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भाबर में हाथी, पहाड़ में गुलदार और भालू के हमले बने नियति
Updated Mon, 14 May 2018 10:40 PM IST
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कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में वन्यजीवों के हमले झेलना लोगों की नियति बन गया है। कई घटनाओं के बाद भी शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि मनुष्य का वन्यजीवों के साथ संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। मैदानी क्षेत्र में जहां ग्रामीणों को हाथी का उत्पात झेलना पड़ रहा है, वहीं पहाड़ में कहीं गुलदार तो कहीं भालू से संघर्ष हो रहा है।
सोमवार को जयहरीखाल ब्लाक के दिऊसा गांव में घर के पास खेतों में काम कर रही 40 वर्षीय माया देवी पर भालू ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। माया देवी को कोटद्वार से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। डाक्टरों ने माया देवी की हालत को गंभीर बताया है। रिखणीखाल, नैनीडांडा, बीरोंखाल, जयहरीखाल, द्वारीखाल, यमकेश्वर और दुगड्डा विकासखंडों में पिछले तीन सालों में कई ग्रामीण भालू के हमले में घायल हो चुके हैं।
वर्ष 2016 में बीरोंखाल ब्लाक में भालू ने कोलादरिया निवासी कपिल कुमार, रिखणीखाल के सिनाला गांव निवासी सुंदरा देवी पत्नी सुरेंद्र सिंह और दुगड्डा के तच्छाली निवासी बसंती देवी पत्नी जोगेंद्र प्रसाद को बुरी तरह घायल कर दिया था। ये सभी लोग अपने घरों के पास खेतों में काम कर रहे थे। भालू के हमले में घायल होने वालों में सबसे ज्यादा ग्रामीण महिलाएं हैं, जो चारापत्ती और ईंधन के लिए खेतों के आसपास के जंगलों में जाने को मजबूर हैं। राज्य निर्माण आंदोलनकारी सेनानी मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण का कहना है कि राज्य गठन के बाद सरकार की जनता के प्रति बेरुखी के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। उनका कहना है कि वन्यजीवों की संख्या में कई गुना इजाफा, निरंतर हो रहा पलायन इसके प्रमुख कारणों में हैं। पहाड़ के लोगों को सरकार वन्यजीवों के हमलों से नहीं बचा पा रही है।
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सोमवार को जयहरीखाल ब्लाक के दिऊसा गांव में घर के पास खेतों में काम कर रही 40 वर्षीय माया देवी पर भालू ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। माया देवी को कोटद्वार से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। डाक्टरों ने माया देवी की हालत को गंभीर बताया है। रिखणीखाल, नैनीडांडा, बीरोंखाल, जयहरीखाल, द्वारीखाल, यमकेश्वर और दुगड्डा विकासखंडों में पिछले तीन सालों में कई ग्रामीण भालू के हमले में घायल हो चुके हैं।
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वर्ष 2016 में बीरोंखाल ब्लाक में भालू ने कोलादरिया निवासी कपिल कुमार, रिखणीखाल के सिनाला गांव निवासी सुंदरा देवी पत्नी सुरेंद्र सिंह और दुगड्डा के तच्छाली निवासी बसंती देवी पत्नी जोगेंद्र प्रसाद को बुरी तरह घायल कर दिया था। ये सभी लोग अपने घरों के पास खेतों में काम कर रहे थे। भालू के हमले में घायल होने वालों में सबसे ज्यादा ग्रामीण महिलाएं हैं, जो चारापत्ती और ईंधन के लिए खेतों के आसपास के जंगलों में जाने को मजबूर हैं। राज्य निर्माण आंदोलनकारी सेनानी मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण का कहना है कि राज्य गठन के बाद सरकार की जनता के प्रति बेरुखी के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। उनका कहना है कि वन्यजीवों की संख्या में कई गुना इजाफा, निरंतर हो रहा पलायन इसके प्रमुख कारणों में हैं। पहाड़ के लोगों को सरकार वन्यजीवों के हमलों से नहीं बचा पा रही है।
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