फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Kotdwar News ›   स्वरोजगार से पहाड़ी उत्पादों को नई पहचान दे रही उर्मिला

स्वरोजगार से पहाड़ी उत्पादों को नई पहचान दे रही उर्मिला

Thu, 07 Mar 2019 10:14 PM IST
pratap singh pratap singh
Updated Thu, 07 Mar 2019 10:14 PM IST
विज्ञापन
स्वरोजगार से पहाड़ी उत्पादों को नई पहचान दे रही उर्मिला
mahila - फोटो : amarujala

विज्ञापन
कोटद्वार। कहते हैं कि मन में यदि कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बुलंदियों को छूने से कोई रोक नहीं सकता। बेशक राह में कई बाधाएं सामने आएं। सफलता एक दिन अवश्य उनके कदम चूमती है। कोटद्वार के सनेह पट्टी के बिशनपुर (कुंभीचौड़) निवासी उर्मिला देवरानी पर यह बात एकदम स्टीक बैठती है। कड़ी मेहनत के बलबूते उर्मिला न केवल स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनी हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभरी हैं।
मूल रूप से रिखणीखाल के जेठों गांव निवासी उर्मिला बताती हैं कि पहाड़ी दाल से लेकर सभी उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है। जरूरत इन उत्पादों को शुद्धता के साथ अच्छी पैकिंग में उपलब्ध कराने की है। उन्होंने परिजनों के सहयोग से गांव में ही छोटा उद्यम स्थापित करने की ठान ली। इसके लिए उन्होंने उत्तराखंड ग्रामीण बैंक कुंभीचौड़ से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना (पीएमईजीपी) के तहत 17 लाख, 66 हजार का ऋण लिया और करीब आठ लाख रुपये से अधिक की लागत वाली दक्षिण भारत से मंडुआ और झंगोरा साफ करने से लेकर पैकिंग तक की डिस्टोनर मशीनें मंगवाई हैं। उन्होंने भूम्याल महिला समूह का गठन कर अन्य महिलाओं को साथ जोड़ा और पहाड़ी उपजों और उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कमर कस ली। अब उनके उत्पाद कोटद्वार बाजार के साथ ही देहरादून और दिल्ली एनसीआर में बिकने लगे हैं। प्रवासी उत्तराखंडी उनके उत्पादों के स्थायी ग्राहक बन गए हैं।
विज्ञापन

महिला उद्यमी उर्मिला ने बताया कि भूम्याल महिला समूह का उद्देश्य उत्तराखंड के परंपरागत एवं स्थानीय फल और उपजों पर आधारित पहाड़ी उत्पादों को मैदानी क्षेत्रों में पहले पहाड़ी प्रवासियों तक उपलब्ध कराया जा रहा है। एक वर्ष से भी कम समय में उनके उत्पादों को क्वालिटी के बल पर कोटद्वार, देहरादून, गाजियाबाद और दिल्ली में विशेष पहचान मिली है। इससे जहां महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है, वहीं पर्वतीय किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल रहा है। भविष्य में महिला समूह कई पेय और कंडाली से चायपत्ती बनाने पर विचार कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed