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चेक बाउंस की आरोपी महिला को एक वर्ष का सश्रम कारावास, डेढ़ लाख रुपये जुर्माना
Updated Thu, 02 Nov 2017 10:59 PM IST
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कोटद्वार। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भवदीप रावते की अदालत ने चेक बाउंस होने के एक मामले में दोषसिद्ध महिला को एक वर्ष के सश्रम कारावास और डेढ़ लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। उक्त जुर्माने की रकम परिवादी बतौर प्रतिकर प्राप्त करेगा। जुर्माने की रकम अदा न करने की स्थिति में अभियुक्ता को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भोगना होगा।
परिवादी मोहित बलूनी निवासी बालासौड़ के अधिवक्ता धर्मदीप अग्रवाल और अंकित अग्रवाल ने बताया कि अभियुक्ता लक्ष्मी भारती निवासी सिमलचौड़ कोटद्वार ने अपने बेटे की शादी के लिए उनका रिजॉर्ट बुक कराया था। उसका उन पर 2.20 लाख रुपये का बकाया चल रहा था। इसके भुगतान के लिए महिला ने जिला सहकारी बैंक कोटद्वार शाखा के दो चेक उन्हें दिए। उक्त चेकों के भुगतान के लिए जब बैंक में प्रस्तुत किया गया तो खाते में पर्याप्त धनराशि ही नहीं थी। इसकी सूचना खातेदार को दी गई, तब महिला ने चेक भुगतान की अगली तिथि बताई। निर्धारित तिथि पर जब बैंक में चेक भुगतान हेतु प्रस्तुत किए गए तो बैंक से चेक बाउंस हो गए। परिवादी ने महिला को नोटिस भेजकर पंद्रह दिन के भीतर उक्त धनराशि का भुगतान करने को कहा, लेकिन उनके नोटिस का भी जवाब नहीं दिया गया। अंत में उन्हें 138 एनआई एक्ट के तहत परिवाद दर्ज कराना पड़ा।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीले सुनने और पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर अभियुक्ता को एक वर्ष के सश्रम कारावास और डेढ़ लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
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परिवादी मोहित बलूनी निवासी बालासौड़ के अधिवक्ता धर्मदीप अग्रवाल और अंकित अग्रवाल ने बताया कि अभियुक्ता लक्ष्मी भारती निवासी सिमलचौड़ कोटद्वार ने अपने बेटे की शादी के लिए उनका रिजॉर्ट बुक कराया था। उसका उन पर 2.20 लाख रुपये का बकाया चल रहा था। इसके भुगतान के लिए महिला ने जिला सहकारी बैंक कोटद्वार शाखा के दो चेक उन्हें दिए। उक्त चेकों के भुगतान के लिए जब बैंक में प्रस्तुत किया गया तो खाते में पर्याप्त धनराशि ही नहीं थी। इसकी सूचना खातेदार को दी गई, तब महिला ने चेक भुगतान की अगली तिथि बताई। निर्धारित तिथि पर जब बैंक में चेक भुगतान हेतु प्रस्तुत किए गए तो बैंक से चेक बाउंस हो गए। परिवादी ने महिला को नोटिस भेजकर पंद्रह दिन के भीतर उक्त धनराशि का भुगतान करने को कहा, लेकिन उनके नोटिस का भी जवाब नहीं दिया गया। अंत में उन्हें 138 एनआई एक्ट के तहत परिवाद दर्ज कराना पड़ा।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीले सुनने और पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर अभियुक्ता को एक वर्ष के सश्रम कारावास और डेढ़ लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
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