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बेस अस्पताल में एक महीने से एंटी रैबिज इंजेक्शन नहीं
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कोटद्वार। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र की जनता को भुगतना पड़ रहा है। बेस अस्पताल में गत एक माह से एंटी रैबीज के इंजेक्शन का स्टॉक समाप्त गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। इससे स्वास्थ्य विभाग के प्रति लोगों में आक्रोश बना हुआ है।
कोटद्वार बेस अस्पताल पौड़ी जिले के करीब 10 ब्लॉकों की 80 फीसदी आबादी के साथ ही नगर की सीमा से सटे यूपी के जिला बिजनौर के कई गांवों को भी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराता है। बेस अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोग उपचार कराने के लिए पहुंचते हैं, जिसमें से 10 से 15 मरीज प्रतिदिन बंदर और कुत्ते के काटने के पहुंच रहे हैं, लेकिन लोगों को अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। गत 15 मई को अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन का स्टॉक खत्म हो गया था। तब से आज तक अस्पताल में करीब 600 मरीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच चुके हैं। इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने के कारण लोग बाजार से 335 रुपये में एंटी रैबीज इंजेक्शन खरीदने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी रमेश कुमार, राजन, कमलेश्वरी देवी, राजमति देवी, राकेश कुमार व राजेश बड़थ्वाल ने स्वास्थ्य विभाग पर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बंदरों और लावारिस कुत्तों की दहशत है। बंदर लोगों के घरों के अंदर घुसकर दहशत मचा रहे हैं। उन्हें भगाने का प्रयास करने पर वे लोगों को काट रहे हैं। सड़कों पर लावारिस कुत्ते राह चलते लोगों को काट रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग भी रैबीज को लेकर गंभीर नहीं है। अस्पताल में रैबीज का इंजेेक्शन नहीं मिलने के कारण उन्हें मेडिकल स्टोर से अधिक दामों में इंजेक्शन खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
गत 15 मई को एंटी रैबीज इंजेक्शन का स्टॉक खत्म हो गया था। स्वास्थ्य निदेशालय के साथ ही संबंधित दवा एजेंसी को डिमांड भेजी गई है, लेकिन मार्केट में उपलब्धता नहीं होने के कारण एंटी रैबीज इंजेक्शन की सप्लाई नहीं हो पा रही है। देश की तीन कंपनियां ही रैबीज के इंजेक्शन बनाती हैं, जिसमें से दो को सरकार की ओर से बैन किया गया है। इंजेक्शन प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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-डा. आरएस चौहान, सीएमएस बेस चिकित्सालय कोटद्वार
फोटो
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कोटद्वार बेस अस्पताल पौड़ी जिले के करीब 10 ब्लॉकों की 80 फीसदी आबादी के साथ ही नगर की सीमा से सटे यूपी के जिला बिजनौर के कई गांवों को भी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराता है। बेस अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोग उपचार कराने के लिए पहुंचते हैं, जिसमें से 10 से 15 मरीज प्रतिदिन बंदर और कुत्ते के काटने के पहुंच रहे हैं, लेकिन लोगों को अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। गत 15 मई को अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन का स्टॉक खत्म हो गया था। तब से आज तक अस्पताल में करीब 600 मरीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच चुके हैं। इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने के कारण लोग बाजार से 335 रुपये में एंटी रैबीज इंजेक्शन खरीदने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी रमेश कुमार, राजन, कमलेश्वरी देवी, राजमति देवी, राकेश कुमार व राजेश बड़थ्वाल ने स्वास्थ्य विभाग पर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बंदरों और लावारिस कुत्तों की दहशत है। बंदर लोगों के घरों के अंदर घुसकर दहशत मचा रहे हैं। उन्हें भगाने का प्रयास करने पर वे लोगों को काट रहे हैं। सड़कों पर लावारिस कुत्ते राह चलते लोगों को काट रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग भी रैबीज को लेकर गंभीर नहीं है। अस्पताल में रैबीज का इंजेेक्शन नहीं मिलने के कारण उन्हें मेडिकल स्टोर से अधिक दामों में इंजेक्शन खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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गत 15 मई को एंटी रैबीज इंजेक्शन का स्टॉक खत्म हो गया था। स्वास्थ्य निदेशालय के साथ ही संबंधित दवा एजेंसी को डिमांड भेजी गई है, लेकिन मार्केट में उपलब्धता नहीं होने के कारण एंटी रैबीज इंजेक्शन की सप्लाई नहीं हो पा रही है। देश की तीन कंपनियां ही रैबीज के इंजेक्शन बनाती हैं, जिसमें से दो को सरकार की ओर से बैन किया गया है। इंजेक्शन प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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-डा. आरएस चौहान, सीएमएस बेस चिकित्सालय कोटद्वार
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