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बांस की खेती से खुलेगी स्वरोजगार की राह, पलायन रुकेगा
Updated Sun, 23 Sep 2018 10:04 PM IST
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कोटद्वार। हरा सोना कहे जाने वाला बांस अब किसानों की जिंदगी में हरियाली लाने वाला है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत बेरोजगार युवाओं और किसानों को एक हेक्टेयर भूमि में बांस की खेती करने पर 50 हजार रुपये की सब्सिडी मिलेगी। वहीं, छोटे काश्तकारों को एक पौधे पर 120 रुपये की सब्सिडी मिलेगी। किसानों को बांस की पौध उत्तराखंड बांस एवं रेशा परिषद देहरादून की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी।
राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत बांस की खेती से लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मुहैया होगा। इससे रोजगार के लिए गांवों से शहरों की ओर हो रहे पलायन पर भी रोक लगेगी। बांस की खेती ग्रामीण क्षेत्रों के कुशल एवं अकुशल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करेगी। किसान गांव में बंजर पड़ी भूमि पर हरा सोना उगाकर अपना भविष्य संवार सकेंगे। उत्तराखंड बांस एवं रेशा परिषद देहरादून की ओर से नर्सरी और अन्य संबंधित सामग्री के लिए बैंक से लोन दिलाया जाएगा। जिस पर किसानों को 50 प्रतिशत (पचास हजार रुपये) की सब्सिडी मिलेगी। यह सब्सिडी तीन वर्ष में तीन किश्तों में दी जाएगी। वहीं, छोटे काश्तकारों को बांस की खेती करने पर एक पौधे पर 120 रुपये की सब्सिडी मिलेगी। तीन साल बाद बांस तैयार होने पर परिषद देहरादून बांस बेचने का बाजार निर्धारित करेगी।
बांस की खेती पहाड़ से हो रहे पलायन को रोकने, किसानों की आय बढ़ाने और बेरोजगारों के लिए रोजगार देने के लिए लाभकारी साबित होगी। उत्तराखंड बांस एवं रेशा परिषद देहरादून की ओर से बांस की खेती करने वालों की हरसंभव मदद की जाएगी।
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-दिनेश जोशी, प्रोग्राम मैनेजर, उत्तराखंड बांस एवं रेशा परिषद केंद्र देहरादून।
फोटो
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राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत बांस की खेती से लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मुहैया होगा। इससे रोजगार के लिए गांवों से शहरों की ओर हो रहे पलायन पर भी रोक लगेगी। बांस की खेती ग्रामीण क्षेत्रों के कुशल एवं अकुशल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करेगी। किसान गांव में बंजर पड़ी भूमि पर हरा सोना उगाकर अपना भविष्य संवार सकेंगे। उत्तराखंड बांस एवं रेशा परिषद देहरादून की ओर से नर्सरी और अन्य संबंधित सामग्री के लिए बैंक से लोन दिलाया जाएगा। जिस पर किसानों को 50 प्रतिशत (पचास हजार रुपये) की सब्सिडी मिलेगी। यह सब्सिडी तीन वर्ष में तीन किश्तों में दी जाएगी। वहीं, छोटे काश्तकारों को बांस की खेती करने पर एक पौधे पर 120 रुपये की सब्सिडी मिलेगी। तीन साल बाद बांस तैयार होने पर परिषद देहरादून बांस बेचने का बाजार निर्धारित करेगी।
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बांस की खेती पहाड़ से हो रहे पलायन को रोकने, किसानों की आय बढ़ाने और बेरोजगारों के लिए रोजगार देने के लिए लाभकारी साबित होगी। उत्तराखंड बांस एवं रेशा परिषद देहरादून की ओर से बांस की खेती करने वालों की हरसंभव मदद की जाएगी।
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-दिनेश जोशी, प्रोग्राम मैनेजर, उत्तराखंड बांस एवं रेशा परिषद केंद्र देहरादून।
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