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कोटद्वार चील्ड प्लांट हरिद्वार दुग्ध संघ के हवाले, फायदे का सौदा
Updated Fri, 05 Jan 2018 10:57 PM IST
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कोटद्वार। कोटद्वार का दुग्ध अवशीतन केंद्र (मिल्क चील्ड प्लांट) हरिद्वार सहकारी दुग्ध संघ के हवाले कर दिया गया है। लगातार कुप्रबंधन और घाटे में चल रहे गढ़वाल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ श्रीनगर से कोटद्वार की दूध डेयरी को निजात मिल गई है। अब जहां एक ओर कर्मचारियों को समय से वेतन मिलने लगा है, वहीं पशुपालकों को उनके दूध का भुगतान भी एक सप्ताह में होने लगा है। हरिद्वार से पशुओं के लिए पशु आहार भी उपलब्ध हो रहा है। कुल मिलाकर गढ़वाल दुग्ध संघ से छुटकारा मिलने से यहां तैनात कर्मचारी ही नहीं बल्कि पशुपालकों के भी चेहरे खिल उठे हैं। हरिद्वार दुग्ध संघ में जाते ही दुग्ध प्लांट में दूध की गुणवत्ता अच्छी होने के साथ ही इसकी बिक्री भी बढ़ गई है।
श्रीनगर गढ़वाल स्थित दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अधीन चल रहे कोटद्वार के दुग्ध अवशीतन केंद्र को शासन के निर्देश पर गत नौ दिसंबर से हरिद्वार दुग्ध संघ के हवाले कर दिया गया है। गढ़वाल दुग्ध संघ में रहते हुए जहां इस केंद्र में कार्यरत कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं मिल पा रहा था, वहीं पशुपालकों को अपने दूध के भुगतान के लिए चक्कर काटने पड़ रहे थे। बमुश्किल एक महीने में उन्हें दूध का भुगतान मिल रहा था। लेकिन अब कोटद्वार दुग्ध अवशीतन केंद्र के अच्छे दिन आ गए हैं। अब तक यहां केवल 900 से 1000 लीटर दूध की खपत हो रही थी, हरिद्वार के अधीन होते ही यहां दूध की खपत बढ़कर 2200 लीटर तक पहुंच गई है। पशुपालकों को समय से भुगतान होने लगा है। कोटद्वार डेयरी में ही 600 लीटर दूध बिक रहा है, जबकि 1600 लीटर दूध हरिद्वार भेजा जा रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
करीब पांच हजार लीटर दूध की क्षमता वाले पैकेजिंग प्लांट के लिए कोटद्वार के खूनीबड़ में शासन की ओर से पूर्व में भूमि आवंटित हो चुकी है। प्लांट की स्थापना के लिए शासनस्तर से धनावंटन का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल इस केंद्र को सुचारु ढंग से चलाने के लिए हरिद्वार दुग्ध संघ के अधीन संचालित किया जा रहा है।
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-रूपेश कुमार, प्रभारी दुग्ध अवशीतन केंद्र कोटद्वार
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श्रीनगर गढ़वाल स्थित दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अधीन चल रहे कोटद्वार के दुग्ध अवशीतन केंद्र को शासन के निर्देश पर गत नौ दिसंबर से हरिद्वार दुग्ध संघ के हवाले कर दिया गया है। गढ़वाल दुग्ध संघ में रहते हुए जहां इस केंद्र में कार्यरत कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं मिल पा रहा था, वहीं पशुपालकों को अपने दूध के भुगतान के लिए चक्कर काटने पड़ रहे थे। बमुश्किल एक महीने में उन्हें दूध का भुगतान मिल रहा था। लेकिन अब कोटद्वार दुग्ध अवशीतन केंद्र के अच्छे दिन आ गए हैं। अब तक यहां केवल 900 से 1000 लीटर दूध की खपत हो रही थी, हरिद्वार के अधीन होते ही यहां दूध की खपत बढ़कर 2200 लीटर तक पहुंच गई है। पशुपालकों को समय से भुगतान होने लगा है। कोटद्वार डेयरी में ही 600 लीटर दूध बिक रहा है, जबकि 1600 लीटर दूध हरिद्वार भेजा जा रहा है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
करीब पांच हजार लीटर दूध की क्षमता वाले पैकेजिंग प्लांट के लिए कोटद्वार के खूनीबड़ में शासन की ओर से पूर्व में भूमि आवंटित हो चुकी है। प्लांट की स्थापना के लिए शासनस्तर से धनावंटन का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल इस केंद्र को सुचारु ढंग से चलाने के लिए हरिद्वार दुग्ध संघ के अधीन संचालित किया जा रहा है।
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-रूपेश कुमार, प्रभारी दुग्ध अवशीतन केंद्र कोटद्वार