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सहकारी समितियों में डीएपी खाद का टोटा, किसान परेशान
Updated Thu, 30 Nov 2017 10:22 PM IST
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कोटद्वार/भाबर। कोटद्वार भाबर की चारों सहकारी समितियों में पिछले दो सप्ताह से डीएपी (डाई अमोनियम फास्फेट) खाद का स्टाक खत्म है। खाद न मिलने से काश्तकार परेशान हैं। उन्हें गेहूं की बुवाई के समय बाजार से महंगे दामों पर यह खाद खरीदनी पड़ रही है। कई काश्तकार इस बार बिना खाद के ही गेहूं की बुवाई करने लगे हैं। इससे उन्हें इसका असर उत्पादन पर पड़ने की आशंका सता रही है। किसानों ने खाद की अनुपलब्धता पर आक्रोश जताते हुए जल्द डीएपी और एनपीके खाद सहकारी समितियों में उपलब्ध कराने की मांग की है।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य और काश्तकार आलोक रावत, कुबेर सिंह जलाल, राजन जलाल, देवेंद्र सिंह राणा, पूरण पंत, भूपेंद्र सिंह, हरि सिंह राणा, वीरेंद्र सिंह रावत, आनंदमणि कुकरेती, आशीष कुकरेती, आशीष जलाल, सतेंद्र नेगी व अनूप सिंह आदि का कहना है कि पिछले दो सप्ताह से काश्तकार खाद के लिए साधन सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं। काश्तकारों का कहना है कि आजकल कोटद्वार भाबर के सभी 73 गांवों में किसान गेहूं की बुवाई में लगे हैं। गेहूं की अच्छी फसल के लिए बुवाई के समय डीएपी खाद का डालना जरूरी है, लेकिन इस बार बुवाई के समय में खाद का टोटा पड़ने से काश्तकारों में आक्रोश के साथ ही मायूसी बनी है।
किसानों का कहना है राज्य सरकार उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के माध्यम से समितियों को खाद उपलब्ध कराती है। समिति में जहां यह खाद रियायती दरों पर 1050 रुपये प्रति बोरी उपलब्ध हो जाती है, वहीं बाजार से यही बैग 1300 से 1400 रुपये में मिल रहा है। भीमसिंहपुर सहकारी समिति के सचिव हरि सिंह रावत ने बताया कि समिति में सरकार इफको की खाद भेजती है। पहले 600 बैग डीएपी के बैग आए थे, जो 18 नवंबर को खत्म हो गए हैं। अब सात दिसंबर तक समितियों को फिर से खाद मिलने की संभावना है।
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हरिद्वार समेत गढ़वाल में गुजरात के कांधला से इफको कंपनी की खाद आती है। इस बार चुनाव के कारण रेलवे की ओर से मालवाहक बोगी के आरक्षण में देरी होने से खाद आपूर्ति में विलंब हो गई है। एक सप्ताह के भीतर डीएपी समेत अन्य जरूरी खाद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-उमेश अवस्थी, जिला प्रबंधक, राज्य सहकारी संघ कोटद्वार
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पूर्व जिला पंचायत सदस्य और काश्तकार आलोक रावत, कुबेर सिंह जलाल, राजन जलाल, देवेंद्र सिंह राणा, पूरण पंत, भूपेंद्र सिंह, हरि सिंह राणा, वीरेंद्र सिंह रावत, आनंदमणि कुकरेती, आशीष कुकरेती, आशीष जलाल, सतेंद्र नेगी व अनूप सिंह आदि का कहना है कि पिछले दो सप्ताह से काश्तकार खाद के लिए साधन सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं। काश्तकारों का कहना है कि आजकल कोटद्वार भाबर के सभी 73 गांवों में किसान गेहूं की बुवाई में लगे हैं। गेहूं की अच्छी फसल के लिए बुवाई के समय डीएपी खाद का डालना जरूरी है, लेकिन इस बार बुवाई के समय में खाद का टोटा पड़ने से काश्तकारों में आक्रोश के साथ ही मायूसी बनी है।
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किसानों का कहना है राज्य सरकार उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के माध्यम से समितियों को खाद उपलब्ध कराती है। समिति में जहां यह खाद रियायती दरों पर 1050 रुपये प्रति बोरी उपलब्ध हो जाती है, वहीं बाजार से यही बैग 1300 से 1400 रुपये में मिल रहा है। भीमसिंहपुर सहकारी समिति के सचिव हरि सिंह रावत ने बताया कि समिति में सरकार इफको की खाद भेजती है। पहले 600 बैग डीएपी के बैग आए थे, जो 18 नवंबर को खत्म हो गए हैं। अब सात दिसंबर तक समितियों को फिर से खाद मिलने की संभावना है।
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हरिद्वार समेत गढ़वाल में गुजरात के कांधला से इफको कंपनी की खाद आती है। इस बार चुनाव के कारण रेलवे की ओर से मालवाहक बोगी के आरक्षण में देरी होने से खाद आपूर्ति में विलंब हो गई है। एक सप्ताह के भीतर डीएपी समेत अन्य जरूरी खाद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-उमेश अवस्थी, जिला प्रबंधक, राज्य सहकारी संघ कोटद्वार