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नगर निगम पर डबल बेंच के फैसले को दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
Updated Wed, 13 Jun 2018 10:52 PM IST
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कोटद्वार। नगर निगम की सीमा विस्तार करने वाली अधिसूचना को बहाल करने संबंधी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ ग्राम प्रधान संगठन ने अब सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी है। प्रधान संघ दुगड्डा के अध्यक्ष और भाबर के मवाकोट के प्रधान ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को स्वीकार कर लिया है।
कोटद्वार भाबर की 35 ग्राम पंचायतों के 73 राजस्व गांवों को नगर निगम में शामिल किए जाने के विरोध का मसला हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। प्रधान संघ दुगड्डा के अध्यक्ष सुरेश रावत और चंद्रप्रकाश नैथानी ने बताया कि कोटद्वार भाबर के गांव प्रारंभ से ही नगर निगम में शामिल करने का विरोध कर रहे हैं। नगर पालिका के सीमा के विस्तार के बाद उत्तराखंड सरकार ने नगर निगम की अधिसूचना भी जारी कर दी थी। इसमें आठ मार्च और 14 मई को नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अधिसूचना को निरस्त कर दिया था। सरकार ने मामले को डबल बेंच में रखा, जहां कोर्ट का फैसला सरकार के पक्ष में आया और नगर निगम की अधिसूचना बहाल हो गई। इसके खिलाफ ग्राम प्रधान संगठन ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रधान संघ की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इससे नगर निगम विरोधी ग्रामीण जनता और जनप्रतिनिधियों को उनकी भावनाओं के विपरीत नगर निगम में शामिल करने के मामले में न्याय की उम्मीद बंध गई है।
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कोटद्वार भाबर की 35 ग्राम पंचायतों के 73 राजस्व गांवों को नगर निगम में शामिल किए जाने के विरोध का मसला हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। प्रधान संघ दुगड्डा के अध्यक्ष सुरेश रावत और चंद्रप्रकाश नैथानी ने बताया कि कोटद्वार भाबर के गांव प्रारंभ से ही नगर निगम में शामिल करने का विरोध कर रहे हैं। नगर पालिका के सीमा के विस्तार के बाद उत्तराखंड सरकार ने नगर निगम की अधिसूचना भी जारी कर दी थी। इसमें आठ मार्च और 14 मई को नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अधिसूचना को निरस्त कर दिया था। सरकार ने मामले को डबल बेंच में रखा, जहां कोर्ट का फैसला सरकार के पक्ष में आया और नगर निगम की अधिसूचना बहाल हो गई। इसके खिलाफ ग्राम प्रधान संगठन ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रधान संघ की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इससे नगर निगम विरोधी ग्रामीण जनता और जनप्रतिनिधियों को उनकी भावनाओं के विपरीत नगर निगम में शामिल करने के मामले में न्याय की उम्मीद बंध गई है।
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