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गोष्ठी में समाज में बढ़ती असहिष्णुता और हिंसा पर जताई चिंता
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कोटद्वार। साहित्यिक संस्था साहित्यांचल की ओर से बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में आयोजित विचार गोष्ठी में समाज में बढ़ती असहिष्णुता और हिंसा पर चिंता जताई गई।
बुद्धा पार्क में महात्मा बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष प्रार्थना कार्यक्रम के बाद मेहरबान सिंह कंडारी इंटरमीडिएट कॉलेज में संस्था के अध्यक्ष शिव प्रकाश कुकरेती की अध्यक्षता में गोष्ठी हुई। इसमें वक्ताओं ने कहा कि बुद्ध दर्शन और उनके सामाजिक समरसता, न्याय, दया और समतामूलक समाज की स्थापना पर हमारे नीति नियंताओं को बहुत गंभीरता के साथ विचार करना चाहिए। वर्तमान में समाज में बढ़ रही असहिष्णुता और हिंसा हमें एक सभ्य समाज की परिभाषा से निरंतर दूर कर रही है, जो देश के लिए बहुत शुभ संकेत नहीं है।
विचार गोष्ठी में साहित्कार डा. नंदकिशोर ढौंडियाल ने महात्मा बुद्ध के जीवन दर्शन की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करते हुए प्रतिस्पर्धा के इस युग में हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति और इसके दुष्प्रभावों के प्रति सचेत होने का आह्वान किया। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य विनोद चंद्र कुकरेती और पूर्व बैंक अधिकारी हरि सिंह भंडारी ने महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़े बोध गया, सारनाथ, कुशीनगर आदि महत्वपूर्ण क्षेत्रों के भ्रमण के अनुभव बांटे। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को सामाजिक समरसता और दबे कुचले लोगों की सेवा के प्रति सजग करने की आवश्यकता है। डा. वेद प्रकाश माहेश्वरी शैवाल ने बुद्ध, महावीर और गांधी दर्शन की व्यावहारिक संरचना की आवश्यकता पर बल दिया।
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गोष्ठी में चक्रधर शर्मा कमलेश, डा. नागेंद्र ध्यानी, श्रीविलास बुड़ाकोटी, प्रवेश नवानी, गणेशमणि त्रिपाठी, प्रकाश कोठारी, डा. चंद्रमोहन बड़थ्वाल, अमित नैथानी व जगदीश भारद्वाज आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सीपी नैथानी ने किया।
-फोटो
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बुद्धा पार्क में महात्मा बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष प्रार्थना कार्यक्रम के बाद मेहरबान सिंह कंडारी इंटरमीडिएट कॉलेज में संस्था के अध्यक्ष शिव प्रकाश कुकरेती की अध्यक्षता में गोष्ठी हुई। इसमें वक्ताओं ने कहा कि बुद्ध दर्शन और उनके सामाजिक समरसता, न्याय, दया और समतामूलक समाज की स्थापना पर हमारे नीति नियंताओं को बहुत गंभीरता के साथ विचार करना चाहिए। वर्तमान में समाज में बढ़ रही असहिष्णुता और हिंसा हमें एक सभ्य समाज की परिभाषा से निरंतर दूर कर रही है, जो देश के लिए बहुत शुभ संकेत नहीं है।
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विचार गोष्ठी में साहित्कार डा. नंदकिशोर ढौंडियाल ने महात्मा बुद्ध के जीवन दर्शन की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करते हुए प्रतिस्पर्धा के इस युग में हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति और इसके दुष्प्रभावों के प्रति सचेत होने का आह्वान किया। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य विनोद चंद्र कुकरेती और पूर्व बैंक अधिकारी हरि सिंह भंडारी ने महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़े बोध गया, सारनाथ, कुशीनगर आदि महत्वपूर्ण क्षेत्रों के भ्रमण के अनुभव बांटे। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को सामाजिक समरसता और दबे कुचले लोगों की सेवा के प्रति सजग करने की आवश्यकता है। डा. वेद प्रकाश माहेश्वरी शैवाल ने बुद्ध, महावीर और गांधी दर्शन की व्यावहारिक संरचना की आवश्यकता पर बल दिया।
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गोष्ठी में चक्रधर शर्मा कमलेश, डा. नागेंद्र ध्यानी, श्रीविलास बुड़ाकोटी, प्रवेश नवानी, गणेशमणि त्रिपाठी, प्रकाश कोठारी, डा. चंद्रमोहन बड़थ्वाल, अमित नैथानी व जगदीश भारद्वाज आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सीपी नैथानी ने किया।
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