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नेरूल गांव में संक्रामक रोग से आठ गोवंश की मौत
Updated Tue, 10 Oct 2017 10:23 PM IST
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कोटद्वार। द्वारीखाल विकासखंड के नेरूल गांव में पशुओं में संक्रामक रोग फैलने से आठ गोवंश की मौत हो गई है और दर्जनों पशु बीमार हैं। सूचना मिलने पर पशुपालन विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर पशुओं का उपचार शुरू कर दिया है। स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। संक्रामक रोग फैलने से पशुपालकों में हड़कंप मचा है।
नेरूल की प्रधान अंजू देवी, ग्रामीण दिगंबर लाल, कमलेश्वर प्रसाद जुयाल, राकेश जुयाल, जयदेव प्रसाद और पूर्व प्रधान वासुदेव जुयाल ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर उनके गांव में आठ गोवंश की मौत हो गई। इनमें ज्यादातर दुधारू गायें और बैल शामिल हैं। दर्जनों पशु बीमार हैं। पशुपालकों ने बताया कि पशुओं को पहले बुखार चढ़ रहा है, बाद में उन्हें कंपकंपी छूट रही है और दस से बारह घंटे बाद पशु दम तोड़ दे रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं में बीमारी की खबर की सूचना पहले चैलूसैंण स्थित पशु अस्पताल में दी गई। पहले दिन कोई जवाब नहीं मिला। सोमवार को चैलूसैंण के पशु चिकित्साधिकारी डा. बीएम गुप्ता के निर्देश पर पशुधन प्रसार अधिकारी एसके मैठाणी गांव पहुंचे। टीम ने बीमार पशुओं का उपचार शुरू कर दिया है। मेडिकल टीम ने पशुओं की इस बीमारी को फट्या रोग बताया। इसमें कंपकंपी के साथ बुखार चढ़ता है और समय पर उपचार न मिलने से पशुओं की मौत हो जाती है। पशुपालकों का कहना है कि संक्रामक रोग ने उनकी कमर तोड़ दी है। दुधारू पशुओं के साथ ही उनके बैलों की मौत होने से उनकी आर्थिकी चरमरा गई है। जनप्रतिनिधियों ने बीमारी से मरे पशुओं के स्वामियों को आर्थिक सहायता देने की गुहार सरकार से लगाई है।
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नेरूल की प्रधान अंजू देवी, ग्रामीण दिगंबर लाल, कमलेश्वर प्रसाद जुयाल, राकेश जुयाल, जयदेव प्रसाद और पूर्व प्रधान वासुदेव जुयाल ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर उनके गांव में आठ गोवंश की मौत हो गई। इनमें ज्यादातर दुधारू गायें और बैल शामिल हैं। दर्जनों पशु बीमार हैं। पशुपालकों ने बताया कि पशुओं को पहले बुखार चढ़ रहा है, बाद में उन्हें कंपकंपी छूट रही है और दस से बारह घंटे बाद पशु दम तोड़ दे रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं में बीमारी की खबर की सूचना पहले चैलूसैंण स्थित पशु अस्पताल में दी गई। पहले दिन कोई जवाब नहीं मिला। सोमवार को चैलूसैंण के पशु चिकित्साधिकारी डा. बीएम गुप्ता के निर्देश पर पशुधन प्रसार अधिकारी एसके मैठाणी गांव पहुंचे। टीम ने बीमार पशुओं का उपचार शुरू कर दिया है। मेडिकल टीम ने पशुओं की इस बीमारी को फट्या रोग बताया। इसमें कंपकंपी के साथ बुखार चढ़ता है और समय पर उपचार न मिलने से पशुओं की मौत हो जाती है। पशुपालकों का कहना है कि संक्रामक रोग ने उनकी कमर तोड़ दी है। दुधारू पशुओं के साथ ही उनके बैलों की मौत होने से उनकी आर्थिकी चरमरा गई है। जनप्रतिनिधियों ने बीमारी से मरे पशुओं के स्वामियों को आर्थिक सहायता देने की गुहार सरकार से लगाई है।
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