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कोटद्वार की बेटी प्रियंका आर्मी डाक्टर बनकर करेगी देश की सेवा
Updated Tue, 08 May 2018 10:40 PM IST
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कोटद्वार। कोटद्वार की बेटी प्रियंका नेगी अब आर्मी में डाक्टर बनकर देश की सेवा करेंगी। प्रियंका ने आईएमए देहरादून में मंगलवार को आर्मी डाक्टर के रूप में कैप्टन का कमीशन प्राप्त किया। माता-पिता ने बेटी के कंघों पर स्टार लगाकर उसके सपनों को पूरा किया।
कोटद्वार जौनपुर निवासी और वर्तमान में सैनिक कल्याण अधिकारी पौड़ी के पद पर कार्यरत कर्नल चंद्रपाल सिंह नेगी (सेनि.) और गृहिणी बिमला नेेगी की बेटी प्रियंका का बचपन से ही आर्मी में डाक्टर बनने का सपना था। उसने आर्मी स्कूल फैजाबाद यूपी से 10वीं और केंद्रीय विद्यालय बैलगांव कर्नाटक से 12वीं की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उसने नवोदय मेडिकल कालेज रायचूर (कर्नाटक) से एमबीबीएस की डिग्री लेकर एम्स ऋषिकेश और ईसीएच सेंटर कोटद्वार में प्रेक्टिस की। इस बीच उसने आर्मी में डाक्टर के लिए आवेदन किया और दिसंबर 2017 को उसका आर्मी के लिए चयन हो गया। इसके बाद आर्मी की भर्ती प्रक्रिया से गुजरने के बाद मंगलवार को उसका आर्मी डाक्टर बनने का सपना पूरा हो गया।
अमर उजाला से बातचीत में प्रियंका ने बताया कि बॉर्डर पर रात-दिन देश की रक्षा में जुटे जवान कई बार दुश्मन की गोली से जख्मी हो जाते हैं, वह उनका इलाज करना चाहती हैं। बचपन से ही उसने आर्मी डाक्टर बनने का सपना देखा है, उसके इस सपने को पूरा करने में उसके माता-पिता ने पूरा सहयोग किया है। कहा कि दृढ़ संकल्प के साथ की गई मेहनत से हमेशा सपने साकार होते हैं।
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कोटद्वार जौनपुर निवासी और वर्तमान में सैनिक कल्याण अधिकारी पौड़ी के पद पर कार्यरत कर्नल चंद्रपाल सिंह नेगी (सेनि.) और गृहिणी बिमला नेेगी की बेटी प्रियंका का बचपन से ही आर्मी में डाक्टर बनने का सपना था। उसने आर्मी स्कूल फैजाबाद यूपी से 10वीं और केंद्रीय विद्यालय बैलगांव कर्नाटक से 12वीं की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उसने नवोदय मेडिकल कालेज रायचूर (कर्नाटक) से एमबीबीएस की डिग्री लेकर एम्स ऋषिकेश और ईसीएच सेंटर कोटद्वार में प्रेक्टिस की। इस बीच उसने आर्मी में डाक्टर के लिए आवेदन किया और दिसंबर 2017 को उसका आर्मी के लिए चयन हो गया। इसके बाद आर्मी की भर्ती प्रक्रिया से गुजरने के बाद मंगलवार को उसका आर्मी डाक्टर बनने का सपना पूरा हो गया।
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अमर उजाला से बातचीत में प्रियंका ने बताया कि बॉर्डर पर रात-दिन देश की रक्षा में जुटे जवान कई बार दुश्मन की गोली से जख्मी हो जाते हैं, वह उनका इलाज करना चाहती हैं। बचपन से ही उसने आर्मी डाक्टर बनने का सपना देखा है, उसके इस सपने को पूरा करने में उसके माता-पिता ने पूरा सहयोग किया है। कहा कि दृढ़ संकल्प के साथ की गई मेहनत से हमेशा सपने साकार होते हैं।
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