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लालपानी ओवरहेड टैंक बना शोपीस, ग्रामीण परेशान
Updated Mon, 13 Nov 2017 10:54 PM IST
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कोटद्वार। सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते करीब दो करोड़ की लागत से निर्मित ओवरहेड टैंक का लालपानी क्षेत्र की जनता को लाभ नहीं मिल पा रहा है। टैंक लोकार्पण के दिन से ही टपकने लगा है। इसके कारण पानी का टैंक पिछले एक वर्ष से शोपीस बना हुआ है।
वर्ष 2012-13 में क्षेत्र में पेयजल किल्लत को देखते हुए ग्रामीणों की मांग पर सरकार द्वारा लालपानी में ओवरहेड टैंक की स्वीकृति की गई थी। विभाग ने नियमानुसार इसके टेंडर कराए और मेरठ की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के रेट कम होने पर उसे ओवरहेड टैंक निर्माण का कार्य सौंप दिया, लेकिन, कुछ समय बाद ही कंपनी आधा अधूरा कार्य छोड़कर चलती बनी। तब से टैंक का कार्य अटका हुआ है। तीन साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन लीकेज होने के कारण इसका उपयोग जलापूर्ति के लिए नहीं हो पा रहा है।
वर्ष 2016 में ग्रामीणों की शिकायत पर एक बार फिर से कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग ने उसी टेंडर पर संबंधित कंपनी और ठेकेदार से निर्माण कार्य पूरा कराया। दिसंबर 2016 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने ओवरहेड टैंक का लोकार्पण किया। लोकार्पण के बाद जैसे ही जलापूर्ति के लिए टैंक को पानी से भरा गया तो वह टपकने लगा। तब से सिंचाई विभाग दो बार टैंक की मरम्मत करा चुका है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। आज तक टैंक जलसंस्थान के हैंडओवर नहीं हो सका है।
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स्थानीय ग्रामीण महानंद ध्यानी, रतन सिंह नेगी, सुल्तान सिंह रावत, मोहन सिंह रावत व हृदयराम चतुर्वेदी ने सिंचाई विभाग पर ओवरहेड टैंक के निर्माण में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया।
उधर, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुधीर मोहन डियूंडी ने बताया कि पुुराने ठेकेदार के टेंडर को कैंसिल करने की उच्चाधिकारियों से इजाजत ले ली गई है। आगे के कार्य के लिए नए टेंडर डाले जाएंगे। टैंक की वाटर प्रूफिंग कराकर इसे दो सप्ताह के अंदर जलसंस्थान के हैंडओवर कर दिया जाएगा।
-फोटो
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वर्ष 2012-13 में क्षेत्र में पेयजल किल्लत को देखते हुए ग्रामीणों की मांग पर सरकार द्वारा लालपानी में ओवरहेड टैंक की स्वीकृति की गई थी। विभाग ने नियमानुसार इसके टेंडर कराए और मेरठ की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के रेट कम होने पर उसे ओवरहेड टैंक निर्माण का कार्य सौंप दिया, लेकिन, कुछ समय बाद ही कंपनी आधा अधूरा कार्य छोड़कर चलती बनी। तब से टैंक का कार्य अटका हुआ है। तीन साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन लीकेज होने के कारण इसका उपयोग जलापूर्ति के लिए नहीं हो पा रहा है।
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वर्ष 2016 में ग्रामीणों की शिकायत पर एक बार फिर से कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग ने उसी टेंडर पर संबंधित कंपनी और ठेकेदार से निर्माण कार्य पूरा कराया। दिसंबर 2016 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने ओवरहेड टैंक का लोकार्पण किया। लोकार्पण के बाद जैसे ही जलापूर्ति के लिए टैंक को पानी से भरा गया तो वह टपकने लगा। तब से सिंचाई विभाग दो बार टैंक की मरम्मत करा चुका है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। आज तक टैंक जलसंस्थान के हैंडओवर नहीं हो सका है।
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स्थानीय ग्रामीण महानंद ध्यानी, रतन सिंह नेगी, सुल्तान सिंह रावत, मोहन सिंह रावत व हृदयराम चतुर्वेदी ने सिंचाई विभाग पर ओवरहेड टैंक के निर्माण में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया।
उधर, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुधीर मोहन डियूंडी ने बताया कि पुुराने ठेकेदार के टेंडर को कैंसिल करने की उच्चाधिकारियों से इजाजत ले ली गई है। आगे के कार्य के लिए नए टेंडर डाले जाएंगे। टैंक की वाटर प्रूफिंग कराकर इसे दो सप्ताह के अंदर जलसंस्थान के हैंडओवर कर दिया जाएगा।
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