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चिलरखाल-लालढांग मार्ग तीन माह से ठप, लोग परेशान
Updated Thu, 04 Oct 2018 10:41 PM IST
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चंद्रमोहन शुक्ला
कोटद्वार। भाबर की लाइफ लाइन चिलरखाल-लालढांग मोटर मार्ग तीन माह से ठप पड़ी है। बरसात से उफनाए नदी नालों ने सड़क की सूरत बिगाड़ कर रख दी है। लोगों को यूपी होते हुए अधिक पैसा और समय खर्च कर लालढांग, हरिद्वार और देहरादून के लिए आवाजाही करनी पड़ रही है। सड़क क्षतिग्र्रस्त होने से कोटद्वार भाबर का लालढांग और समीपवर्ती गांवों का तीन माह से संपर्क कटा हुआ है।
चिलरखाल-लालढांग मोटर मार्ग कोटद्वार और भाबर क्षेत्र के लोगों के लिए राज्य के भीतर से लालढांग, हरिद्वार और देहरादून जाने का सुगम मार्ग है। सड़क को कोटद्वार भाबर की लाइफ लाइन भी कहा जाता है। करीब साढ़े 11 किमी का यह पैच लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। हर साल मानसून में सड़क सिगड्डी स्रोत, मेहली स्रोत, चमरिया स्रोत में क्षतिग्रस्त हो जाती है, जिसे हल्की मरम्मत के बाद गत वर्षों तक सितंबर प्रथम सप्ताह में वाहनों के लिए खोल दिया जाता था, लेकिन इस बार सड़क को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंची हैं। सिगड्डी स्रोत से लेकर मेहली और चमरिया स्रोत तक बने रपटे बरसाती नदी में तब्दील हो गए हैं। तीन माह से बंद पड़ी सड़क से कोटद्वार भाबर के दर्जनों गांव के लोग लालढांग, चमरिया, रसूलपुर समेत हरिद्वार के गांवों के लिए आवाजाही करते हैं। लालढांग से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कोटद्वार और भाबर के स्कूल कालेजों में पढ़ने के लिए आते हैं। काश्तकारों का लालढांग और चमरियां गांवों में रोजमर्रा के काम पड़ते हैं। जीएमओयू के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल ने सड़क की मरम्मत कर बसों का संचालन शुरू कराने के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत को पत्र भेजा है।
श्रेय की राजनीति में फंस गई भाबर की लाइफ लाइन
मार्ग को पक्का करने के लिए अब तक की सभी सरकारें कई शासनादेश निकाल चुकी हैं, लेकिन सड़क श्रेय की राजनीति में फंसकर रह गई है। दिसंबर 2014 में सड़क को डामरीकरण करने और साढ़े चार किमी लंबाई का फ्लाईओवर निर्माण के लिए शासनादेश हो चुका है, लेकिन यह शासनादेश इसके डीपीआर तैयार करने और वन भूमि हस्तांतरण के पेच में फंसा पड़ा है। इसके बाद सड़क को आरबीआई-81 से बनाने के लिए सात करोड़ रुपये मंजूर किए गए, लेकिन यह शासनादेेश भी धरातल पर नहीं उतरा। सरकार बदली तो वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने सड़क को डामरीकृत करने के लिए नया शासनादेश जारी करवाया है। सड़क का स्वामित्व तो वन विभाग का ही रहेगा, लेकिन सड़क का निर्माण लोनिवि दुगड्डा करवाएगा। सड़क मरम्मत के लिए टेंडर आमंत्रित हो गए हैं। सड़क पर पुलों और रपटों का निर्माण जल्द शुरू होने की संभावना है।
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इस बार बरसात से सड़क को काफी नुकसान हुआ है। सड़क को फौरी रूप से खोलने के लिए आगणन तैयार कर शासन को भिजवाया जा रहा है। -वैभव कुमार सिंह, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग कोटद्वार।
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कोटद्वार। भाबर की लाइफ लाइन चिलरखाल-लालढांग मोटर मार्ग तीन माह से ठप पड़ी है। बरसात से उफनाए नदी नालों ने सड़क की सूरत बिगाड़ कर रख दी है। लोगों को यूपी होते हुए अधिक पैसा और समय खर्च कर लालढांग, हरिद्वार और देहरादून के लिए आवाजाही करनी पड़ रही है। सड़क क्षतिग्र्रस्त होने से कोटद्वार भाबर का लालढांग और समीपवर्ती गांवों का तीन माह से संपर्क कटा हुआ है।
चिलरखाल-लालढांग मोटर मार्ग कोटद्वार और भाबर क्षेत्र के लोगों के लिए राज्य के भीतर से लालढांग, हरिद्वार और देहरादून जाने का सुगम मार्ग है। सड़क को कोटद्वार भाबर की लाइफ लाइन भी कहा जाता है। करीब साढ़े 11 किमी का यह पैच लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। हर साल मानसून में सड़क सिगड्डी स्रोत, मेहली स्रोत, चमरिया स्रोत में क्षतिग्रस्त हो जाती है, जिसे हल्की मरम्मत के बाद गत वर्षों तक सितंबर प्रथम सप्ताह में वाहनों के लिए खोल दिया जाता था, लेकिन इस बार सड़क को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंची हैं। सिगड्डी स्रोत से लेकर मेहली और चमरिया स्रोत तक बने रपटे बरसाती नदी में तब्दील हो गए हैं। तीन माह से बंद पड़ी सड़क से कोटद्वार भाबर के दर्जनों गांव के लोग लालढांग, चमरिया, रसूलपुर समेत हरिद्वार के गांवों के लिए आवाजाही करते हैं। लालढांग से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कोटद्वार और भाबर के स्कूल कालेजों में पढ़ने के लिए आते हैं। काश्तकारों का लालढांग और चमरियां गांवों में रोजमर्रा के काम पड़ते हैं। जीएमओयू के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल ने सड़क की मरम्मत कर बसों का संचालन शुरू कराने के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत को पत्र भेजा है।
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श्रेय की राजनीति में फंस गई भाबर की लाइफ लाइन
मार्ग को पक्का करने के लिए अब तक की सभी सरकारें कई शासनादेश निकाल चुकी हैं, लेकिन सड़क श्रेय की राजनीति में फंसकर रह गई है। दिसंबर 2014 में सड़क को डामरीकरण करने और साढ़े चार किमी लंबाई का फ्लाईओवर निर्माण के लिए शासनादेश हो चुका है, लेकिन यह शासनादेश इसके डीपीआर तैयार करने और वन भूमि हस्तांतरण के पेच में फंसा पड़ा है। इसके बाद सड़क को आरबीआई-81 से बनाने के लिए सात करोड़ रुपये मंजूर किए गए, लेकिन यह शासनादेेश भी धरातल पर नहीं उतरा। सरकार बदली तो वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने सड़क को डामरीकृत करने के लिए नया शासनादेश जारी करवाया है। सड़क का स्वामित्व तो वन विभाग का ही रहेगा, लेकिन सड़क का निर्माण लोनिवि दुगड्डा करवाएगा। सड़क मरम्मत के लिए टेंडर आमंत्रित हो गए हैं। सड़क पर पुलों और रपटों का निर्माण जल्द शुरू होने की संभावना है।
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इस बार बरसात से सड़क को काफी नुकसान हुआ है। सड़क को फौरी रूप से खोलने के लिए आगणन तैयार कर शासन को भिजवाया जा रहा है। -वैभव कुमार सिंह, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग कोटद्वार।