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पुनरीक्षित वेतनमान न दिए जाने पर भड़का स्वास्थ्य पर्यवेक्षक संगठन
Updated Mon, 30 Apr 2018 10:48 PM IST
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कोटद्वार। सेवानिवृत्त स्वास्थ्य कर्मचारी, पर्यवेक्षक व पर्यवेक्षिका संगठन की जिला इकाई की यहां हुई बैठक में वर्ष 1995 से 2010 तक पुनरीक्षित वेतनमान के एरियर का भुगतान न होने पर आक्रोश व्यक्त किया गया। कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के एक वर्ष बीत जाने के बाद भी एरियर का भुगतान न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकारी अनदेखी के चलते कई कर्मचारी जहां सेवानिवृत्त हो गए हैं, वहीं कई का देहांत भी हो चुका है।
यहां व्यापार मंडल सभागार में संगठन की जिलाध्यक्ष गणेशी नेगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सेवानिवृत्त स्वास्थ्य कर्मचारी, पर्यवेक्षक व पर्यवेक्षिकाओं ने शासन और प्रशासन पर उनकी उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि संगठन वर्षों से पुनरीक्षित वेतनमान की मांग कर रहा है, लेकिन इस ओर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। जिला मंत्री राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि उपेक्षाओं के चलते कर्मचारियों ने 2011 में नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसका फैसला उनके पक्ष में आया, लेकिन सरकार ने उसका भी क्रियान्वयन नहीं किया। तय हुआ था कि एक मई 1995 से आठ नवंबर, 2011 तक का एरियर उत्तर प्रदेश सरकार भुगतान करेगी, वहीं राज्य गठन के बाद से 30 जून, 2010 तक का एरियर का भुगतान उत्तराखंड सरकार द्वारा किया जाएगा। इसके बाद 11 अप्रैल, 2017 को उच्च न्यायालय नैनीताल ने उत्तराखंड सरकार को दस हफ्ते के भीतर भुगतान के आदेश दिए, लेकिन एक साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बैठक में मुन्नी गुसाईं, सरस्वती रावत, लक्ष्मी देवी, श्यामा बड़थ्वाल, सुमित्रा बिष्ट, सरस्वती रावत, सुमित्रा राणा, धनेश्वरी, शकुंतला रावत, कमला असवाल, उमा बड़थ्वाल, गोदांबरी नैनवाल, सीता ध्यानी, अनीता जैकब, बसंती सिंह, सुशील थपलियाल और पीडी बुड़ाकोटी समेत संगठन के कई सदस्य मौजूद थे।
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यहां व्यापार मंडल सभागार में संगठन की जिलाध्यक्ष गणेशी नेगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सेवानिवृत्त स्वास्थ्य कर्मचारी, पर्यवेक्षक व पर्यवेक्षिकाओं ने शासन और प्रशासन पर उनकी उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि संगठन वर्षों से पुनरीक्षित वेतनमान की मांग कर रहा है, लेकिन इस ओर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। जिला मंत्री राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि उपेक्षाओं के चलते कर्मचारियों ने 2011 में नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसका फैसला उनके पक्ष में आया, लेकिन सरकार ने उसका भी क्रियान्वयन नहीं किया। तय हुआ था कि एक मई 1995 से आठ नवंबर, 2011 तक का एरियर उत्तर प्रदेश सरकार भुगतान करेगी, वहीं राज्य गठन के बाद से 30 जून, 2010 तक का एरियर का भुगतान उत्तराखंड सरकार द्वारा किया जाएगा। इसके बाद 11 अप्रैल, 2017 को उच्च न्यायालय नैनीताल ने उत्तराखंड सरकार को दस हफ्ते के भीतर भुगतान के आदेश दिए, लेकिन एक साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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बैठक में मुन्नी गुसाईं, सरस्वती रावत, लक्ष्मी देवी, श्यामा बड़थ्वाल, सुमित्रा बिष्ट, सरस्वती रावत, सुमित्रा राणा, धनेश्वरी, शकुंतला रावत, कमला असवाल, उमा बड़थ्वाल, गोदांबरी नैनवाल, सीता ध्यानी, अनीता जैकब, बसंती सिंह, सुशील थपलियाल और पीडी बुड़ाकोटी समेत संगठन के कई सदस्य मौजूद थे।
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