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सीटीआर और केटीआर के जंगलों को आग से बचाने की कवायद शुरू
Updated Mon, 22 Jan 2018 11:01 PM IST
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कालागढ़/कोटद्वार। सर्दी के मौसम की बारिश नहीं होने से वनों को आग का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) और कालागढ़ टाइगर रिजर्व (केटीआर) ने अपने जंगलों को आग से बचाने की कवायद शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कर्मचारियों को जंगल में फायर लाइन काटने के निर्देश दिए हैं।
वन विभाग का फरवरी माह में फायर सीजन शुरू होता है, लेकिन इस बार जनवरी में बरसात नहीं होने से जंगल में पत्ते सूखने लग गए हैं, जिससे आग लगने का खतरा बना हुआ है। अधिकारियों ने इसका संज्ञान लेते हुए फायर लाइन के लिए कार्ययोजना तैयार की है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक अमित वर्मा के अनुसार फायर लाइन कटान का काम सभी रेंज में चल रहा है। इस बार सर्दियों में होने वाली बारिश नहीं हुई है, जिससे वनों में आग का खतरा हो सकता है।
उधर, कालागढ़ टाइगर रिजर्व के डीएफओ एके त्रिपाठी का कहना है कि जिला बिजनौर की सीमा से लगी पाखरो और मोरघाटी रेंज अधिक संवेदनशील है। आग अक्सर बाहरी क्षेत्र से वनों में पहुंचती है। वहां की फायर लाइनों का कटान सबसे पहली प्राथमिकता रही है, यहां फायर लाइन खींचने का काम शुरू किया गया है, बाकी सभी रेंज में भी कटान का काम चल रहा है।
वन विभाग का फरवरी माह में फायर सीजन शुरू होता है, लेकिन इस बार जनवरी में बरसात नहीं होने से जंगल में पत्ते सूखने लग गए हैं, जिससे आग लगने का खतरा बना हुआ है। अधिकारियों ने इसका संज्ञान लेते हुए फायर लाइन के लिए कार्ययोजना तैयार की है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक अमित वर्मा के अनुसार फायर लाइन कटान का काम सभी रेंज में चल रहा है। इस बार सर्दियों में होने वाली बारिश नहीं हुई है, जिससे वनों में आग का खतरा हो सकता है।
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उधर, कालागढ़ टाइगर रिजर्व के डीएफओ एके त्रिपाठी का कहना है कि जिला बिजनौर की सीमा से लगी पाखरो और मोरघाटी रेंज अधिक संवेदनशील है। आग अक्सर बाहरी क्षेत्र से वनों में पहुंचती है। वहां की फायर लाइनों का कटान सबसे पहली प्राथमिकता रही है, यहां फायर लाइन खींचने का काम शुरू किया गया है, बाकी सभी रेंज में भी कटान का काम चल रहा है।
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