा कमलेश, आभा डबराल, ऋषि कंडवाल, विमल प्रसाद शुक्ला, जमुना बहुगुणा, गोकुल सिंह नेगी, वीरेंद्र भारद्वाज, चंद्रमोहन बिंजोला, उषा सजवाण, जिवानंद शर्मा, वीरेंद्र सिंह रावत, जेपी धस्माना आदि मौजूद थे।
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