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भवनों को ध्वस्त कर 12.53 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को सौंपी

Mon, 17 Sep 2018 10:36 PM IST
Updated Mon, 17 Sep 2018 10:36 PM IST
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भवनों को ध्वस्त कर 12.53 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को सौंपी
कालागढ़/कोटद्वार। रामगंगा बांध परियोजना की सिंचाई विभाग कालोनियों में आठ आलीशान इमारतों और 196 आवासों को ध्वस्त कर पौड़ी जिला प्रशासन ने वन विभाग को 12.53 हेक्टेयर भूमि सौंप दी है। अभी 28 हेक्टेयर जमीन और खाली कराई जानी है। रामगंगा भवन में रविवार देर रात एसडीएम कोटद्वार कमलेश मेहता, शिविर प्रबंध खंड के सहायक अभियंता व कार्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के बीच बैठक हुई, जिसमें यह भूमि वन विभाग को सौंपी गई।
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एनजीटी के आदेश पर कालागढ़ में रामगंगा बांध परियोजना की अवशेष भूमि वन विभाग को लौटाने की कवायद चल रही है। इसके तहत प्रशासन ने राजकीय भवनों और आवासों का बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण का अभियान चलाया था। यहां प्रथम चरण के तहत भवन ध्वस्त किए जा चुके हैं। द्वितीय चरण के तहत नई कालोनी में प्रशासन ने शनिवार और रविवार दो दिनों तक आलीशान इमारतों को जनता के विरोध के बीच ध्वस्त किया। इसमें कालागढ़ का थाना भवन, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गैस एजेंसी, उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड का कार्यालय, शिविर प्रबंध खंड के अभियंता कार्यालय, डाकघर, उपकोषागार और रामरहीम मिलन केंद्र शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय कालोनी और नई कालोनी में 196 राजकीय आवासों को भी ध्वस्त किया गया है। बड़ी संख्या में सी व डी आवास टूटे हैं। सोमवार को द्वितीय चरण के तहत भवन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोक दी गई। साथ ही निर्णय लिया गया कि 24 सितंबर को नई दिल्ली में अब तक की कार्रवाई से एनजीटी को अवगत कराया जाएगा। साथ ही स्टेटस रिपोर्ट अदालत को सौंप दी जाएगी। एसडीएम कमलेश मेहता ने बताया कि अब एनजीटी से अगले आदेशों के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। विद्युत विभाग के जीएम कार्यालय को खाली करा लिया गया है। अभी 28 हेक्टेयर जमीन और खाली कराई जानी है।
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इंसेट
दहशत और सदमे में बीती दो रातें
कालागढ़ की कालोनियों में रह रहे लोगों शनिवार और रविवार की रातें दहशत के बीच बीतीं। राजेश कुमार, अजय कुमार और राजपाल सिंह आदि ने बताया कि हर क्षण यही लगता रहा कि कभी भी जेसीबी आ सकती है और घर से सामान निकालकर घरों को गिरा न दे। ध्वस्तीकरण रुकने से अब थोड़ी राहत महसूस हुई है। लोगों का कहना है कि भवनों के टूटने से लोग बेघरबार हो गए।
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