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निजी अस्पतालों की हड़ताल, सरकारी में बढ़ी मरीजों की भीड़

Fri, 15 Feb 2019 10:06 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 15 Feb 2019 10:06 PM IST
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निजी अस्पतालों की हड़ताल, सरकारी में बढ़ी मरीजों की भीड़
कोटद्वार। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) के विरोध में शुक्रवार को कोटद्वार समेत जनपद के सभी निजी अस्पताल बंद रहे। अस्पतालों के बंद होने से राजकीय बेस चिकित्सालय कोटद्वार में मरीजों का दबाव बढ़ गया। सरकारी अस्पताल में पंजीकरण कराने के लिए मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं। मरीजों को इमरजेंसी की सेवाएं तक लेनी पड़ीं, लेकिन इमरजेंसी में केवल एक चिकित्सक होने के कारण मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड़ा।
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शुक्रवार को प्राइवेट अस्पतालों की हड़ताल का असर कोटद्वार के बेस चिकित्सालय पर दिखा। प्राइवेट अस्पतालों का दबाव भी सरकारी पर पड़ने से राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार में मरीजों की संख्या दोगुनी बढ़ गई। सरकारी अस्पताल में अधिक भीड़ होने कारण कई मरीज और तीमारदार बिना उपचार कराए बैंरग लौट गए।
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आईएमए कोटद्वार के सदस्य डा. राजकुमार विज ने बताया कि सरकार द्वारा जबरन थोपा जा रहा सीईए अव्यवहारिक और अत्यंत महंगा है। इसके कारण प्राइवेट क्लीनिक इस कानून के तहत अपना पंजीकरण कराने में असमर्थ हैं। एक्ट में अपंजीकृत अस्पतालों को सील करने की व्यवस्था की गई है, जिससे निजी अस्पतालों के संचालकों ने शुक्रवार से ही स्वेच्छा से अपने क्लीनिक और अस्पताल बंद कर दिए हैं। कहा कि उत्तराखंड के डाक्टरों ने सरकार को आईएमए की ओर से सीईए के स्थान पर प्रस्तावित उत्तराखंड हेल्थकेयर एक्ट लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक सीईए में बदलाव नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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