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क्रास बैरियर या पैराफिट होते तो बच जाती चारों की जान

Wed, 08 May 2019 09:47 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 08 May 2019 09:47 PM IST
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क्रास बैरियर या पैराफिट होते तो बच जाती चारों की जान
कोटद्वार। तीर्थनगरी ऋषिकेश को पर्यटन नगरी लैंसडौन से जोड़ने वाली राज्य की महत्वपूर्ण गूमखाल-सिलोगी-लक्ष्मणझूला मोटर मार्ग पर लोक निर्माण विभाग और सरकार की अनदेखी का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। इस महत्वपूर्ण मार्ग पर सामान्य स्थलों को तो छोड़िए, तीव्र मोड़ और डेंजर जोन तक में पैराफिट और क्रास बैरियर नहीं बनाए गए हैं। ऊंचे पहाड़ों के बीच बनी इस सड़क पर यदि विभाग की ओर से क्रास बैरियर और पैराफिट बनाए होते तो शायद मंगलवार को हुई कार दुर्घटना होने से बच जाती। जिसमें पोखड़ा और एकेश्वर विकासखंडों के दो गांवों के चार लोगों की जान चली गई।
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गूमखाल-सिलोगी-लक्ष्मणझूला मार्ग पर मंगलवार दिन में सिलोगी से दो किमी बड़ेथखाल में एक कार गहरी खाई में जा गिरी। यह हादसा ऐसे निर्जन स्थान पर हुआ, जहां आसपास के गांवों के लोगों को भी हादसे की खबर नहीं लगी। हादसे की सूचना पर बुधवार को घटनास्थल पर पहुंचे क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर कहीं पर भी पैराफिट और क्रास बैरियर नहीं बनाए गए हैं। तीव्र मोड़ों पर पूर्व में भी कई हादसे हो चुके हैं, जिससे विभाग ने कोई सबक नहीं लिया है। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष शक्तिशैल कपरवाण और प्रवक्ता विजय ध्यानी का कहना है कि धुमाकोट बस हादसे के बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देशों की सरकारी महकमें लगातार अवहेलना कर रहे हैं। सड़कों के ब्लैक स्पॉट, डेंजर जोन भी बदहाल पड़े हैं। संकेतक तक नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में निर्दोष लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। चैलूसैंण निवासी चद्रमोहन डोबरियाल, रुपचंद्र जखमोला, राजेंद्र सिल्सवाल, अशोक बड़थ्वाल और मुकेश जुयाल का कहना है सड़क पर यदि पैराफिट बने होते तो कार हादसे में चार लोगों की जान बच गई होती।
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सड़क हादसे की जानकारी मिलते ही सड़क का निरीक्षण किया गया है। जिस स्थान पर हादसा हुआ है, वह एकदम सीधी है। वहां पर हादसे की कोई आशंका तक नहीं है। हादसे का प्रथम दृष्ट्या कारण ओवरस्पीड और चालक को नींद की झपकी आना बताया जा रहा है। भविष्य में पैराफिट या क्रास बैरियर लगाए जाएंगे।
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-आलोक जैन, सहायक अभियंता लोनिवि लैंसडौन
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