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बीरोंखाल सामुदायिक अस्पताल खुद पड़ा बीमार, डाक्टरों की दरकार
Updated Mon, 13 Nov 2017 10:55 PM IST
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बीरोंखाल/कोटद्वार। पौड़ी जिले के सुदूरवर्ती विकासखंड बीरोंखाल में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सरकार ने यहां पर सामुदायिक अस्पताल (सीएचसी) तो खोल रखा है, लेकिन यहां कभी पदों के सृजन के अनुरूप डाक्टर नहीं रहे। डाक्टर ही नहीं, यहां पर फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स का भी टोटा बना हुआ है, जिसके चलते इस अस्पताल से जुड़े 70 गांवों के लोगों को उपचार के लिए कुमाऊं मंडल के रामनगर पर निर्भर रहना पड़ता है। सीएचसी के सृजित करीब दस डाक्टरों के पदों के सापेक्ष यहां पर मात्र दो डाक्टर तैनात हैं।
ग्रामीण यशपाल पटवाल, विजयपाल सिंह, मुकेश सिंह, अनिल सिंह व संदीप सिंह का कहना है कि क्षेत्र के 70 गांवों के लोग उपचार के लिए सीएचसी बीरोंखाल पर निर्भर हैं। दो डाक्टर ही यहां पर ओपीडी और इमरजेंसी दोनों संभाले हुए हैं। महिला चिकित्सक न होने के कारण यहां तैनात एकमात्र स्टाफ नर्स ही सामान्य डिलीवरी करवाती है। स्टाफ नर्स के छुट्टी पर जाने और आपरेशन की नौबत आने पर गर्भवती माताओं को रामनगर के लिए रेफर करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सुदूरवर्ती ग्रामीण अंचलों में ब्लाक मुख्यालय के अस्पतालों में एक महिला विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती की मांग लंबे अरसे से की जा रही है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि सामुदायिक अस्पताल में अन्य सुविधाएं तो दूर, दुर्घटनाओं के वक्त एक्सरे भी नहीं कराए जा रहे हैं। एक्सरे मशीन तो लगाई गई है, लेकिन एक्सरे तकनीशियन का पद रिक्त चल रहा है। दिन और रात दो फार्मासिस्ट काम कर रहे हैं, जबकि चार पद सृजित हैं। सीएमओ पौड़ी डा. आरएस राणा का कहना है कि डाक्टरों की तैनाती के लिए शासन को लिखा गया है।
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ग्रामीण यशपाल पटवाल, विजयपाल सिंह, मुकेश सिंह, अनिल सिंह व संदीप सिंह का कहना है कि क्षेत्र के 70 गांवों के लोग उपचार के लिए सीएचसी बीरोंखाल पर निर्भर हैं। दो डाक्टर ही यहां पर ओपीडी और इमरजेंसी दोनों संभाले हुए हैं। महिला चिकित्सक न होने के कारण यहां तैनात एकमात्र स्टाफ नर्स ही सामान्य डिलीवरी करवाती है। स्टाफ नर्स के छुट्टी पर जाने और आपरेशन की नौबत आने पर गर्भवती माताओं को रामनगर के लिए रेफर करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सुदूरवर्ती ग्रामीण अंचलों में ब्लाक मुख्यालय के अस्पतालों में एक महिला विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती की मांग लंबे अरसे से की जा रही है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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लोगों का कहना है कि सामुदायिक अस्पताल में अन्य सुविधाएं तो दूर, दुर्घटनाओं के वक्त एक्सरे भी नहीं कराए जा रहे हैं। एक्सरे मशीन तो लगाई गई है, लेकिन एक्सरे तकनीशियन का पद रिक्त चल रहा है। दिन और रात दो फार्मासिस्ट काम कर रहे हैं, जबकि चार पद सृजित हैं। सीएमओ पौड़ी डा. आरएस राणा का कहना है कि डाक्टरों की तैनाती के लिए शासन को लिखा गया है।
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