{"_id":"5b44e4b84f1c1b92468b5a9f","slug":"151531241656-kotdwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यमकेश्वर ब्लाक के ग्रामीणों को चार साल से पुल का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यमकेश्वर ब्लाक के ग्रामीणों को चार साल से पुल का इंतजार
Updated Tue, 10 Jul 2018 10:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोटद्वार। यमकेश्वर ब्लाक के लोगों को पिछले चार वर्षों से पुल के पुनर्निर्माण का इंतजार है। चार साल पहले आयी भीषण आपदा से ग्राम पंचायत सीला में वन विभाग द्वारा निर्मित 50 साल पुराना मोटर वाहन पुल भी बह गया था, लेकिन अभी तक पुल का निर्माण नहीं किया गया है। ऐसे में 12 गांव के लोग जान-जोखिम में डालकर सतेड़ी नदी पार कर रहे हैं।
अगस्त 2014 को क्षेत्र में आई भीषण बारिश में सतेड़ी नदी के उफान के चलते सीला गांव के पास का पुल बह गया था, जिससे सीला, काटल, हरसूली, तिमल्याणी, कचुंडा, कांडई और किमसार से लगे करीब छह गांव का रास्ता ठप हो गया। चार वर्ष बाद भी वन विभाग और प्रशासन की ओर से पुल के निर्माण में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। पुल नहीं होने का सबसे ज्यादा खामियाजा स्कूली बच्चों को उठाना पड़ता है। जून-जुलाई में नदी का पानी बढ़ने पर बच्चों को नदी पार करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
सामाजिक कार्यकर्ता सीला महाबीर सिंह, आशीष रतूड़ी ने कहा कि कई बार क्षेत्र पंचायत की बैठक में पुल का मुद्दा उठाया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी है। लैंसडौन वन प्रभाग की लालढांग रेंज अधिकारी विरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि बजट के अभाव में सीला पुल का निर्माण नहीं हो पा रहा है। पुल के लिए 72 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बजट आते ही पुल का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
अगस्त 2014 को क्षेत्र में आई भीषण बारिश में सतेड़ी नदी के उफान के चलते सीला गांव के पास का पुल बह गया था, जिससे सीला, काटल, हरसूली, तिमल्याणी, कचुंडा, कांडई और किमसार से लगे करीब छह गांव का रास्ता ठप हो गया। चार वर्ष बाद भी वन विभाग और प्रशासन की ओर से पुल के निर्माण में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। पुल नहीं होने का सबसे ज्यादा खामियाजा स्कूली बच्चों को उठाना पड़ता है। जून-जुलाई में नदी का पानी बढ़ने पर बच्चों को नदी पार करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
सामाजिक कार्यकर्ता सीला महाबीर सिंह, आशीष रतूड़ी ने कहा कि कई बार क्षेत्र पंचायत की बैठक में पुल का मुद्दा उठाया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी है। लैंसडौन वन प्रभाग की लालढांग रेंज अधिकारी विरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि बजट के अभाव में सीला पुल का निर्माण नहीं हो पा रहा है। पुल के लिए 72 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बजट आते ही पुल का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
विज्ञापन