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हाईकोर्ट में भी लड़ी जाएगी नगर निगम के विरोध की लड़ाई
Updated Mon, 18 Dec 2017 10:37 PM IST
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कोटद्वार। जनसुनवाई के बिना ही कोटद्वार नगर निगम का गठन करने के विरोध में संघर्ष समिति और यूकेडी के कार्यकर्ताओं का धरना प्रदर्शन सातवें दिन सोमवार को भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले को जनभावनाओं के खिलाफ बताया।
देवीमंदिर स्थित सुखरौ पटवारी चौकी में धरना-प्रदर्शन के दौरान संघर्ष समिति ने कहा कि कोटद्वार भाबर के ग्रामीणों में नगर निगम के गठन को लेकर भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि वे नगर निगम के विरोध में अब हाईकोर्ट की शरण लेंगे।
कोटद्वार भाबर की 35 ग्राम पंचायतों के 73 गांवों को कोटद्वार नगर निगम में शामिल किया गया है। इसके विरोध में संघर्ष समिति और यूकेडी ने सोमवार को भी कोटद्वार भाबर की चारों पटवारी चौकियों सनेह, सुखरौ, मोटाढांक पदमपुर और हल्दूखाता में प्रदर्शन किया। कहा कि जब तक सरकार नगर निगम के शासनादेश को वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसके लिए हाईकोर्ट के अधिवक्ता रमन शाह के साथ भी रणनीति तैयार की गई।
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समिति के अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण ने कहा जल्द ही भाबर के ग्रामीण नगर निगम बनाने के पीछे की साजिश समझ जाएंगे। कहा कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े ठेकेदार, भूमाफिया, प्रापर्टी डीलरों की मनमानी भाबर में नहीं चलने दी जाएगी। समिति भाबर के गांवों के अभिलेख जुटा रही है, जल्द ही इसके विरोध में नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा रही है।
धरना-प्रदर्शन में प्रवेंद्र सिंह रावत, हरीश घिल्डियाल, कांती सिंह, चंद्रप्रकाश नैथानी, विजय नैथानी, गोविंद डंडरियाल, राजाराम अंथवाल, प्रदीप नेगी, प्रवेश नवानी, महानंद ध्यानी, कोमल सजवाण, अंजू पुंडीर, गजेंद्र तिवारी, चंद्रमोहन सिंह नेगी, मदनमोहन रावत, बलबीर सिंह, चिंरजीवी घिल्डियाल और विजय ध्यानी आदि मौजूद थे।
देवीमंदिर स्थित सुखरौ पटवारी चौकी में धरना-प्रदर्शन के दौरान संघर्ष समिति ने कहा कि कोटद्वार भाबर के ग्रामीणों में नगर निगम के गठन को लेकर भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि वे नगर निगम के विरोध में अब हाईकोर्ट की शरण लेंगे।
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कोटद्वार भाबर की 35 ग्राम पंचायतों के 73 गांवों को कोटद्वार नगर निगम में शामिल किया गया है। इसके विरोध में संघर्ष समिति और यूकेडी ने सोमवार को भी कोटद्वार भाबर की चारों पटवारी चौकियों सनेह, सुखरौ, मोटाढांक पदमपुर और हल्दूखाता में प्रदर्शन किया। कहा कि जब तक सरकार नगर निगम के शासनादेश को वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसके लिए हाईकोर्ट के अधिवक्ता रमन शाह के साथ भी रणनीति तैयार की गई।
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समिति के अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण ने कहा जल्द ही भाबर के ग्रामीण नगर निगम बनाने के पीछे की साजिश समझ जाएंगे। कहा कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े ठेकेदार, भूमाफिया, प्रापर्टी डीलरों की मनमानी भाबर में नहीं चलने दी जाएगी। समिति भाबर के गांवों के अभिलेख जुटा रही है, जल्द ही इसके विरोध में नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा रही है।
धरना-प्रदर्शन में प्रवेंद्र सिंह रावत, हरीश घिल्डियाल, कांती सिंह, चंद्रप्रकाश नैथानी, विजय नैथानी, गोविंद डंडरियाल, राजाराम अंथवाल, प्रदीप नेगी, प्रवेश नवानी, महानंद ध्यानी, कोमल सजवाण, अंजू पुंडीर, गजेंद्र तिवारी, चंद्रमोहन सिंह नेगी, मदनमोहन रावत, बलबीर सिंह, चिंरजीवी घिल्डियाल और विजय ध्यानी आदि मौजूद थे।