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चाइनीज पटाखों ने झुलसाया, दो दर्जन पहुंचे अस्पताल
Updated Fri, 20 Oct 2017 10:55 PM IST
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कोटद्वार। दिवाली पर करीब दो दर्जन से अधिक लोग पटाखों से झुलस गए। इनमें से कई को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। इनमें कई घायलों ने बताया कि वे लोग चीनी पटाखों से झुलसे हैं।
बृहस्पतिवार की रात दीपावली में पटाखे जलाने में घायल हुए लोगों का कहना है कि उन्हें पटाखों का अंदाजा नहीं था। खासकर चीनी बम सबसे खतरनाक साबित हुए। देवीरोड निवासी आशीष कुमार का कहना है कि वह बच्चे को पटाखे छुड़ा रहे थे। इसी बीच एक बड़े अनार की चपेट में आने से उनका हाथ बुरी तरह झुलस गया। शिब्बू नगर निवासी हिमांशु का भी यही हाल हुआ।
राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में उपचार कराने वालों में शिवपुर के सात साल के लक्षित, कालाबड़ निवासी संदीप, हरिसिंगपुर निवासी सुमन कुमार, गाड़ीघाट निवासी अविनाश, बद्रीनाथ मार्ग निवासी सोनू समेत दर्जन भर लोग शामिल थे। करीब एक दर्जन लोगों ने अपना उपचार डॉक्टरों के आवास और प्राइवेेट क्लीनिक खुलवाकर करवाया।
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कांडाखाल निवासी सोमप्रकाश कंडवाल, पदमपुर कोटद्वार निवासी रुपचंद्र लखेड़ा, यमकेश्वर के शशिभूषण अमोली, भाबर के रमेश सिंह नेगी बताते हैं कि क्षेत्र में कई लोग आतिशबाजी के कारण झुलसे हैं। पटाखों के अंदर ज्यादा बारूद भरा होने के कारण बच्चे ज्यादा झुलसे हैं। उन्होंने अगली दिवाली से केवल दीए जलाकर प्रकाशोत्सव मनाने का संकल्प लिया है। बताया कि चीनी पटाखों और लड़ियों का बहिष्कार केवल नारों तक सिमटा रहा। जमकर चीनी निर्मित पटाखों और लड़ियों की बिक्री हुई। बताया कि आम उपभोक्ताओें को ये पटाखे और लड़ियां भारत में बनी कहकर बेची गई।
बृहस्पतिवार की रात दीपावली में पटाखे जलाने में घायल हुए लोगों का कहना है कि उन्हें पटाखों का अंदाजा नहीं था। खासकर चीनी बम सबसे खतरनाक साबित हुए। देवीरोड निवासी आशीष कुमार का कहना है कि वह बच्चे को पटाखे छुड़ा रहे थे। इसी बीच एक बड़े अनार की चपेट में आने से उनका हाथ बुरी तरह झुलस गया। शिब्बू नगर निवासी हिमांशु का भी यही हाल हुआ।
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राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में उपचार कराने वालों में शिवपुर के सात साल के लक्षित, कालाबड़ निवासी संदीप, हरिसिंगपुर निवासी सुमन कुमार, गाड़ीघाट निवासी अविनाश, बद्रीनाथ मार्ग निवासी सोनू समेत दर्जन भर लोग शामिल थे। करीब एक दर्जन लोगों ने अपना उपचार डॉक्टरों के आवास और प्राइवेेट क्लीनिक खुलवाकर करवाया।
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कांडाखाल निवासी सोमप्रकाश कंडवाल, पदमपुर कोटद्वार निवासी रुपचंद्र लखेड़ा, यमकेश्वर के शशिभूषण अमोली, भाबर के रमेश सिंह नेगी बताते हैं कि क्षेत्र में कई लोग आतिशबाजी के कारण झुलसे हैं। पटाखों के अंदर ज्यादा बारूद भरा होने के कारण बच्चे ज्यादा झुलसे हैं। उन्होंने अगली दिवाली से केवल दीए जलाकर प्रकाशोत्सव मनाने का संकल्प लिया है। बताया कि चीनी पटाखों और लड़ियों का बहिष्कार केवल नारों तक सिमटा रहा। जमकर चीनी निर्मित पटाखों और लड़ियों की बिक्री हुई। बताया कि आम उपभोक्ताओें को ये पटाखे और लड़ियां भारत में बनी कहकर बेची गई।