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बेटियों की शिक्षा में जुटे शिक्षक जगमोहन और संतोष बने आम से खास
Updated Tue, 23 Jan 2018 10:28 PM IST
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कोटद्वार। राजकीय इंटर कालेज कोटद्वार केंद्र के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम को साकार कर रहा है। यहां के शिक्षकों ने बालिकाओं की शिक्षा के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल की है। शिक्षकों के प्रयासों का ही प्रतिफल है कि आज शहर की बेटियां जीआईसी कोटद्वार में ही शिक्षा ग्रहण करना चाहती हैं।
वर्ष 1947 में स्थापित राजकीय इंटर कालेज कोटद्वार में वर्ष 2016 तक बालिकाओं के लिए शिक्षा की व्यवस्था नहीं थी। विद्यालय के प्रधानचार्य जगमोहन सिंह रावत और शिक्षक संतोष नेगी की बेटियों केे पढ़ाने की इच्छा शक्ति के चलते उन्होंने शिक्षा विभाग से बालिकाओं के प्रवेश की अनुमति ली। एक वर्ष पूर्व विद्यालय में कुल सात बालिकाओं ने प्रवेश लिया। शिक्षकों ने उन बालिकाओं के लिए अपने वेतन से ड्रेस, फीस, कापी, किताब की व्यवस्था करने के साथ ही अन्य खर्च भी वहन किया। यही नहीं बेटियों को उनके घर से लाने और ले जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी की। इसका परिणाम यह रहा कि एक वर्ष के अंदर जीआईसी में 30 बेटियों ने दाखिला लिया और वर्तमान में विद्यालय में शिक्षा ले रही 37 बेटियों को शिक्षा के लिए सभी सुविधाएं निशुल्क दी जा रही हैं।
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बेटियों की शिक्षा में शिक्षकों का सहयोग
जीआईसी के प्रधानाचार्य जगमोहन सिंह और शिक्षक संतोष नेगी ने अपने वेतन और जनसहयोग से बेटियों के लिए ड्रेस, पाठ्य सामग्री, तीन वाहनों की व्यवस्था, बालिकाओं को साइकिल, झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली बेटियों के लिए सोलर लाइट, घर का आवश्यक सामान, लैब में प्रैक्टिकल के लिए सामग्री की व्यवस्था की। शिक्षकों का कहना है कि जितनी भी बेटियां विद्यालय में एडमिशन लेंगी, उन्हें जनसहयोग से सभी सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
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वर्ष 1947 में स्थापित राजकीय इंटर कालेज कोटद्वार में वर्ष 2016 तक बालिकाओं के लिए शिक्षा की व्यवस्था नहीं थी। विद्यालय के प्रधानचार्य जगमोहन सिंह रावत और शिक्षक संतोष नेगी की बेटियों केे पढ़ाने की इच्छा शक्ति के चलते उन्होंने शिक्षा विभाग से बालिकाओं के प्रवेश की अनुमति ली। एक वर्ष पूर्व विद्यालय में कुल सात बालिकाओं ने प्रवेश लिया। शिक्षकों ने उन बालिकाओं के लिए अपने वेतन से ड्रेस, फीस, कापी, किताब की व्यवस्था करने के साथ ही अन्य खर्च भी वहन किया। यही नहीं बेटियों को उनके घर से लाने और ले जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी की। इसका परिणाम यह रहा कि एक वर्ष के अंदर जीआईसी में 30 बेटियों ने दाखिला लिया और वर्तमान में विद्यालय में शिक्षा ले रही 37 बेटियों को शिक्षा के लिए सभी सुविधाएं निशुल्क दी जा रही हैं।
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बेटियों की शिक्षा में शिक्षकों का सहयोग
जीआईसी के प्रधानाचार्य जगमोहन सिंह और शिक्षक संतोष नेगी ने अपने वेतन और जनसहयोग से बेटियों के लिए ड्रेस, पाठ्य सामग्री, तीन वाहनों की व्यवस्था, बालिकाओं को साइकिल, झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली बेटियों के लिए सोलर लाइट, घर का आवश्यक सामान, लैब में प्रैक्टिकल के लिए सामग्री की व्यवस्था की। शिक्षकों का कहना है कि जितनी भी बेटियां विद्यालय में एडमिशन लेंगी, उन्हें जनसहयोग से सभी सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
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