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वेंटलेटर पर है कोटद्वार का सरकारी अस्पताल
Updated Wed, 23 Aug 2017 10:27 PM IST
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कोटद्वार। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार की स्वास्थ्य सेवाएं दिन ब दिन बदहाल होती जा रही हैं। विशेषज्ञ डाक्टरों, फार्मेसिस्टों, नर्स और तकनीकी स्टाफ की भारी कमी के कारण अस्पताल वेंटीलेटर पर है।
कोटद्वार के सरकारी अस्पताल में पौड़ी जिले की करीब एक तिहाई आबादी स्वास्थ्य लाभ लेती है। गंभीर बीमारी अथवा सड़क दुुर्घटना में मरीजों और घायलों को कोटद्वार अस्पताल लाया जाता है, लेकिन अस्पताल में उन्हें इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने पर मरीजों और घायलों को रेफर कर दिया जाता है। इसके कारण गरीब तबके के लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगे दाम पर इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
दो माह से फिजीशियन, पैथोलॉजिस्ट नहीं
28 जून को स्वास्थ्य विभाग ने कोटद्वार अस्पताल में तैनात एकमात्र फिजीशियन, एक वरिष्ठ सर्जन और एक मात्र पैथोलॉजिस्ट का स्थानांतरण कर दिया था, लेकिन उनके स्थान पर आज तक एक भी डाक्टर की तैनाती नहीं की गई। इसके अलावा विभाग ने पांच फार्मेसिस्ट सहित एक दर्जन स्वास्थ्य कर्मियों का भी तबादला कर दिया। इसके कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं दो महीने से बदहाल हैं। लोग इलाज के लिए भटक रहे हैं।
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11 करोड़ की मशीनें फांक रही धूल
राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में ओपीडी और पहुंचने वाले घायलों की संख्या को देखते हुए यहां करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से लिथोट्रिप्सी, एमआरआई और सिटी स्कैन मशीन की लगाई गई, लेकिन इनके संचालन के लिए रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं की गई और न ही किसी डाक्टर को इन मशीनों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके कारण मशीनें धूल फांक रही हैं।
डिजिटल एक्स-रे भी खराब
अगस्त के प्रथम सप्ताह में आई आपदा के दौरान अस्पताल के निचले मंजिल में बरसात का पानी भर गया था। इसके कारण जमीन पर रखे डिजिटल एक्सरे का यूपीएस और अन्य यंत्र खराब हो गए थे। इसके कारण लोग महंगे दाम पर प्राइवेट में एक्स-रे कराने को मजबूर हैं।
-फोटो
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कोटद्वार के सरकारी अस्पताल में पौड़ी जिले की करीब एक तिहाई आबादी स्वास्थ्य लाभ लेती है। गंभीर बीमारी अथवा सड़क दुुर्घटना में मरीजों और घायलों को कोटद्वार अस्पताल लाया जाता है, लेकिन अस्पताल में उन्हें इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने पर मरीजों और घायलों को रेफर कर दिया जाता है। इसके कारण गरीब तबके के लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगे दाम पर इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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दो माह से फिजीशियन, पैथोलॉजिस्ट नहीं
28 जून को स्वास्थ्य विभाग ने कोटद्वार अस्पताल में तैनात एकमात्र फिजीशियन, एक वरिष्ठ सर्जन और एक मात्र पैथोलॉजिस्ट का स्थानांतरण कर दिया था, लेकिन उनके स्थान पर आज तक एक भी डाक्टर की तैनाती नहीं की गई। इसके अलावा विभाग ने पांच फार्मेसिस्ट सहित एक दर्जन स्वास्थ्य कर्मियों का भी तबादला कर दिया। इसके कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं दो महीने से बदहाल हैं। लोग इलाज के लिए भटक रहे हैं।
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11 करोड़ की मशीनें फांक रही धूल
राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में ओपीडी और पहुंचने वाले घायलों की संख्या को देखते हुए यहां करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से लिथोट्रिप्सी, एमआरआई और सिटी स्कैन मशीन की लगाई गई, लेकिन इनके संचालन के लिए रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं की गई और न ही किसी डाक्टर को इन मशीनों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके कारण मशीनें धूल फांक रही हैं।
डिजिटल एक्स-रे भी खराब
अगस्त के प्रथम सप्ताह में आई आपदा के दौरान अस्पताल के निचले मंजिल में बरसात का पानी भर गया था। इसके कारण जमीन पर रखे डिजिटल एक्सरे का यूपीएस और अन्य यंत्र खराब हो गए थे। इसके कारण लोग महंगे दाम पर प्राइवेट में एक्स-रे कराने को मजबूर हैं।
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