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सरकारी जमीन पर कब्जे के प्रयास पर भड़के ग्रामीण, प्रदर्शन
Updated Tue, 19 Dec 2017 10:41 PM IST
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कोटद्वार। केंद्रीय विद्यालय और आयुर्वेदिक महाविद्यालय के लिए चयनित सरकारी जमीन पर कब्जे के प्रयास पर काशीरामपुर तल्ला के ग्रामीण भड़क उठे हैं। उन्होंने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर सरकारी जमीन में पूर्व में आवंटित पट्टों को निरस्त करने की मांग उठाई है। कहा कि पट्टा आवंटन से लेकर इसके नवीनीकरण तक के मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
काशीरामपुर निवासी पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सूरज प्रसाद कांती की अगुवाई में मंगलवार को ग्रामीणों ने तहसील में प्रदर्शन कर सरकारी जमीन को खुदबुर्द करने का विरोध किया। ग्रामीणों ने कहा कि काशीरामपुर तल्ला में खोह नदी के तट पर स्थित सरकारी जमीन केंद्रीय विद्यालय और आयुर्वेदिक महाविद्यालय के लिए चयनित की गई है। कुछ लोगों को इसी जमीन के एक हिस्से पर पौड़ी जिला प्रशासन की ओर से नब्बे के दशक में पट्टे आवंटित किए गए थे, जिन पर आज तक कब्जे नहीं लिए गए। ग्रामीणों ने कहा कि कोटद्वार में नगर निगम की सुगबुगाहट के बाद भूमाफिया की मिलीभगत से राजस्व कर्मियों और अधिकारियों ने इन पट्टों का नवीनीकरण भी कर दिया है। ग्रामीणों ने पट्टों के नवीनीकरण पर सवाल उठाए। कहा कि जिन लोगों को ये पट्टे आवंटित किए गए थे, उनके पास पहले से ही अपनी निजी जमीन और भवन मौजूद हैं। ऐसे में सरकारी जमीन के इन पट्टों को अविलंब निरस्त करते हुए यहां पर जनभावनाओं के अनुसार केंद्रीय विद्यालय और आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक महाविद्यालय की स्थापना की जाए।
ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी भूमि राजस्व विभाग के अभिलेखों में श्रेणी 6 (1) में अंकित है, लेकिन वर्ष 1990 से पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा उक्त भूमि पर चार पट्टे आवंटित किए गए, जो पूर्णत: गैरकानूनी है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार श्रेणी 6 (1) की भूमि पर आवास और खेती के लिए आवंटन पर वर्तमान समय में भी रोक है, ऐसी स्थिति में चारों पट्टों को नियमित किए जाने से तहसील प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े होने लाजिमी हैं। सरकारी जमीन पर कब्जों का प्रयास किया गया तो ग्रामीण तहसील का घेराव और सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। ज्ञापन देने वालों में पंकज कोटियाल, राजेश नौटियाल, सत्यपाल सिंह, उपेंद्र सिंह, नीरज नेगी, कुलवंत रावत, कुंवर सिंह रावत, नरेंद्र सिंह नेगी आदि शामिल हैं।
काशीरामपुर निवासी पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सूरज प्रसाद कांती की अगुवाई में मंगलवार को ग्रामीणों ने तहसील में प्रदर्शन कर सरकारी जमीन को खुदबुर्द करने का विरोध किया। ग्रामीणों ने कहा कि काशीरामपुर तल्ला में खोह नदी के तट पर स्थित सरकारी जमीन केंद्रीय विद्यालय और आयुर्वेदिक महाविद्यालय के लिए चयनित की गई है। कुछ लोगों को इसी जमीन के एक हिस्से पर पौड़ी जिला प्रशासन की ओर से नब्बे के दशक में पट्टे आवंटित किए गए थे, जिन पर आज तक कब्जे नहीं लिए गए। ग्रामीणों ने कहा कि कोटद्वार में नगर निगम की सुगबुगाहट के बाद भूमाफिया की मिलीभगत से राजस्व कर्मियों और अधिकारियों ने इन पट्टों का नवीनीकरण भी कर दिया है। ग्रामीणों ने पट्टों के नवीनीकरण पर सवाल उठाए। कहा कि जिन लोगों को ये पट्टे आवंटित किए गए थे, उनके पास पहले से ही अपनी निजी जमीन और भवन मौजूद हैं। ऐसे में सरकारी जमीन के इन पट्टों को अविलंब निरस्त करते हुए यहां पर जनभावनाओं के अनुसार केंद्रीय विद्यालय और आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक महाविद्यालय की स्थापना की जाए।
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ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी भूमि राजस्व विभाग के अभिलेखों में श्रेणी 6 (1) में अंकित है, लेकिन वर्ष 1990 से पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा उक्त भूमि पर चार पट्टे आवंटित किए गए, जो पूर्णत: गैरकानूनी है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार श्रेणी 6 (1) की भूमि पर आवास और खेती के लिए आवंटन पर वर्तमान समय में भी रोक है, ऐसी स्थिति में चारों पट्टों को नियमित किए जाने से तहसील प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े होने लाजिमी हैं। सरकारी जमीन पर कब्जों का प्रयास किया गया तो ग्रामीण तहसील का घेराव और सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। ज्ञापन देने वालों में पंकज कोटियाल, राजेश नौटियाल, सत्यपाल सिंह, उपेंद्र सिंह, नीरज नेगी, कुलवंत रावत, कुंवर सिंह रावत, नरेंद्र सिंह नेगी आदि शामिल हैं।
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