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तेज बारिश के अलर्ट से नदियों और गदेरों के किनारे के लोग दहशत में

Sat, 06 Jul 2019 10:20 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jul 2019 10:20 PM IST
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तेज बारिश के अलर्ट से नदियों और गदेरों के किनारे के लोग दहशत में
कोटद्वार। शासन-प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते नदियों और गदेरों के किनारे बसे लोगों में बाढ़ की दहशत बनी हुई है। मौसम विभाग की नौ जुलाई तक तेज बारिश के अलर्ट और बाढ़ सुरक्षा कार्य में हो रही सुस्ती के कारण लोगों का दिन का चैन और रात की नींद उड़ी हुई है।
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कोटद्वार के मालन, सुखरो और खोह नदी के अलावा गिंवईस्रोत, पनियाली गदेरे के नजदीक के शिवपुर, मानपुर, जौनपुर, आपपड़ाव, सिताबपुर, सूर्य नगर, प्रतापनगर, देवी नगर, सैनिक कालोनी, कौड़िया, ग्रास्टनगंज, रतनपुर, कुंभीचौड़, पदमपुर, सिमलचौड़, निंबूचौड़, सत्तीचौड़, शीतलपुर व हल्दूखाता आदि क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। लोग पिछले दो साल से शासन प्रशासन से पर्याप्त बाढ़ सुरक्षा कार्य करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
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विभागीय लापरवाही का आलम यह है एक साल पहले सत्तीचौड़ में आई बाढ़ से हुए नुकसान की हालत जस की तस है। गिंवईस्रोत में गदेरे से मलबा नहीं उठाया गया है। लोगों के घरों तक मलबा भरा हुआ है। गदेरे के किनारे बनी झोपड़ियों को नहीं हटाया गया है। पनियाली गदेरे में अतिक्रमणकारी जमे हुए हैं, जिससे गदेरे के उफान से लोगों को जानमाल का नुकसान होने का खतरा बना हुआ है।
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स्थानीय निवासी पुरुषोत्तम शर्मा, प्रमोद सेमवाल, यशोदा चौहान, संतोषी देवी, संतन थापा, आलोक बहुखंडी, राजेंद्र सिंह नेगी, यशपाल सिंह रावत, भारत सिंह नेगी, बिमला देवी व गोदांबरी रावत ने शासन प्रशासन पर क्षेत्रवासियों की जान जोखिम में डालने का आरोप लगाया। कहा कि प्रशासन पिछली बरसात के बाद पूरे एक साल तक सोया रहा। बरसात आते ही आनन फानन में नदियों में मलबा हटाने का कार्य किया जा रहा है। कई स्थानों में तो अभी तक कुछ भी कार्य नहीं हुआ है। पिछली बरसात में नदियों और गदेरों ने अपना कहर बरपाया था, लेकिन प्रशासन ने उससे सबक नहीं लिया। इसके कारण लोग फिर से बाढ़ के कहर से डरे हुए हैं। उधर, एसडीएम मनीष कुमार सिंह ने बताया कि आपदा सुरक्षा के कार्य युद्ध स्तर पर किए जा रहे हैं। इसके लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

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