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भीमल के रेशों से बने उत्पादों की विदेशों में भारी मांग
Updated Sat, 21 Apr 2018 10:44 PM IST
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यमकेश्वर। ग्राम कांडी में अंबेडकर हस्तशिल्प विकास योजना के अंतर्गत डिजाइन एवं तकनीकी विकास कार्यशाला में महिलाओं को भीमल रेशे से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही मास्टर ट्रेनर बीना पुंडीर एवं डिजाइनर पथिक चौधरी ने बताया कि इसके माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। भीमल से बने उत्पादों से प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं प्रतिमाह 3000 से 4000 हजार रुपये तक कमा सकती हैं।
25 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्राम कांडी, अमगांव, कोलसी ओर उमरोली की 30 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें महिलाओं को बैग, चप्पलें, टोकरी, टब, कड़े, पायदान व फूलदान आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मास्टर ट्रेनर बीना पुंडीर ने बताया कि स्थानीय रेशा भीमल शिल्प से बनने वाले उत्पादों को विदेशों में हाथोंहाथ लिया जा रहा है। प्रशिक्षण में महिलाओं को प्रतिदिन 300 रुपये भी दिए जा रहे हैं। बताया कि भीमल के रेशों से बने उत्पादों की मांग अधिक होने के कारण इस पर ही फोकस किया जा रहा है। भीमल से बने उत्पादों की विदेशों में भी काफी मांग है और सबसे अधिक मांग फ्रांस में है।
भारतीय ग्रामोत्थान संस्था ढालवाला ऋषिकेश की ओर से महिलाओं को हथकरघा एवं हस्तशिल्प को बढ़ाने के लिए कार्य किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों में मुन्नी देवी, शकुंतला देवी, गीता देवी, कविता देवी, पुष्पा देवी, प्रभा देवी, विमला देवी, सविता देवी व सुधा देवी आदि शामिल हैं।
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25 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्राम कांडी, अमगांव, कोलसी ओर उमरोली की 30 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें महिलाओं को बैग, चप्पलें, टोकरी, टब, कड़े, पायदान व फूलदान आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मास्टर ट्रेनर बीना पुंडीर ने बताया कि स्थानीय रेशा भीमल शिल्प से बनने वाले उत्पादों को विदेशों में हाथोंहाथ लिया जा रहा है। प्रशिक्षण में महिलाओं को प्रतिदिन 300 रुपये भी दिए जा रहे हैं। बताया कि भीमल के रेशों से बने उत्पादों की मांग अधिक होने के कारण इस पर ही फोकस किया जा रहा है। भीमल से बने उत्पादों की विदेशों में भी काफी मांग है और सबसे अधिक मांग फ्रांस में है।
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भारतीय ग्रामोत्थान संस्था ढालवाला ऋषिकेश की ओर से महिलाओं को हथकरघा एवं हस्तशिल्प को बढ़ाने के लिए कार्य किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों में मुन्नी देवी, शकुंतला देवी, गीता देवी, कविता देवी, पुष्पा देवी, प्रभा देवी, विमला देवी, सविता देवी व सुधा देवी आदि शामिल हैं।
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