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सतर्क रहें: हाथी कोरिडोर क्षेत्र में मौज मस्ती न पड़ जाए मंहगी
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कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग के जंगल में घुसना और हाथी कॉरिडोर में नदी में नहाना खतरे से खाली नहीं है। राजाजी और कार्बेट नेशनल पार्क के एलीफेंट कॉरिडोर में इन दिनों हाथियों की हलचल बढ़ गई है। वन विभाग ने हाथी-मानव संघर्ष को देखते हुए लोगों को हाथी बाहुल्य क्षेत्र में नहीं जाने की चेतावनी दी है।
गर्मी के चलते जंगल के प्राकृतिक स्रोत सूखने के कारण राजाजी नेशनल पार्क, कार्बेट नेशनल पार्क और लैंसडौन वन प्रभाग के हाथी इन दिनों कोटद्वार-दुगड्डा मार्ग के करीब के जंगल में सक्रिय हैं। वे पानी के लिए नजदीक खोह नदी में पहुंच रहे हैं। लोग चारा पत्ती और जलावनी लकड़ी के लिए जान जोखिम में डालकर जंगल में घुस रहे हैं, वहीं खतरे से अनजान पर्यटक हाथी कॉरिडोर के अंतर्गत खोह नदी में पिकनिक मना रहे हैं। इन दिनों इन खतरों के स्थानों पर रहना जान की बाजी लगाने जैसा है।
हथिनी कर सकती है हमला
सेवानिवृत रेंज अधिकारी एसपी कंडवाल का कहना है कि इन दिनों नदी के नजदीक जंगल में 12-14 हाथियों का झुंड सक्रिय रहता है। झुंड में हाथी के बच्चे भी होते हैं। ऐसे में मानव को करीब देेख बच्चों की सुरक्षा के लिए हथिनी अक्सर हमले के मूड में रहती है।
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आरक्षित वन क्षेत्र में दुर्घटना होने पर नहीं मिलता मुआवजा
शासनादेश के अनुसार राजाजी नेशनल पार्क, कार्बेट नेशनल पार्क और वन प्रभागों के आरक्षित वन क्षेत्र में जंगली जीव-मानव संघर्ष में मारे गए व्यक्ति के आश्रितों को किसी प्रकार का मुुआवजा नहीं मिलता है, जबकि आबादी क्षेत्र में जंगली जानवर द्वारा मारे जाने पर मृतक के परिजनों को तीन लाख रुपये तक का मुआवजा मिलता है।
गत वर्ष से अब तक के हाथी के हमले
- 06 जून 2018 को नाथूखाल निवासी भोपाल सिंह भंडारी को लालढांग के मैदान चौकी के पास हाथी ने कुचला।
- 22 जनवरी 2018 को कादरगंज निवासी अंजलि केष्टवाल को जंगल के समीप हाथी ने मार डाला
- 04 अगस्त 2018 को मथाणा गांव निवासी अमर सिंह रावत को हाथी ने घायल किया।
- 09 फरवरी 2019 को घाड़ क्षेत्र के धूराताल गांव में हाथी के हमले में मंगल सिंह गंभीर घायल।
कहते हैं अधिकारी
आरक्षित जंगल के अंदर जाना खतरे से खाली नहीं है। लोगों को चेताने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर खतरे के सूूचना बोर्ड लगाए गए हैं। हाथी के खतरे को देखते हुए वन कर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
- वैभव कुमार सिंह, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग
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गर्मी के चलते जंगल के प्राकृतिक स्रोत सूखने के कारण राजाजी नेशनल पार्क, कार्बेट नेशनल पार्क और लैंसडौन वन प्रभाग के हाथी इन दिनों कोटद्वार-दुगड्डा मार्ग के करीब के जंगल में सक्रिय हैं। वे पानी के लिए नजदीक खोह नदी में पहुंच रहे हैं। लोग चारा पत्ती और जलावनी लकड़ी के लिए जान जोखिम में डालकर जंगल में घुस रहे हैं, वहीं खतरे से अनजान पर्यटक हाथी कॉरिडोर के अंतर्गत खोह नदी में पिकनिक मना रहे हैं। इन दिनों इन खतरों के स्थानों पर रहना जान की बाजी लगाने जैसा है।
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हथिनी कर सकती है हमला
सेवानिवृत रेंज अधिकारी एसपी कंडवाल का कहना है कि इन दिनों नदी के नजदीक जंगल में 12-14 हाथियों का झुंड सक्रिय रहता है। झुंड में हाथी के बच्चे भी होते हैं। ऐसे में मानव को करीब देेख बच्चों की सुरक्षा के लिए हथिनी अक्सर हमले के मूड में रहती है।
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आरक्षित वन क्षेत्र में दुर्घटना होने पर नहीं मिलता मुआवजा
शासनादेश के अनुसार राजाजी नेशनल पार्क, कार्बेट नेशनल पार्क और वन प्रभागों के आरक्षित वन क्षेत्र में जंगली जीव-मानव संघर्ष में मारे गए व्यक्ति के आश्रितों को किसी प्रकार का मुुआवजा नहीं मिलता है, जबकि आबादी क्षेत्र में जंगली जानवर द्वारा मारे जाने पर मृतक के परिजनों को तीन लाख रुपये तक का मुआवजा मिलता है।
गत वर्ष से अब तक के हाथी के हमले
- 06 जून 2018 को नाथूखाल निवासी भोपाल सिंह भंडारी को लालढांग के मैदान चौकी के पास हाथी ने कुचला।
- 22 जनवरी 2018 को कादरगंज निवासी अंजलि केष्टवाल को जंगल के समीप हाथी ने मार डाला
- 04 अगस्त 2018 को मथाणा गांव निवासी अमर सिंह रावत को हाथी ने घायल किया।
- 09 फरवरी 2019 को घाड़ क्षेत्र के धूराताल गांव में हाथी के हमले में मंगल सिंह गंभीर घायल।
कहते हैं अधिकारी
आरक्षित जंगल के अंदर जाना खतरे से खाली नहीं है। लोगों को चेताने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर खतरे के सूूचना बोर्ड लगाए गए हैं। हाथी के खतरे को देखते हुए वन कर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
- वैभव कुमार सिंह, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग