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..तो कल से ठप हो जाएंगे कोटद्वार के 46 प्राइवेट क्नीनिक और पैथोलॉजी सेंटर
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कोटद्वार। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) के स्थान पर उत्तराखंड हेल्थकेयर एक्ट लागू कराने की मांग को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की अगुवाई में मंगलवार सुबह से कोटद्वार के 46 प्राइवेट क्लीनिक और 15 पैथोलॉजी लैब संचालक अपने संस्थानों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर देंगे। आईएमए की कोटद्वार शाखा ने इसकी घोषणा कर दी है। इसके लिए डाक्टरों ने अपने संस्थानों में मरीजों की सूचना के लिए पोस्टर चस्पा कर दिए हैं।
कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में 25 एलोपैथिक, 15 आयुर्वेदिक, 03 होम्योपैथिक क्नीनिक/अस्पताल के अलावा करीब 15 पैथोलॉजी सेंटर मौजूद हैं। आईएमए कोटद्वार के सदस्य डा. राजकुमार बिज ने बताया कि सरकार द्वारा जबरन थोपा जा रहा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट अव्यवहारिक और अत्यंत महंगा है, जिसके कारण प्राइवेट क्लीनिक इस कानून के तहत अपना पंजीकरण कराने में असमर्थ हैं। सरकारी आदेश के अनुसार अपंजीकृत अस्पतालों को सील करने की कार्रवाई की जानी है, इसलिए सीलिंग से बचने के लिए उन्हें अपने क्लीनिकों को स्वयं ही बंद करना पड़ रहा है।
बताया कि आंदोलन के तहत पहले चरण में 22 दिसंबर को सभी डाक्टरों ने हाथ पर काले फीते बांध कर इस कानून का विरोध जताया था। 23 दिसंबर को शाम की ओपीडी बंद रखी गई। 24 दिसंबर को भी शाम की ओपीडी बंद रखी जाएगी साथ ही इसी दिन क्नीनिकों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों को छुट्टी दे दी जाएगी और 25 दिसंबर से प्राइवेट क्लीनिकों और अस्पतालों को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया जाएगा। जिसके चलते अब प्राइवेट क्लीनिकों में इलाज कराने वाले मरीजों को अब सरकारी अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ेगा। कोटद्वार बेस अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा होने की संभावना है।
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उधर, राजकीय बेस अस्पताल के सीएमएस डा. आईएस सामंत ने बताया कि प्राइवेट क्नीनिकों और अस्पतालों के बंद होने के बाद अस्पताल में मरीजों के संख्या बढ़ने पर अस्पताल में व्यवस्थाएं बढ़ाई जाएंगी।
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कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में 25 एलोपैथिक, 15 आयुर्वेदिक, 03 होम्योपैथिक क्नीनिक/अस्पताल के अलावा करीब 15 पैथोलॉजी सेंटर मौजूद हैं। आईएमए कोटद्वार के सदस्य डा. राजकुमार बिज ने बताया कि सरकार द्वारा जबरन थोपा जा रहा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट अव्यवहारिक और अत्यंत महंगा है, जिसके कारण प्राइवेट क्लीनिक इस कानून के तहत अपना पंजीकरण कराने में असमर्थ हैं। सरकारी आदेश के अनुसार अपंजीकृत अस्पतालों को सील करने की कार्रवाई की जानी है, इसलिए सीलिंग से बचने के लिए उन्हें अपने क्लीनिकों को स्वयं ही बंद करना पड़ रहा है।
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बताया कि आंदोलन के तहत पहले चरण में 22 दिसंबर को सभी डाक्टरों ने हाथ पर काले फीते बांध कर इस कानून का विरोध जताया था। 23 दिसंबर को शाम की ओपीडी बंद रखी गई। 24 दिसंबर को भी शाम की ओपीडी बंद रखी जाएगी साथ ही इसी दिन क्नीनिकों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों को छुट्टी दे दी जाएगी और 25 दिसंबर से प्राइवेट क्लीनिकों और अस्पतालों को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया जाएगा। जिसके चलते अब प्राइवेट क्लीनिकों में इलाज कराने वाले मरीजों को अब सरकारी अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ेगा। कोटद्वार बेस अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा होने की संभावना है।
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उधर, राजकीय बेस अस्पताल के सीएमएस डा. आईएस सामंत ने बताया कि प्राइवेट क्नीनिकों और अस्पतालों के बंद होने के बाद अस्पताल में मरीजों के संख्या बढ़ने पर अस्पताल में व्यवस्थाएं बढ़ाई जाएंगी।