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मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों पर हो कार्रवाई
Updated Wed, 03 Oct 2018 10:28 PM IST
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कोटद्वार। शहीदों हम शर्मिंदा हैं, तुम्हारे कातिल जिंदा हैं...जैसे नारों के साथ देवभूमि सिविल सोसाइटी उत्तराखंड की न्याय यात्रा बुधवार को कोटद्वार तहसील मुख्यालय पहुंची। यहां सिविल सोसाइटी ने राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रामपुर तिराहा कांड (मुजफ्फरनगर कांड) के दोषियों पर कार्रवाई कर की मांग की।
हरिद्वार से चली सिविल सोसाइटी की न्याय यात्रा बुधवार को कोटद्वार तहसील पहुंची। यहां उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर राज्यपाल को ज्ञापन भेजा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बने 17 साल बीत गए हैं, लेकिन मुजफ्फरनगर कांड के आरोपियों को अब तक दंडित नहीं किया जा सका है। कहा कि मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को अब तक की कांग्रेस और भाजपा सरकारों का संरक्षण हासिल है। वर्तमान मुख्यमंत्री भी दोषियों पर कार्रवाई के मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं। इसके बाद राज्य स्तरीय न्याय यात्रा शुरू की गई है, जो उत्तराखंड के विभिन्न नगरों से गुजरती हुई 14 अक्तूबर को देहरादून में राज्यपाल से मिलकर ज्ञापन सौंपेगी।
न्याय यात्रा में धर्माचार्य बाबा हठयोगी, पंडित अधीर कौशिक, जेपी बडोनी, महाराज प्रबोधानंद, स्वामी अंशचेतन महाराज, महाराज विनोद, स्वामी यतिकृष्णानंद, हरीश आर्य, पंडित महावीर प्रसाद, चंद्रशेखर भट्ट, वीरेंद्र फरस्वान, अश्विनी सैनी, रवि जैन, विमल त्यागी, नरेंद्र श्रमिक, हेमेंद्र चौधरी, जुगल किशोर, धर्मवीर सैनी, आशीष गौड़ शामिल रहे।
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हरिद्वार से चली सिविल सोसाइटी की न्याय यात्रा बुधवार को कोटद्वार तहसील पहुंची। यहां उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर राज्यपाल को ज्ञापन भेजा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बने 17 साल बीत गए हैं, लेकिन मुजफ्फरनगर कांड के आरोपियों को अब तक दंडित नहीं किया जा सका है। कहा कि मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को अब तक की कांग्रेस और भाजपा सरकारों का संरक्षण हासिल है। वर्तमान मुख्यमंत्री भी दोषियों पर कार्रवाई के मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं। इसके बाद राज्य स्तरीय न्याय यात्रा शुरू की गई है, जो उत्तराखंड के विभिन्न नगरों से गुजरती हुई 14 अक्तूबर को देहरादून में राज्यपाल से मिलकर ज्ञापन सौंपेगी।
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न्याय यात्रा में धर्माचार्य बाबा हठयोगी, पंडित अधीर कौशिक, जेपी बडोनी, महाराज प्रबोधानंद, स्वामी अंशचेतन महाराज, महाराज विनोद, स्वामी यतिकृष्णानंद, हरीश आर्य, पंडित महावीर प्रसाद, चंद्रशेखर भट्ट, वीरेंद्र फरस्वान, अश्विनी सैनी, रवि जैन, विमल त्यागी, नरेंद्र श्रमिक, हेमेंद्र चौधरी, जुगल किशोर, धर्मवीर सैनी, आशीष गौड़ शामिल रहे।
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