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नगर निगम के विरोध में 27 को कोटद्वार में महारैली
Updated Mon, 20 Nov 2017 10:34 PM IST
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कोटद्वार। कोटद्वार भाबर के गांवों में नगर निगम के विरोध में स्वर तेज हो गए हैं। नगर निगम विरोध संघर्ष समिति और उत्तराखंड क्रांति दल ने नगर निगम के विरोध में 27 नवंबर को कोटद्वार में महारैली का आयोजन किया है। महारैली में चारों पट्टियों के ग्रामीण सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। तहसील में प्रदर्शन के बाद ग्रामीण कोटद्वार पहुंच रहे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष विरोध दर्ज कराएंगे। पदमपुर सुखरौ में हुई संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक में महारैली की तैयारियों को अंतिम रूप प्रदान किया गया।
यूकेडी के केंद्रीय संरक्षक डॉ. शक्तिशैल कपरवाण की अध्यक्षता में हुई संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक में तय किया गया कि मुख्यमंत्री के कोटद्वार आगमन को देखते हुए 27 नवंबर को कोटद्वार में भाबर की चारों पट्टियों के 73 गांवों के लोग सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। कहा कि सत्तारूढ़ दल ने नगर निगम का निर्माण विकास के लिए नहीं बल्कि गांवों का वजूद खत्म करने और भूमाफिया के हितों के लिए किया है। कहा कि कोटद्वार भाबर में सैकड़ों बीघा खेती की जमीन गैरकानूनी तरीके से भूमाफिया के कब्जे में है, जिसका पंचायतों के माध्यम से कई बार विरोध भी किया गया है। बड़े पैमाने पर अनुसूचित जाति और बोक्सा जनजाति की जमीन को ठिकाने लगाने के लिए नगर निगम की वकालत की गई है। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए सरकार ने जन सुनवाई तक करानी ठीक नहीं समझी।
कहा कि नगर निगम के मसले पर मुख्यमंत्री को भी गुमराह किया जा रहा है। बैठक में समिति के महासचिव गोविंद प्रसाद डंडरियाल, कृष्णा बहुगुणा, आनंद बल्लभ घिल्डियाल, विजय ध्यानी, प्रवेंद्र सिंह रावत, राजाराम अण्थ्वाल, चंद्रप्रकाश नैथानी, प्रदीप नेगी, सूरज प्रसाद कांति, बीरेंद्र थलेड़ी, मदन सिंह नेगी, धर्मेंद्र सिंह रावत, जितेंद्र सिंह, शतीश नैथानी और गीता बिष्ट मौजूद थे।
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यूकेडी के केंद्रीय संरक्षक डॉ. शक्तिशैल कपरवाण की अध्यक्षता में हुई संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक में तय किया गया कि मुख्यमंत्री के कोटद्वार आगमन को देखते हुए 27 नवंबर को कोटद्वार में भाबर की चारों पट्टियों के 73 गांवों के लोग सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। कहा कि सत्तारूढ़ दल ने नगर निगम का निर्माण विकास के लिए नहीं बल्कि गांवों का वजूद खत्म करने और भूमाफिया के हितों के लिए किया है। कहा कि कोटद्वार भाबर में सैकड़ों बीघा खेती की जमीन गैरकानूनी तरीके से भूमाफिया के कब्जे में है, जिसका पंचायतों के माध्यम से कई बार विरोध भी किया गया है। बड़े पैमाने पर अनुसूचित जाति और बोक्सा जनजाति की जमीन को ठिकाने लगाने के लिए नगर निगम की वकालत की गई है। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए सरकार ने जन सुनवाई तक करानी ठीक नहीं समझी।
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कहा कि नगर निगम के मसले पर मुख्यमंत्री को भी गुमराह किया जा रहा है। बैठक में समिति के महासचिव गोविंद प्रसाद डंडरियाल, कृष्णा बहुगुणा, आनंद बल्लभ घिल्डियाल, विजय ध्यानी, प्रवेंद्र सिंह रावत, राजाराम अण्थ्वाल, चंद्रप्रकाश नैथानी, प्रदीप नेगी, सूरज प्रसाद कांति, बीरेंद्र थलेड़ी, मदन सिंह नेगी, धर्मेंद्र सिंह रावत, जितेंद्र सिंह, शतीश नैथानी और गीता बिष्ट मौजूद थे।
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